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By: Ravindra Sikarwar

मध्यप्रदेश के करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं के लिए आने वाला समय महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। पहले से ही बिजली बिलों का बोझ महसूस कर रहे उपभोक्ताओं के सामने अब नई चुनौती आ खड़ी हुई है, जहां राज्य की विद्युत वितरण कंपनियों ने वर्ष 2026-27 के लिए करीब 10.19 प्रतिशत तक की दर वृद्धि का प्रस्ताव रखा है। हालांकि, इस बार नियामक आयोग ने पारदर्शिता बरतते हुए आम जनता से सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की हैं, ताकि अंतिम फैसला लेने से पहले लोगों की आवाज सुनी जा सके।

राज्य की तीनों प्रमुख वितरण कंपनियों (पूर्व, मध्य और पश्चिम क्षेत्र) तथा मध्यप्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी ने संयुक्त रूप से मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग (एमपीईआरसी) के सामने यह याचिका दायर की है। कंपनियों का मुख्य तर्क है कि उन्हें लगभग 6,044 करोड़ रुपये का घाटा हो रहा है, जिसकी भरपाई के लिए टैरिफ में इजाफा जरूरी है। आयोग ने इस प्रस्ताव को गंभीरता से लेते हुए सार्वजनिक नोटिस जारी किया है और उपभोक्ताओं को अपनी राय देने का मौका प्रदान किया है।

जनसुनवाई का कार्यक्रम फरवरी महीने में निर्धारित किया गया है। 24 फरवरी को जबलपुर, 25 फरवरी को भोपाल और 26 फरवरी को इंदौर में इन सुनवाइयों का आयोजन होगा। इन बैठकों में कोई भी उपभोक्ता व्यक्तिगत रूप से या लिखित में अपनी बात रख सकता है। इसके अलावा, भोपाल स्थित आयोग कार्यालय में 25 जनवरी तक लिखित सुझाव या आपत्तियां जमा की जा सकती हैं। यह प्रक्रिया उपभोक्ताओं को अपनी बिजली संबंधी शिकायतें, जैसे बिलिंग में गड़बड़ी या अनावश्यक चार्ज, दर्ज करने का अवसर भी देती है।

प्रस्तावित वृद्धि पर विशेषज्ञों और उपभोक्ता प्रतिनिधियों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता और बिजली मामलों के जानकार राजेंद्र अग्रवाल का कहना है कि कंपनियों द्वारा दिखाया गया घाटा पुराना है, जिसमें से काफी हिस्सा पहले ही आयोग द्वारा अस्वीकार किया जा चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर स्थापना के बहाने अतिरिक्त 750 करोड़ रुपये की वसूली का प्लान बनाया जा रहा है, जो सीधे आम लोगों की जेब पर असर डालेगा। उनका मानना है कि घाटे के आंकड़ों में पारदर्शिता की कमी है और नए फैसलों जैसे कोयला पर जीएसटी कमी का लाभ उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंचाया जा रहा।

दूसरी ओर, कंपनियां स्मार्ट मीटर को उपभोक्ता हितैषी बताते हुए कुछ राहत की बात कर रही हैं। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के अनुसार, स्मार्ट मीटर लगवाने वाले ग्राहकों को दिन के अलग-अलग समय के आधार पर छूट मिलेगी। खासकर लो वोल्टेज (एलवी) श्रेणी में घरेलू उपभोक्ताओं (एलवी-1) और सार्वजनिक जल आपूर्ति तथा स्ट्रीट लाइट (एलवी-3) श्रेणी में सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक की खपत पर सामान्य दर से 20 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। यह छूट सरकारी सब्सिडी को छोड़कर अन्य प्रोत्साहनों के साथ लागू होगी। कंपनी का दावा है कि इससे उपभोक्ता अपनी खपत को पीक ऑवर्स से हटाकर बचत कर सकते हैं।

यह पूरा मामला राज्य में बिजली क्षेत्र की दक्षता और पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। एक तरफ बढ़ती लागत और घाटे का हवाला है, तो दूसरी तरफ उपभोक्ताओं का मानना है कि कंपनियों की लापरवाही और पुरानी गलतियों का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है। यदि प्रस्तावित बढ़ोतरी पूरी तरह लागू हुई तो आम घरों से लेकर छोटे व्यवसायों तक पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। वहीं, यदि जनसुनवाई में मजबूत आपत्तियां दर्ज हुईं तो आयोग बढ़ोतरी को कम या कुछ श्रेणियों में राहत दे सकता है।

उपभोक्ताओं से अपील है कि वे इस अवसर का उपयोग करें और अपनी राय जरूर दर्ज कराएं। आखिरकार, बिजली एक आवश्यक सेवा है और इसके दामों का सीधा असर हर परिवार की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि नियामक आयोग जनता की बात को कितना महत्व देता है और अंतिम टैरिफ ऑर्डर में कितनी संतुलन बनाया जाता है।

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