By: Ravindra Sikarwar
ग्वालियर सेंट्रल जेल में पैरोल व्यवस्था को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। जानकारी के अनुसार, पिछले एक वर्ष में जेल प्रशासन द्वारा 700 से अधिक कैदियों को विभिन्न कारणों से पैरोल पर रिहा किया गया था। लेकिन इनमें से 50 से ज्यादा कैदी तय समय पर वापस नहीं लौटे और अब तक फरार हैं। इन फरार कैदियों में कई ऐसे हैं जो हत्या, दुष्कर्म, लूटपाट और अन्य गंभीर अपराधों में दोष सिद्ध होने के बाद सजा काट रहे थे।
यह मामला सामने आने के बाद जेल प्रशासन और जिले की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि यह स्थिति ‘गंभीर लापरवाही’ की श्रेणी में आती है और तत्काल सुधारात्मक कदम उठाए जाने की आवश्यकता है।
कैसे सामने आया मामला?
जेल प्रशासन की ओर से समय-समय पर पैरोल पर बाहर गए कैदियों की मॉनिटरिंग की जाती है। हाल ही में की गई समीक्षा में सामने आया कि 50 से अधिक कैदी पैरोल की अवधि पूरी होने के बावजूद वापस जेल नहीं लौटे। इनमें से कुछ कैदियों की पैरोल अवधि महीनों पहले समाप्त हो चुकी है, जबकि कुछ को हाल ही में लौटना था।
सूत्रों के अनुसार 9 कैदियों की पैरोल अवधि अभी चल रही है, लेकिन उनकी गतिविधियों पर भी संदेह जताया जा रहा है क्योंकि वे प्रशासनिक संपर्क में नहीं हैं। इस सूची में ऐसे अपराधी भी शामिल हैं जो समाज के लिए खतरा माने जाते हैं।
जेल प्रशासन ने जताई चिंता
जेल अधिकारियों ने इस स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पैरोल का उद्देश्य कैदी को सुधरने और सामाजिक दायित्व निभाने का अवसर देना होता है, किंतु कई कैदी इस व्यवस्था का दुरुपयोग कर रहे हैं।
अधिकारियों ने बताया कि कैदी अपनी पैरोल अवधि पूरी होने के बाद भी घरों से गायब हो गए हैं। कई कैदियों के परिवार भी उनके ठिकाने के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दे पा रहे हैं। इससे आशंका जताई जा रही है कि वे या तो अपने पुराने अपराधी गिरोहों से जुड़ सकते हैं या राज्य से बाहर जा सकते हैं।
विशेष टीम करेगी तलाश
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस विभाग ने मिलकर ऐसे फरार कैदियों की तलाश के लिए एक विशेष टीम गठित करने का निर्णय लिया है। यह टीम कैदियों के पुराने रिकॉर्ड, मोबाइल कॉल डिटेल, रिश्तेदारों से संपर्क और संभावित ठिकानों की जांच कर उन्हें पकड़ने की कार्रवाई करेगी।
इसके अलावा, जेल प्रशासन ने भी पैरोल की प्रक्रिया में बदलाव के संकेत दिए हैं। अधिकारियों ने कहा कि भविष्य में पैरोल की अनुमति देते समय कैदियों की पृष्ठभूमि, व्यवहार और जोखिम स्तर को अधिक गंभीरता से परखा जाएगा।
पुलिस की राहत—कुछ कैदी पकड़े गए, कई अब भी लापता
पिछले कुछ सप्ताहों में पुलिस द्वारा कुछ पैरोल जंप करने वाले कैदियों को पुनः गिरफ्तार किया गया है, लेकिन अधिकांश अब भी फरार हैं। कई कैदियों ने अपने मोबाइल नंबर बदल दिए हैं या लोकेशन छुपा ली है, जिससे उनकी तलाश मुश्किल हो गई है।
पुलिस को आशंका है कि कुछ कैदी प्रदेश की सीमा पार कर चुके हैं। ऐसे में अन्य राज्यों की पुलिस से भी सहयोग लिया जाएगा।
स्थानीय लोगों में बढ़ी चिंता
ये कैदी जिन गंभीर आपराधिक मामलों में सजा काट रहे थे, उसे देखते हुए शहर और आसपास के ग्रामीण इलाकों के लोगों में चिंता पैदा हो गई है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि यदि गंभीर अपराधों में दोषी लोग खुलेआम घूमते रहेंगे, तो समाज की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी?
कई सामाजिक संगठनों ने भी प्रशासन से पैरोल प्रणाली की पूरी समीक्षा करने और तत्काल सख्त कदम उठाने की मांग की है।
प्रशासन के कठोर कदमों की उम्मीद
मामले के तूल पकड़ने के बाद उम्मीद की जा रही है कि राज्य स्तरीय स्तर पर भी पैरोल नीति की समीक्षा हो सकती है। प्रशासन का दावा है कि जल्द ही फरार कैदियों को पकड़ने के लिए व्यापक अभियान चलाया जाएगा।
यह घटना यह स्पष्ट करती है कि पैरोल जैसी सकारात्मक व्यवस्था तभी प्रभावी हो सकती है जब उसकी निगरानी मजबूत और निष्पक्ष रूप से की जाए। ग्वालियर सेंट्रल जेल के इस मामले ने सिस्टम को झकझोर दिया है और अब सभी की नजरें प्रशासन पर हैं कि वह आगे कौन से ठोस कदम उठाता है।
