By: Ravindra Sikarwar
छतरपुर जिले में बुधवार को प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने की एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। शहर के कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत गोपाल टोरिया मार्ग पर लंबे समय से चले आ रहे अवैध कब्जों को हटाने के लिए बुलडोजर चलाया गया। इस कार्रवाई में कुल 22 मकानों को हटाया गया, जिनमें रहने वाले परिवारों का कहना है कि वे वर्षों से यहां निवास कर रहे थे। प्रशासन का तर्क है कि अतिक्रमण के कारण सड़क की चौड़ाई बेहद कम हो गई थी, जिससे आम लोगों की आवाजाही में गंभीर परेशानी हो रही थी।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, गोपाल टोरिया मार्ग ऐतिहासिक और रियासती काल का पुराना रास्ता है, जिसकी चौड़ाई मूल रूप से 22 फीट निर्धारित थी। समय के साथ इस मार्ग के दोनों ओर अतिक्रमण बढ़ता चला गया और स्थिति यह बन गई कि रास्ता महज 2 फीट तक सिमट गया। इससे न केवल स्थानीय नागरिकों को परेशानी हो रही थी, बल्कि आपातकालीन सेवाओं की आवाजाही भी प्रभावित हो रही थी। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने मार्ग चौड़ीकरण का निर्णय लिया।
बुधवार सुबह जब कार्रवाई शुरू हुई तो मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद थे। बुलडोजर की कार्रवाई के दौरान प्रभावित परिवारों में नाराजगी देखने को मिली। जिन लोगों के मकान हटाए गए, उनका आरोप है कि उनके घर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनाए गए थे। पीड़ितों का कहना है कि उन्हें पर्याप्त समय नहीं दिया गया और अचानक कार्रवाई कर दी गई, जिससे वे अपने बच्चों और सामान के साथ बेघर हो गए।
प्रभावित परिवारों ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें केवल एक दिन पहले ही नोटिस दिया गया था और अगले ही दिन सुबह उनके घर तोड़ दिए गए। उनका कहना है कि यदि प्रशासन थोड़ा और समय देता तो वे वैकल्पिक व्यवस्था कर सकते थे। कई लोगों ने इसे अन्यायपूर्ण कार्रवाई बताते हुए प्रशासन के खिलाफ रोष जताया।
वहीं, इन आरोपों पर प्रशासन ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। एसडीएम अखिल राठौर ने बताया कि गोपाल टोरिया मार्ग पर अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया अचानक नहीं की गई। उन्होंने कहा कि अप्रैल महीने से ही संबंधित लोगों को बार-बार नोटिस दिए जा रहे थे और स्वेच्छा से कब्जा हटाने के लिए पर्याप्त समय दिया गया था। इसके बावजूद जब लोगों ने अतिक्रमण नहीं हटाया, तो मजबूरी में प्रशासन को सख्त कदम उठाना पड़ा।
प्रशासन का यह भी कहना है कि जिन मकानों को हटाया गया, वे सरकारी भूमि पर बने हुए थे और नियमों के अनुसार अवैध थे। पीएम आवास योजना के तहत बने होने के दावों की जांच की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, यदि कोई पात्र पाया जाता है तो उसे नियमानुसार वैकल्पिक सुविधा या सहायता देने पर विचार किया जाएगा।
इस पूरी कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात रहा। किसी भी तरह की अप्रिय घटना से बचने के लिए प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। कार्रवाई के बाद मार्ग को साफ कर चौड़ीकरण का कार्य शुरू कर दिया गया, जिससे आने वाले समय में लोगों को बेहतर आवागमन सुविधा मिल सके।
स्थानीय नागरिकों का एक वर्ग इस कार्रवाई का समर्थन भी करता नजर आया। उनका कहना है कि सड़क के संकरे होने के कारण रोजाना जाम की स्थिति बनती थी और पैदल चलना तक मुश्किल हो गया था। अब मार्ग चौड़ा होने से क्षेत्र में यातायात व्यवस्था सुधरेगी।
कुल मिलाकर, छतरपुर में की गई यह कार्रवाई प्रशासन की ओर से अतिक्रमण के खिलाफ सख्त संदेश मानी जा रही है। हालांकि, प्रभावित परिवारों की समस्याओं और पुनर्वास को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि प्रशासन इन परिवारों के लिए क्या वैकल्पिक कदम उठाता है और विवाद का समाधान किस तरह निकलता है।
