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By: Ravindra Sikarwar

मध्यप्रदेश के लाखों बिजली उपभोक्ताओं के लिए 2026 की शुरुआत झटका लेकर आ सकती है। मध्यप्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी ने राज्य विद्युत नियामक आयोग के सामने बिजली दरों में औसतन 10 फीसदी तक की बढ़ोतरी का प्रस्ताव रख दिया है। अगर यह प्रस्ताव स्वीकृत हो गया तो जनवरी-फरवरी 2026 के बिलों में उपभोक्ताओं को एक बार फिर मोटी रकम चुकानी पड़ सकती है।

कंपनी का दावा: खर्च बढ़ा, घाटा बढ़ा, बढ़ानी पड़ेगी दरें
पावर कंपनी ने अपनी याचिका में तर्क दिया है कि पिछले दो सालों में कोयले की कीमतों में भारी उछाल, ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन लाइन लॉस में कमी न आना, कर्मचारियों के वेतन-भत्तों में वृद्धि और नए पावर प्लांट्स की रखरखाव लागत ने कंपनी पर भारी वित्तीय बोझ डाला है। कंपनी का कहना है कि अगर दरें नहीं बढ़ाई गईं तो वह वित्तीय संकट में फंस जाएगी और बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता पर भी असर पड़ेगा।

सूत्रों के मुताबिक प्रस्तावित बढ़ोतरी अधिकतम 10 प्रतिशत तक हो सकती है, यानी घरेलू उपभोक्ताओं के यूनिट रेट में 50 पैसे से लेकर 80 पैसे तक का इजाफा संभव है। कृषि उपभोक्ताओं पर भी इसका असर पड़ेगा, हालांकि सरकार सब्सिडी के जरिए किसानों को कुछ राहत देने की कोशिश कर सकती है।

सिर्फ आठ महीने पहले ही बढ़े थे दाम
उपभोक्ता अभी पिछले झटके से उबरे भी नहीं हैं। अप्रैल 2025 में ही नियामक आयोग ने बिजली दरों में औसतन 3.46 प्रतिशत की बढ़ोतरी को मंजूरी दी थी। उस समय पावर कंपनियों ने 7.52 प्रतिशत बढ़ोतरी की मांग की थी, लेकिन जनता के विरोध और आयोग की सख्ती के बाद इसे आधा कर दिया गया था। फिर भी घरेलू कनेक्शन पर फिक्स्ड चार्ज बढ़ाए गए थे और हर श्रेणी में कुछ पैसे प्रति यूनिट का इजाफा हुआ था। अब एक बार फिर सिर्फ आठ महीने के अंतराल में नया प्रस्ताव उपभोक्ताओं को परेशान कर रहा है।

15 दिसंबर से शुरू हो सकती हैं जन-सुनवाइयाँ
नियामक आयोग अब इस प्रस्ताव पर जनता की राय लेगा। सूत्र बता रहे हैं कि 15 दिसंबर 2025 से भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में जन-सुनवाइयाँ शुरू हो सकती हैं। इन सुनवाइयों में आम नागरिक, उद्योग संगठन, किसान संघ और सामाजिक संगठन अपनी आपत्तियाँ दर्ज करा सकेंगे। आयोग इन सभी पक्षों को सुनने के बाद ही अंतिम फैसला लेगा। पिछले अनुभवों को देखते हुए आमतौर पर प्रस्तावित बढ़ोतरी को कुछ कम जरूर किया जाता है, लेकिन पूरी तरह खारिज करने के उदाहरण बहुत कम हैं।

उपभोक्ताओं में आक्रोश, सरकार पर दबाव बढ़ेगा
प्रस्ताव सामने आते ही सोशल मीडिया से लेकर गाँव-शहरों तक में लोग नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। विपक्षी दल इसे लेकर सरकार पर हमलावर होने की तैयारी में हैं। उनका कहना है कि महंगाई पहले से ही कमर तोड़ रही है और ऊपर से बिजली के दाम बढ़ना आम आदमी के लिए दोहरी मार होगा। कई संगठनों ने पहले से ही आंदोलन की चेतावनी दे दी है।

क्या है उपभोक्ताओं के पास विकल्प?
विशेषज्ञों का कहना है कि उपभोक्ता जन-सुनवाई में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें और लिखित आपत्तियाँ दर्ज कराएँ। सोलर रूफटॉप लगवाने वालों की संख्या बढ़ रही है, जिससे ग्रिड पर निर्भरता कम हो रही है। सरकार भी नेट मीटरिंग और सब्सिडी को बढ़ावा दे रही है, लेकिन अभी भी ज्यादातर घरेलू उपभोक्ता पूरी तरह ग्रिड पर ही निर्भर हैं।

नियामक आयोग के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह कंपनी के वित्तीय दबाव और जनता की जेब के बीच संतुलन कैसे बनाता है। एक बात साफ है कि नए साल में बिजली बिल जरूर भारी होने वाला है; सवाल सिर्फ यह है कि कितना भारी?

उपभोक्ताओं को सलाह दी जा रही है कि अभी से अपनी बिजली खपत कम करने के उपाय शुरू कर दें, क्योंकि जनवरी का बिल जब आएगा तो शायद मुस्कुराहट छिप जाएगी।

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