by-Ravindra Sikarwar
करवा चौथ, भारत में विशेष रूप से हिंदू महिलाओं द्वारा मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए रखा जाता है। यह त्योहार कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है, जो आमतौर पर अक्टूबर या नवंबर में पड़ता है। 2025 में, करवा चौथ 10 अक्टूबर को मनाया जाएगा। यह पर्व न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि पति-पत्नी के बीच प्रेम और विश्वास के बंधन को भी मजबूत करता है। इस लेख में हम करवा चौथ के प्रमुख रीति-रिवाजों को विस्तार से समझेंगे, जो इस दिन को खास बनाते हैं।
करवा चौथ का महत्व:
करवा चौथ का पर्व मुख्य रूप से उत्तर भारत में, जैसे पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, और मध्य प्रदेश में व्यापक रूप से मनाया जाता है। ‘करवा’ का अर्थ है मिट्टी का घड़ा, और ‘चौथ’ चतुर्थी तिथि को दर्शाता है। यह व्रत सुहागिन महिलाओं द्वारा अपने पति की लंबी आयु, स्वास्थ्य और समृद्धि के लिए रखा जाता है। कुछ क्षेत्रों में अविवाहित महिलाएं भी अच्छे जीवनसाथी की कामना के लिए यह व्रत रखती हैं। यह त्योहार पौराणिक कथाओं, जैसे वीरवती और सत्यवान-सावित्री की कहानियों से प्रेरित है, जो निष्ठा और समर्पण का प्रतीक हैं।
करवा चौथ के प्रमुख रीति-रिवाज:
करवा चौथ के रीति-रिवाज दिन के विभिन्न समय पर किए जाते हैं और प्रत्येक अनुष्ठान का अपना विशेष महत्व होता है। नीचे इस पर्व के सभी महत्वपूर्ण रीति-रिवाजों का वर्णन है:
- सुबह की शुरुआत: सरगी
- करवा चौथ का व्रत दिन के प्रारंभ से पहले शुरू हो जाता है। सूर्योदय से पहले, व्रत रखने वाली महिलाएं अपनी सास द्वारा दी गई सरगी ग्रहण करती हैं। सरगी एक थाली होती है जिसमें खाद्य पदार्थ जैसे मिठाई, फल, मेवे, सेवइयां, और पूड़ी शामिल होती हैं। यह भोजन महिलाओं को दिनभर के निर्जला व्रत के लिए ऊर्जा प्रदान करता है।
- सास द्वारा दी गई सरगी प्यार और आशीर्वाद का प्रतीक है। कुछ क्षेत्रों में, अगर सास उपलब्ध न हो, तो महिलाएं स्वयं सरगी तैयार कर सकती हैं।
- सरगी खाने के बाद, महिलाएं संकल्प लेती हैं कि वे दिनभर पानी और भोजन ग्रहण नहीं करेंगी, जब तक कि चांद नजर न आए और व्रत पूर्ण न हो।
- निर्जला व्रत:
- करवा चौथ का व्रत सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है, क्योंकि यह निर्जला होता है, यानी बिना पानी और भोजन के। यह व्रत सूर्योदय से शुरू होकर चंद्रोदय तक चलता है।
- इस दौरान महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करती हैं। कुछ महिलाएं इस समय मंदिरों में जाकर पूजा करती हैं या घर पर ही पूजा-अर्चना करती हैं।
- शाम की पूजा: करवा चौथ कथा
- शाम के समय, सूर्यास्त से पहले, महिलाएं एकत्रित होकर सामूहिक पूजा करती हैं। यह पूजा आमतौर पर पड़ोस या रिश्तेदारों के साथ मिलकर की जाती है।
- पूजा के लिए एक छोटा मंदिर या चौकी सजाई जाती है, जिसमें भगवान शिव-पार्वती, गणेश जी, और करवा माता की मूर्ति या चित्र रखा जाता है। करवा (मिट्टी का घड़ा) भी पूजा का हिस्सा होता है, जिसमें पानी या दूध भरा जाता है।
- महिलाएं करवा चौथ की कथा सुनती हैं, जिसमें वीरवती, सावित्री, या करवा माता की कहानी शामिल होती है। ये कथाएं व्रत के महत्व और निष्ठा की शक्ति को दर्शाती हैं।
- पूजा के दौरान, महिलाएं एक थाली सजाती हैं, जिसमें रोली, चंदन, दीपक, फूल, मिठाई, और सिंदूर होता है। इस थाली को कथा के दौरान एक-दूसरे को पास किया जाता है, जिसे फेरी कहते हैं।
- चंद्र दर्शन और व्रत तोड़ना:
- करवा चौथ का सबसे महत्वपूर्ण और प्रतीक्षित हिस्सा है चंद्र दर्शन। चंद्रोदय के बाद, महिलाएं चांद को छलनी के माध्यम से देखती हैं और उसकी पूजा करती हैं। छलनी में दीपक जलाकर चांद को अर्घ्य दिया जाता है।
- इसके बाद, महिलाएं छलनी के माध्यम से अपने पति को देखती हैं, जो प्रेम और विश्वास का प्रतीक है। पति फिर अपनी पत्नी को पानी या मिठाई खिलाकर व्रत तुड़वाता है।
- कुछ क्षेत्रों में, अगर पति मौजूद नहीं है, तो महिलाएं केवल चांद की पूजा करके व्रत तोड़ती हैं।
- श्रृंगार और उत्सव:
- करवा चौथ के दिन महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं, जिसमें मेहंदी, बिंदी, सिंदूर, मंगलसूत्र, चूड़ियां, और सुंदर परिधान शामिल हैं। यह न केवल पर्व का हिस्सा है, बल्कि वैवाहिक जीवन की खुशी का प्रतीक भी है।
- कई घरों में, व्रत के बाद परिवार एक साथ भोजन करता है, जिसमें विशेष व्यंजन जैसे पूड़ी, हलवा, खीर, और अन्य मिठाइयां शामिल होती हैं।
करवा चौथ की तैयारी:
- पूजा सामग्री: महिलाएं पहले से ही पूजा के लिए सामान तैयार करती हैं, जैसे करवा, दीपक, रोली, चावल, मिठाई, और फल।
- मेहंदी: करवा चौथ से एक या दो दिन पहले, महिलाएं अपने हाथों और पैरों पर मेहंदी लगाती हैं, जो सुहाग का प्रतीक है।
- नए वस्त्र: कई महिलाएं इस दिन नए कपड़े पहनती हैं, खासकर लाल, गुलाबी, या हरे रंग के, जो शुभ माने जाते हैं।
- सामुदायिक आयोजन: कुछ क्षेत्रों में, सामुदायिक स्तर पर करवा चौथ का आयोजन होता है, जहां महिलाएं एक साथ पूजा करती हैं और कथा सुनती हैं।
आधुनिक समय में करवा चौथ:
आज के समय में, करवा चौथ का स्वरूप थोड़ा बदल गया है। कई पुरुष भी अपनी पत्नियों के साथ व्रत रखते हैं, जो आपसी प्रेम और समानता को दर्शाता है। इसके अलावा, टेक्नोलॉजी के उपयोग से दूर रहने वाले दंपति वीडियो कॉल के माध्यम से चंद्र दर्शन और व्रत तोड़ने की प्रक्रिया पूरी करते हैं। सोशल मीडिया पर मेहंदी डिज़ाइनों, सजावट, और उत्सव की तस्वीरें साझा करना भी आम हो गया है।
सावधानियां और स्वास्थ्य:
- स्वास्थ्य का ध्यान: निर्जला व्रत कठिन हो सकता है, इसलिए पर्याप्त नींद और सरगी में पौष्टिक भोजन लेना जरूरी है। गर्भवती महिलाओं, मधुमेह रोगियों, या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित महिलाओं को चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए।
- सुरक्षा: रात में चंद्र दर्शन के लिए छत पर जाते समय सावधानी बरतें।
- आधुनिक दृष्टिकोण: कुछ लोग व्रत को लैंगिक समानता के दृष्टिकोण से देखते हैं और सुझाव देते हैं कि इसे जबरदस्ती नहीं थोपा जाना चाहिए। यह व्यक्तिगत पसंद और विश्वास पर आधारित होना चाहिए।
करवा चौथ न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि प्रेम, विश्वास, और समर्पण का उत्सव भी है। इसके रीति-रिवाज, जैसे सरगी, निर्जला व्रत, कथा, और चंद्र दर्शन, इस पर्व को अनोखा और भावनात्मक बनाते हैं। यह पर्व भारतीय संस्कृति की समृद्ध परंपराओं को दर्शाता है और दंपति के बीच के बंधन को और गहरा करता है। चाहे पारंपरिक तरीके से मनाया जाए या आधुनिक ढंग से, करवा चौथ का मूल भाव प्यार और एकता का है। 20 अक्टूबर 2025 को इस पर्व को उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाएं, लेकिन अपनी सेहत और विश्वास को प्राथमिकता दें।
