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By: Ravindra Sikarwar

भोपाल: मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में रेत के अवैध उत्खनन और सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाने का एक बड़ा मामला सामने आया है। यह मामला सीधे कटनी जिले के विजयराघवगढ़ से भारतीय जनता पार्टी के विधायक संजय सत्येंद्र पाठक से जुड़ा हुआ है। उनके स्वामित्व या संचालन से जुड़ी चार निजी कंपनियों ने स्वीकृत मात्रा से कई गुना ज्यादा रेत का खनन किया, जिसके बाद जिला प्रशासन ने इन कंपनियों पर कुल 443 करोड़ रुपये से अधिक की जुर्माना राशि थोप दी है।

मामला उस समय जोर पकड़ गया जब विधानसभा के शीतकालीन सत्र में कांग्रेस विधायक डॉ. हीरालाल अलावा (सिलवानी विधानसभा क्षेत्र) ने खनिज साधन विभाग से प्रश्न क्रमांक 685 के तहत जबलपुर जिले में हो रहे अवैध रेत खनन और राजस्व हानि को लेकर लिखित सवाल पूछा। सरकार की ओर से खनिज विभाग ने जो जवाब दिया, उसमें चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।

दोषी ठहराई गईं चार कंपनियाँ
खनिज विभाग ने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया है कि जबलपुर जिले में नर्मदा और उसकी सहायक नदियों से संबद्ध चार रेत खदानों में स्वीकृत सीमा से बहुत अधिक मात्रा में रेत का उत्खनन हुआ। ये चार कंपनियाँ निम्नलिखित हैं:

  1. आनंद माइनिंग कॉर्पोरेशन – टिकरिया (जबलपुर)
  2. नीलिमा मिनरल्स – दुबियारा (जबलपुर)
  3. नीलिमा मिनरल्स – अगरिया (जबलपुर)
  4. पैसिफिक एक्सपोर्ट – झिठी (जबलपुर)

विभाग ने बताया कि ये सभी खदानें नर्मदा नदी और उसकी सहायक नदियों के पट्टे पर दी गई थीं, लेकिन इनके द्वारा की गई खुदाई निर्धारित मात्रा से कई गुना अधिक पाई गई। जांच में पता चला कि पर्यावरणीय मंजूरी, खनन योजना और स्वीकृत ईसी (एनवायरनमेंटल क्लीयरेंस) की सीमा को पूरी तरह ताक पर रखकर अवैध उत्खनन किया गया।

443 करोड़ से ज्यादा की वसूली तय
जांच के बाद जबलपुर कलेक्टर ने विशेष दल गठित किया था। इस दल की रिपोर्ट के आधार पर चारों कंपनियों पर कुल 443,04,86,890 रुपये (लगभग 443 करोड़ 5 लाख रुपये) की पेनल्टी लगाई गई है। यह राशि रॉयल्टी, जुर्माने, पर्यावरण क्षतिपूर्ति और अन्य शुल्कों को मिलाकर तय की गई है।

कलेक्टर ने 10 नवंबर 2025 को अलग-अलग आदेश जारी कर इन कंपनियों को 15 दिन के अंदर पूरी राशि जमा करने का निर्देश दिया है। आदेश में साफ लिखा है कि यदि तय समय में राशि जमा नहीं की गई तो मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत राजस्व वसूली की कार्रवाई की जाएगी, जिसमें संपत्ति कुर्की से लेकर नीलामी तक के कदम शामिल हो सकते हैं।

विधानसभा में सीएम मोहन यादव का जवाब
विधानसभा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस पूरे मामले पर सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि अवैध खनन के खिलाफ राज्य सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। उन्होंने बताया कि दोषी कंपनियों को नोटिस जारी हो चुके हैं और वसूली के आदेश भी लागू कर दिए गए हैं। सीएम ने सदन को आश्वासन दिया कि राशि जमा न होने पर मध्य प्रदेश खनिज नियम 2019 के नियम 216 और भू-राजस्व संहिता के प्रावधानों के तहत सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।

विपक्ष का हमला, सत्ता पक्ष का बचाव
कांग्रेस ने इस मामले को लेकर बीजेपी पर जोरदार हमला बोला है। पार्टी का कहना है कि जिस विधायक की कंपनियों पर इतनी बड़ी राशि की वसूली बकाया है, उस पर अभी तक कोई आपराधिक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? कांग्रेस प्रवक्ता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सवाल उठाया कि क्या सत्ता के दबाव में प्रशासनिक अधिकारी कार्रवाई में नरमी बरत रहे हैं?

दूसरी ओर बीजेपी का कहना है कि यह पूरी तरह प्रशासनिक और तकनीकी मामला है। पार्टी प्रवक्ता ने कहा कि अगर कोई गलती हुई है तो उसकी भरपाई के लिए वसूली की जा रही है और कानून अपना काम कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष बिना वजह राजनीतिक रंग दे रहा है।

क्या है आगे की कार्रवाई?
खनिज विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, अगर 15 दिन की समय-सीमा में कंपनियाँ राशि जमा नहीं करती हैं तो तहसीलदार और नायब तहसीलदार स्तर पर राजस्व वसूली प्रमाण-पत्र (आरआरसी) जारी किया जाएगा। इसके बाद कंपनियों की चल-अचल संपत्ति कुर्क करने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। साथ ही पर्यावरण विभाग भी अलग से इनके खिलाफ कार्रवाई कर सकता है, क्योंकि अधिक उत्खनन से नदी के जल-स्तर और पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचा है।

यह मामला मध्य प्रदेश में रेत माफिया और अवैध खनन के खिलाफ चल रही मुहिम की एक बड़ी कामयाबी माना जा रहा है, लेकिन सवाल यह भी है कि इतनी बड़ी राशि की वसूली आखिर कब तक हो पाएगी और क्या इसमें राजनीतिक दखलंदाजी बाधा बनेगी? फिलहाल पूरे प्रदेश की निगाहें जबलपुर कलेक्टर के अगले कदम पर टिकी हैं।

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