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By: Yogendra Singh

Madhya Pradesh : बिजली चोरी पर अंकुश लगाने के लिए मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने आम लोगों की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक प्रभावी प्रोत्साहन योजना लागू की है। इस योजना के तहत बिजली चोरी की सटीक जानकारी देने वालों को नकद इनाम दिया जा रहा है। कंपनी के अनुसार, हाल के महीनों में इस योजना के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं और सूचना देने वाले नागरिकों को दो लाख रुपये से अधिक की प्रोत्साहन राशि सीधे उनके बैंक खातों में जमा कराई जा चुकी है।

Madhya Pradesh बिजली चोरी की सूचना पर कितना मिलेगा इनाम

मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी बिजली चोरी से जुड़ी जानकारी देने वाले सूचनाकर्ताओं को अधिकतम 50 हजार रुपये तक का इनाम प्रदान करती है। यह राशि दो चरणों में दी जाती है। पहली किस्त के रूप में पांच प्रतिशत राशि, जिसकी अधिकतम सीमा 25 हजार रुपये तय की गई है, सूचना सही पाए जाने और अंतिम निर्धारण आदेश जारी होने के तुरंत बाद दी जाती है। शेष पांच प्रतिशत राशि भी अधिकतम 25 हजार रुपये तक होती है, जो बिजली चोरी से संबंधित पूरी राशि की वसूली हो जाने के बाद सूचनाकर्ता को दी जाती है।

Madhya Pradesh एक अप्रैल से जनवरी तक मिले 167 सटीक सुराग

कंपनी द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, एक अप्रैल से 31 जनवरी के बीच बिजली चोरी से जुड़ी कुल 167 सटीक सूचनाएं प्राप्त हुईं। इन सूचनाओं के आधार पर की गई कार्रवाई के बाद कुल 2 लाख 6 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि सूचनाकर्ताओं के बैंक खातों में जमा कराई गई। इसके अलावा, जांच और वसूली की कार्रवाई में शामिल अधिकारियों और कर्मचारियों को भी प्रोत्साहित किया गया। संबंधित कर्मचारियों को तीन हजार रुपये की राशि उनके मासिक वेतन में जोड़कर दी गई, जिससे कर्मचारियों का मनोबल बढ़े और वे चोरी रोकने में सक्रिय भूमिका निभाएं।

कर्मचारी भी बन सकते हैं सूचनाकर्ता, प्रक्रिया पूरी तरह गोपनीय

कंपनी के सीएमडी ऋषि गर्ग ने बताया कि योजना के संशोधित प्रावधानों के तहत अब कंपनी में कार्यरत नियमित, संविदा और आउटसोर्स कर्मचारी भी सूचनाकर्ता बन सकते हैं। हालांकि, कर्मचारियों को सूचना सही पाए जाने और अंतिम निर्धारण आदेश की पूरी वसूली होने पर ही एक प्रतिशत प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और गोपनीय रखी गई है। सूचनाकर्ता को कंपनी के पोर्टल पर निर्धारित प्रारूप में अपनी जानकारी दर्ज करनी होती है, जिसमें बैंक खाता विवरण के साथ पहचान के लिए आधार या पैन नंबर देना अनिवार्य है।

कंपनी के अनुसार, ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू होने से पहले भी 63 मामलों में पूर्ण वसूली के बाद सात सफल सूचनाकर्ताओं को प्रोत्साहन राशि दी जा चुकी है। अब तक कुल मिलाकर सूचनाकर्ताओं के खातों में करीब 2.18 लाख रुपये की राशि जमा कराई जा चुकी है, जिससे साफ है कि यह योजना बिजली चोरी रोकने में अहम भूमिका निभा रही है।

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