By: Ravindra Sikarwar
सीधी (मध्यप्रदेश): एक सरकारी शिक्षक के लिए सुबह की पहली किरण आमतौर पर स्कूल जाने की तैयारी कराती है, लेकिन शुक्रवार 5 दिसंबर 2025 की सुबह कुछ अलग थी। ठंड से सिकुड़ी सड़कों पर जब ज्यादातर लोग गहरी नींद में थे, ठीक सुबह 5 बजे रीवा की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की टीम ने सीधी जिले में तीन अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ दबिश दी। निशाना था कुसमी विकासखंड के शासकीय प्राथमिक स्कूल खोखरा में पदस्थ सहायक शिक्षक अभिमन्यु सिंह।
शिक्षक का सरकारी आवास पटेल पुल के पास है। यहीं सबसे पहले EOW की टीम पहुंची। उसके बाद टीम मड़वास क्षेत्र में उनके दो लग्जरी मकानों पर भी छापा मारने पहुंच गई। पूरे दिन चली कार्रवाई में जो तथ्य सामने आए, वे चौंकाने वाले थे। 1998 से 2025 तक के 27 वर्षों की सेवा में अभिमन्यु सिंह की वैध आय महज 57 लाख 28 हजार रुपए थी, लेकिन उनके पास कुल 4 करोड़ 36 लाख रुपए से अधिक की संपत्ति मिली। यानी वैध कमाई की 665 प्रतिशत!
कैसे बनाई इतनी संपत्ति?
सातवें वेतनमान के तहत अभिमन्यु सिंह को हर महीने करीब एक लाख रुपए सैलरी मिलती थी। इतनी तनख्वाह में आमतौर पर मध्यमवर्गीय जीवन चलता है, लेकिन इस शिक्षक महोदय ने इसे पांच गुना से भी ज्यादा की काली कमाई का जरिया बना लिया। जांच अधिकारियों के मुताबिक अभिमन्यु सिंह स्कूल में यूडीटी (उपभोक्ता दुकान संचालक) का अतिरिक्त प्रभार भी संभालते थे। इसी पद का दुरुपयोग कर उन्होंने वर्षों तक सरकारी योजनाओं के पैसे में बड़े पैमाने पर हेराफेरी की।
- निर्माण कार्यों के नाम पर फर्जी बिल
- स्टेशनरी, फर्नीचर, खेल सामग्री की खरीदी में मनमाने दाम दिखाना
- छात्रावास भत्ते, स्कॉलरशिप और मिड-डे मील जैसे मदों में डबल इंट्री
- एक ही सामान की दो-दो पर्चियां बनवाकर पैसा निकालना
इन तरीकों से हर साल लाखों रुपए की काली कमाई वे अपने पास जमा करते रहे। यही पैसा बाद में लग्जरी मकानों, प्लॉट्स, महंगी गाड़ियों और बैंक खातों में बदलता गया।
छापे में क्या-क्या मिला?
EOW की टीम ने तीन ठिकानों से भारी मात्रा में दस्तावेज, प्रॉपर्टी पेपर्स और लग्जरी सामान बरामद किया है। प्रमुख चीजें इस प्रकार हैं:
- सीधी और मड़वास में तीन लग्जरी मकान (दो पूर्ण निर्मित, एक अधूरा)
- दो महंगे प्लॉट
- एक लग्जरी कार
- एक बुलडोजर (जो निर्माण कार्यों में इस्तेमाल होता था)
- एक महंगी मोटरसाइकिल
- कई बैंक खातों के पासबुक और चेकबुक
- लाखों रुपए की बीमा पॉलिसियां और निवेश संबंधी दस्तावेज
इन सबकी कुल कीमत शुरुआती आकलन में ही 4.36 करोड़ रुपए से अधिक आंकी गई है। टीम ने सभी दस्तावेज जब्त कर लिए हैं और अब बैंक ट्रांजेक्शन, प्रॉपर्टी रजिस्ट्री और निवेश के पूरे नेटवर्क की गहन जांच शुरू कर दी गई है।
शिकायत मिली थी कई महीने पहले
EOW को अभिमन्यु सिंह के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति की शिकायत कई महीने पहले मिली थी। इसके बाद गुप्त तरीके से उनकी संपत्ति और बैंक खातों की पड़ताल शुरू हुई। जब सारे सबूत जुट गए तब जाकर शुक्रवार को एक साथ तीन ठिकानों पर छापेमारी की गई। पूरे ऑपरेशन को रीवा और सीधी की EOW टीम ने मिलकर अंजाम दिया।
शिक्षा विभाग में हड़कंप
इस खुलासे के बाद पूरे जिले के शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। एक साधारण सहायक शिक्षक का इतने बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार करना यह बताता है कि सरकारी योजनाओं के पैसे की लूट कितने सुनियोजित तरीके से हो रही है। स्थानीय लोग हैरान हैं कि जो शख्स बच्चों को ईमानदारी और नैतिकता सिखाने का दावा करता था, वही सबसे बड़ा भ्रष्टाचारी निकला।
अभी मामले की जांच जारी है। EOW के अधिकारी जल्द ही अभिमन्यु सिंह के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का नियमित प्रकरण दर्ज कर गिरफ्तारी की कार्रवाई करेंगे। साथ ही उनके साथ मिलकर काम करने वाले अन्य अधिकारियों-कर्मचारियों और ठेकेदारों की भी तलाश की जा रही है।
एक शिक्षक का यह काला चेहरा न सिर्फ शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है, बल्कि यह भी बताता है कि सरकारी स्कूलों में आने वाला हर पैसा कितने आसानी से कुछ लोगों की जेब में चला जाता है।
