By: Ravindra Sikarwar
मध्य प्रदेश में सेकेंड हैंड या पुराने वाहनों के कारोबार को नियंत्रित करने के लिए परिवहन विभाग ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब कोई भी डीलर या व्यापारी बिना आधिकारिक प्राधिकार पत्र के पुराने वाहनों की खरीद या बिक्री नहीं कर सकेगा। यह नियम केंद्र सरकार की 2022 की अधिसूचना पर आधारित है, जिसे राज्य स्तर पर सख्ती से लागू करने का फैसला लिया गया है। इससे अवैध कारोबार पर अंकुश लगेगा और वाहन मालिकों को कानूनी झंझटों से राहत मिलेगी।
नए नियमों की पृष्ठभूमि और जरूरत
केंद्र सरकार ने वर्ष 2022 में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के माध्यम से एक अधिसूचना जारी की थी, जिसमें पुराने वाहनों के डीलरों के लिए प्राधिकार प्राप्त करना अनिवार्य कर दिया गया। मध्य प्रदेश में लंबे समय से कई निजी व्यापारी बिना किसी विभागीय अनुमति के इस कारोबार में लगे हुए थे, जिससे अवैध गतिविधियां बढ़ रही थीं। अब राज्य परिवहन विभाग ने इस पर कड़ा रुख अपनाया है।
विभाग का कहना है कि बिना प्राधिकार के वाहन खरीद-बिक्री करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह कदम वाहन मालिकों की सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। अवैध डीलिंग से वाहनों का दुरुपयोग, दस्तावेजों में गड़बड़ी और कानूनी विवाद बढ़ रहे थे, जिन्हें रोकने के लिए यह नियम प्रभावी साबित होगा।
अधिकृत डीलर की भूमिका और सीमाएं
नए नियमों के तहत अधिकृत डीलर को ‘डीम्ड ओनर’ (मान्य मालिक) का दर्जा दिया जाता है। ऐसे डीलर ही पुराने वाहनों को खरीदकर बेच सकते हैं। डीम्ड ओनर की जिम्मेदारियां और अधिकार सीमित हैं:
- संभावित खरीदार को वाहन का परीक्षण कराने की अनुमति।
- वाहन का प्रदर्शन (डेमो) करना।
- पेंटिंग, मरम्मत या रखरखाव के लिए वाहन रखना।
इन कार्यों के अलावा वाहन का कोई अन्य उपयोग नहीं किया जा सकता। बिक्री पूरी होने के बाद ही ट्रांसफर प्रक्रिया पूरी होगी। यदि वाहन मालिक अधिकृत डीलर के जरिए अपना वाहन बेचता है, तो वाहन केवल नवीनीकरण संबंधी कार्यों जैसे फिटनेस सर्टिफिकेट, प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र या पंजीयन नवीनीकरण के लिए ही ले जाया जा सकता है।
अधिकृत डीलर को वाहन से जुड़े सभी दस्तावेजों को अपडेट रखना होगा और किसी दुर्घटना या घटना की स्थिति में वह खुद जिम्मेदार होगा। इससे वाहन का दुरुपयोग रुकेगा और मूल मालिक कानूनी परेशानियों से बच सकेगा।
प्राधिकार प्राप्त करने की प्रक्रिया और शुल्क
पुराने वाहनों के कारोबार के लिए प्राधिकार पत्र प्राप्त करने की फीस 25 हजार रुपये निर्धारित की गई है। यह प्रक्रिया ऑनलाइन या संबंधित आरटीओ कार्यालय के माध्यम से पूरी की जा सकती है। प्राधिकार मिलने के बाद डीलर कानूनी रूप से कारोबार कर सकेगा।
वाहन मालिकों के लिए राहत की बात यह है कि अधिकृत डीलर के माध्यम से वाहन बेचने पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना पड़ेगा। यह नियम वाहन स्क्रैपिंग पॉलिसी से भी जुड़ा है, जहां पुराने वाहनों को रजिस्टर्ड स्क्रैपिंग फैसिलिटी में ले जाकर नष्ट करने पर टैक्स छूट मिलती है। लेकिन यहां फोकस सेकेंड हैंड मार्केट पर है।
विभागीय निर्देश और कार्रवाई की तैयारी
परिवहन आयुक्त विवेक शर्मा ने सभी जिला और क्षेत्रीय परिवहन अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि नियमों का उल्लंघन करने वालों पर तुरंत कार्रवाई की जाए। विभागीय टीमों को अवैध डीलरों की पहचान करने और छापेमारी करने के आदेश दिए गए हैं। इससे राज्य में पुराने वाहनों का कारोबार पूरी तरह नियंत्रित और पारदर्शी हो जाएगा।
यह कदम न केवल अवैध व्यापार को रोकेगा, बल्कि वाहन मालिकों और खरीदारों दोनों को सुरक्षा प्रदान करेगा। दस्तावेजों की वैधता सुनिश्चित होने से धोखाधड़ी के मामले कम होंगे।
लाभ और भविष्य की दिशा
ये नए नियम पर्यावरण संरक्षण से भी जुड़े हैं, क्योंकि पुराने वाहनों को नियंत्रित करने से प्रदूषण कम होगा। साथ ही, अधिकृत डीलरों के माध्यम से कारोबार होने से बाजार में विश्वसनीयता बढ़ेगी। वाहन मालिकों को सलाह दी गई है कि वे केवल प्राधिकृत डीलरों से ही लेन-देन करें, ताकि कानूनी झंझटों से बचा जा सके।
राज्य सरकार की यह पहल वाहन क्षेत्र में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण है। आने वाले समय में और सख्ती से लागू होने पर पुराने वाहनों का बाजार अधिक व्यवस्थित हो जाएगा, जो अंततः उपभोक्ताओं के हित में होगा।
