by-Ravindra Sikarwar
जबलपुर, मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को निजी अस्पतालों द्वारा नियमों के उल्लंघन पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट और जबलपुर अस्पताल अग्नि कांड की जांच रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। यह आदेश एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई के दौरान आया, जिसमें अस्पतालों के पंजीकरण और जबलपुर में हुए अग्निकांड, जिसमें आठ लोगों की जान चली गई थी, को लेकर चिंताएं जताई गई थीं।
हाई कोर्ट के मुख्य निर्देश:
- कार्रवाई रिपोर्ट: हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से उन निजी अस्पतालों के खिलाफ की गई विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है, जो नियमों और विनियमों का उल्लंघन करते हुए संचालित हो रहे हैं। यह रिपोर्ट उन सभी कदमों का ब्योरा देगी जो इन अस्पतालों के खिलाफ उठाए गए हैं।
- जांच रिपोर्ट: अदालत ने जबलपुर के एक निजी अस्पताल में हुए अग्निकांड, जिसमें आठ लोगों की मौत हो गई थी, की उच्च-स्तरीय समिति द्वारा की गई जांच रिपोर्ट भी तलब की है। यह रिपोर्ट घटना के कारणों, जिम्मेदारियों और सुरक्षा खामियों पर प्रकाश डालेगी।
जनहित याचिका के मुद्दे:
जनहित याचिका (PIL) में विशेष रूप से COVID-19 महामारी के दौरान निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम के पंजीकरण में हुई अनियमितताओं और खामियों को उजागर किया गया था। याचिका में आरोप लगाया गया था कि कई अस्पताल बिना उचित मानदंडों का पालन किए पंजीकृत किए गए थे, जिससे मरीजों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई थी।
जबलपुर अग्निकांड और सुरक्षा संबंधी चिंताएं:
यह पूरा मामला जबलपुर के न्यू लाइफ अस्पताल में हुए भीषण अग्निकांड के बाद सुर्खियों में आया था। इस आगजनी में आठ निर्दोष लोगों की जान चली गई थी। जांच में सामने आया था कि अस्पताल में आपातकालीन निकास (Emergency Exits) जैसी मूलभूत सुरक्षा सुविधाओं का अभाव था, जिसने अस्पताल सुरक्षा के मुद्दे को एक बार फिर सबसे आगे ला दिया।
पुलिस जांच का आदेश:
हाई कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि जबलपुर अग्निकांड की उच्च-स्तरीय जांच रिपोर्ट को पुलिस को सौंपा जाए ताकि इस मामले में आगे की आपराधिक जांच की जा सके। इससे दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकेगी।
पहले भी हुए हैं सख्त आदेश:
अदालत ने इस मामले में पहले भी सख्त रुख अपनाया है। पूर्व में, हाई कोर्ट ने उन डॉक्टरों के निलंबन का आदेश दिया था, जिन्होंने कथित तौर पर बिना उचित जांच के अस्पताल के पंजीकरण की सिफारिश की थी। इसके साथ ही, दो अन्य अस्पतालों का पंजीकरण रद्द करने का भी आदेश दिया गया था, जो नियमों का उल्लंघन करते पाए गए थे।
यह निर्देश दर्शाता है कि मध्य प्रदेश हाई कोर्ट राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर है और यह सुनिश्चित करना चाहता है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले अस्पतालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
