By: Ravindra Sikarwar
नई दिल्ली: कर्मचारियों के लिए एक राहत भरी खबर है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) जल्द ही प्रॉविडेंट फंड (पीएफ) की निकासी को और भी आसान बनाने जा रहा है। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने हाल ही में एक साक्षात्कार में घोषणा की है कि मार्च 2026 से पहले सदस्य अपने पीएफ खाते से 75 प्रतिशत तक की राशि सीधे एटीएम मशीनों से या यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) के माध्यम से निकाल सकेंगे। यह सुविधा ईपीएफओ 3.0 अपग्रेड का हिस्सा है, जो सदस्यों को बैंक खाते की तरह त्वरित पहुंच प्रदान करेगी।
वर्तमान में पीएफ निकासी की प्रक्रिया में कई कागजी कार्यवाही और इंतजार शामिल होता है। सदस्यों को ऑनलाइन फॉर्म भरना पड़ता है, नियोक्ता की मंजूरी लेनी पड़ती है और फिर ईपीएफओ कार्यालय से अनुमोदन का इंतजार करना पड़ता है, जो कई दिनों या हफ्तों तक खिंच सकता है। लेकिन नई व्यवस्था में यह सब बदल जाएगा। मंत्री ने कहा कि सदस्यों का पीएफ खाता उनके बैंक खाते, आधार और यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (यूएएन) से पहले से ही जुड़ा हुआ है। अब डेबिट कार्ड की जानकारी भी जोड़ी जाएगी, जिससे एटीएम से निकासी संभव हो सकेगी। इसी तरह यूपीआई से भी तुरंत ट्रांसफर किया जा सकेगा।
यह बदलाव विशेष रूप से उन कर्मचारियों के लिए फायदेमंद होगा जो आपात स्थिति में अपनी बचत का उपयोग करना चाहते हैं। उदाहरण के लिए, चिकित्सा खर्च, शिक्षा, विवाह या घर खरीदने जैसी जरूरतों के लिए अब लंबी प्रक्रिया से गुजरना नहीं पड़ेगा। मंत्री मांडविया ने जोर देकर कहा कि पीएफ का पैसा सदस्यों का अपना है और सरकार का प्रयास है कि वे इसे आसानी से उपयोग कर सकें। हालांकि, रिटायरमेंट के लिए सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पूरे 100 प्रतिशत निकासी की अनुमति नहीं दी जाएगी। कम से कम 25 प्रतिशत राशि खाते में बनी रहेगी, ताकि भविष्य की जरूरतें सुरक्षित रहें।
अक्टूबर 2025 में ईपीएफओ की सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (सीबीटी) की बैठक में कई महत्वपूर्ण सुधारों को मंजूरी दी गई थी। इनमें आंशिक निकासी की सीमा को 75 प्रतिशत तक बढ़ाना, न्यूनतम सेवा अवधि को एक साल करना और निकासी की श्रेणियों को 13 से घटाकर सिर्फ तीन करना शामिल है। अब बिना किसी कारण बताए विशेष परिस्थितियों में निकासी संभव होगी। शिक्षा और विवाह के लिए निकासी की संख्या भी बढ़ाई गई है – शिक्षा के लिए 10 बार और विवाह के लिए 5 बार तक। इन सुधारों का मकसद सदस्यों को अधिक लचीलापन प्रदान करना है।
ईपीएफओ 3.0 के तहत ऑटो सेटलमेंट की सुविधा भी आएगी, जिसमें दावों का निपटारा स्वचालित रूप से हो जाएगा। साथ ही, आंशिक निकासी के लिए कोई दस्तावेज जमा करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। यह डिजिटल अपग्रेड करीब 7-8 करोड़ सदस्यों को लाभ पहुंचाएगा, खासकर उन लोगों को जो ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं या जिन्हें ऑनलाइन प्रक्रिया में दिक्कत आती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम न केवल सुविधा बढ़ाएगा बल्कि ईपीएफओ पर प्रशासनिक बोझ भी कम करेगा। पहले कई दावे जटिल प्रक्रिया के कारण लंबित रह जाते थे या रद्द हो जाते थे। अब एटीएम और यूपीआई जैसी रोजमर्रा की सुविधाओं से जुड़कर पीएफ बचत को बैंक बचत की तरह उपयोगी बनाया जा रहा है। हालांकि, सुरक्षा के लिहाज से निकासी पर कुछ सीमाएं रहेंगी, जैसे प्रति लेनदेन की अधिकतम राशि या ओटीपी/पिन आधारित सत्यापन।
यह सुविधा लागू होने के बाद कर्मचारियों को आपातकालीन स्थितियों में तुरंत राहत मिलेगी। उदाहरणस्वरूप, अगर किसी को अचानक चिकित्सा खर्च की जरूरत पड़े तो वह बिना देरी के अपनी बचत का उपयोग कर सकेगा। सरकार का यह प्रयास कर्मचारियों की वित्तीय स्वतंत्रता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मार्च 2026 से पहले इस सुविधा के शुरू होने की उम्मीद है, जिससे नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत में लाखों कर्मचारियों को बड़ा तोहफा मिलेगा।
कुल मिलाकर, ईपीएफओ के ये बदलाव कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही शिकायतों को दूर करने का प्रयास हैं। डिजिटल इंडिया की दिशा में यह एक और मजबूत कदम है, जो बचत को अधिक पहुंचयोग्य और उपयोगी बनाएगा। सदस्यों को सलाह दी जाती है कि वे अपने यूएएन को सक्रिय रखें और बैंक खाते को अपडेट करें, ताकि नई सुविधाओं का पूरा लाभ उठा सकें।
