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By: Ravindra Sikarwar

मध्य प्रदेश में कर चोरी के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई का बिगुल बज चुका है। इंदौर स्थित सेंट्रल जीएसटी एवं केंद्रीय उत्पाद शुल्क कमिश्नरेट ने गुटखा कारोबारी किशोर वाधवानी और उनके सहयोगी दर्जनों फर्मों-व्यक्तियों को कुल 2002 करोड़ रुपये का टैक्स डिमांड नोटिस थमा दिया है। जांच में 1946 करोड़ रुपये की संगठित कर चोरी सामने आई है। यह राशि राज्य के इतिहास में एक ही प्रकरण में जारी सबसे बड़ा कर दावा है।

यह पूरा खेल जून 2020 में उस वक्त खुला जब कमिश्नरेट की टीम ने इंदौर, उज्जैन, देवास और आसपास के इलाकों में एक साथ 50 से ज्यादा ठिकानों पर छापे मारे थे। गुटखा, पान मसाला और तंबाकू से जुड़े कारोबारियों पर शिकंजा कसा गया। जांच में पता चला कि ये लोग फर्जी बिल बुक, काल्पनिक फर्मों और लेयरिंग के जरिए सालों से जीएसटी और सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी की भारी-भरकम चोरी कर रहे थे। पहले चरण में ही विभाग ने 151 करोड़ जीएसटी और 76 करोड़ एक्साइज ड्यूटी का नोटिस जारी किया था।

नोटिस पाने वालों में सबसे बड़ा नाम किशोर वाधवानी का है। उनके अलावा एलोरा टोबैको कंपनी, विनायका फिल्टर्ड प्राइवेट लिमिटेड, शिमला इंडस्ट्रीज, दबंग दुनिया पब्लिकेशन, श्याम खेमानी, अनमोल मिश्रा, धर्मेंद्र पीठादिया, राजू गर्ग, देवेंद्र द्विवेदी, विनोद बिदासरिया, रमेश परिहार, जौहर हसन और दर्जनों अन्य फर्में-व्यक्ति शामिल हैं। इनके अलावा TAN एंटरप्राइजेज, SR ट्रेडिंग, निश्का इंटरप्राइजेस, इंक फ्रूट, MN इंटरप्राइजेस, रानी प्रेस और NG ग्राफिक्स जैसी कंपनियों को भी जिम्मेदार ठहराया गया है।

आरोपियों ने पहले तो हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। लंबी सुनवाई के बाद मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने उनकी याचिका सिरे से खारिज कर दी और कहा कि “ये लोग सिर्फ कानूनी प्रक्रिया को लटकाने की कोशिश कर रहे हैं।” कोर्ट ने हर याचिकाकर्ता पर 2-2 लाख रुपये का जुर्माना भी ठोंक दिया।

हार नहीं मानी आरोपियों ने। मामला सुप्रीम कोर्ट तक ले गए। लेकिन 2 दिसंबर 2025 को देश की सबसे बड़ी अदालत ने भी एक झटके में सभी याचिकाएं रद्द कर दीं। जस्टिस बी.आर. गवई और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने साफ कहा, “प्रथम दृष्टया टैक्स चोरी के पुख्ता सबूत मौजूद हैं, कोई हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता।”

सुप्रीम कोर्ट के इस अंतिम झटके के महज चार दिन बाद, यानी 6 दिसंबर को कमिश्नरेट ने नया और भारी-भरकम डिमांड नोटिस जारी कर दिया – कुल 2002 करोड़ रुपये! इसमें ब्याज, पेनल्टी और अब तक की पूरी देनदारी जोड़ दी गई है। अलग से 75.67 करोड़ रुपये केंद्रीय उत्पाद शुल्क की भी मांग रखी गई है।

अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई अभी खत्म नहीं हुई है। अगर ये लोग तय समय में राशि जमा नहीं करते या समझौता नहीं करते तो उनकी संपत्तियां कुर्क की जाएंगी, बैंक खाते फ्रीज होंगे और गिरफ्तारी तक की नौबत आ सकती है। विभाग ने पहले ही कई लग्जरी गाड़ियां, प्लांट-मशीनरी और प्रॉपर्टी पर प्रोविजनल अटैचमेंट भी कर रखा है।

यह प्रकरण इसलिए भी अहम है क्योंकि मध्य प्रदेश में गुटखा-पान मसाला कारोबार पर कर चोरी का यह सबसे बड़ा खुलासा है। विभाग का दावा है कि इसी नेटवर्क से जुड़ी कई और फर्में अभी रडार पर हैं और आने वाले दिनों में और भी बड़े नोटिस जारी हो सकते हैं।

कर विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के बाद अब इन कारोबारियों के पास बचने का कोई रास्ता नहीं बचा है। या तो भारी भरकम रकम चुकाओ या कानूनी परिणाम भुगतो।

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