by-Ravindra Sikarwar
यह विवाद तब शुरू हुआ जब एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान विधायक ने कलेक्टर पर प्रोटोकॉल का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। विधायक का कहना है कि उन्हें कार्यक्रम में उचित सम्मान नहीं दिया गया और कलेक्टर ने जानबूझकर उनकी अनदेखी की।
वहीं, कलेक्टर ने विधायक के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने अपने कर्तव्यों का पालन किया है और किसी भी प्रकार के प्रोटोकॉल का उल्लंघन नहीं किया। उन्होंने आरोप लगाया कि विधायक ने कार्यक्रम के दौरान उनके साथ दुर्व्यवहार किया और उन्हें धमकी दी।
इस घटना के बाद, दोनों पक्ष अपने समर्थकों के साथ पुलिस स्टेशन पहुंचे। विधायक ने कलेक्टर के खिलाफ दुर्व्यवहार और मानहानि की शिकायत दर्ज कराई, जबकि कलेक्टर ने विधायक के खिलाफ सरकारी काम में बाधा डालने और धमकी देने की शिकायत दर्ज कराई।
इस मामले ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। सत्तारूढ़ दल के विधायक और जिले के प्रशासनिक प्रमुख के बीच इस तरह का टकराव एक गंभीर मुद्दा है। पार्टी आलाकमान ने इस मामले का संज्ञान लिया है और दोनों पक्षों से बात कर मामले को सुलझाने का प्रयास किया जा रहा है।
स्थानीय प्रशासन और पुलिस भी इस संवेदनशील मामले को लेकर सतर्क हैं। पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायतों को दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इस घटना ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच संबंधों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह विवाद कैसे सुलझता है और क्या दोनों पक्षों के बीच सुलह हो पाती है। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि सत्ता और प्रशासन के बीच टकराव के मामले अक्सर सामने आते रहते हैं, जिसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ता है।
