By: Ravindra Sikarwar
मध्य प्रदेश: भिंड नगर पालिका में संबल योजना और मध्यप्रदेश भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मंडल की राशि में हुए करीब 3 करोड़ 4 लाख रुपये के गबन मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। घोटाले का मास्टरमाइंड माने जा रहे सहायक ग्रेड-3 क्लर्क राजेंद्र सिंह चौहान को कोतवाली पुलिस ने 470 किलोमीटर दूर विदिशा जिले से गिरफ्तार कर लिया। आरोपी के पास से ठगी की राशि से खरीदी गई लग्जरी कार भी जब्त कर ली गई है। हालांकि इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा हो रहा है कि घोटाले का मुख्य आरोपी पूर्व सीएमओ सुरेंद्र शर्मा, जो पुलिस रिकॉर्ड में फरार है, महज 40 किलोमीटर दूर गोहद नगर पालिका में प्रभारी मुख्य नगर पालिका अधिकारी के रूप में खुलेआम ड्यूटी कर रहा है, लेकिन पुलिस उसे हाथ तक नहीं लगा पाई है।
470 किमी दूर मास्टरमाइंड पकड़ा, 40 किमी दूर मुख्य आरोपी आजाद:
पुलिस ने दावा किया है कि लंबे प्रयास के बाद राजेंद्र सिंह चौहान को विदिशा से दबोच लिया गया। पूछताछ में उसने कई चौंकाने वाले खुलासे किए। दूसरी तरफ सुरेंद्र शर्मा 9 नवंबर 2024 को दर्ज एफआईआर के बाद से फरार चल रहे हैं, लेकिन फरवरी 2025 से गोहद नगर पालिका में बतौर प्रभारी सीएमओ नियमित हाजिरी लगा रहे हैं, फाइलों पर हस्ताक्षर कर रहे हैं और मीटिंग भी ले रहे हैं। स्थानीय लोग और विपक्षी नेता सवाल उठा रहे हैं कि आखिर पुलिस और जिला प्रशासन इतनी बड़ी खामी क्यों नजरअंदाज कर रहा है? क्या इसके पीछे राजनीतिक दबाव है?
सूत्रों का कहना है कि सुरेंद्र शर्मा गोहद क्षेत्र के पूर्व भाजपा विधायक और भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष लाल सिंह आर्य के बेहद करीबी हैं। दोनों की कई तस्वीरें सोशल मीडिया पर मौजूद हैं। यही वजह मानी जा रही है कि इतने गंभीर मामले में भी उनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही।
क्लर्क ने कबूला – सवा करोड़ से ज्यादा की संपत्ति बनाई:
गिरफ्तार किए गए क्लर्क राजेंद्र सिंह चौहान ने पूछताछ में स्वीकार किया कि उसके पास घोटाले की राशि में से करीब सवा करोड़ रुपये से अधिक की रकम आई। उसने इस पैसे का बड़ा हिस्सा संपत्ति में लगा दिया।
उसके खुलासे के मुख्य बिंदु:
- 2024 में 35 लाख रुपये का मकान खरीदा
- 25 लाख रुपये का प्लॉट लिया
- 8 लाख रुपये देकर लग्जरी कार खरीदी (पुलिस ने जब्त की)
- बाकी राशि शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में निवेश की
राजेंद्र ने यह भी बताया कि घोटाले में पांच बिचौलियों (दलालों) की अहम भूमिका थी, जिनके जरिए फर्जी खातों में पैसे ट्रांसफर किए गए। पुलिस अब इन दलालों की तलाश में जुटी है।
घोटाला कैसे हुआ?
घोटाला वर्ष 2021 से 2024 के बीच हुआ। संबल योजना और कर्मकार मंडल की जो राशि मृतक श्रमिकों के परिजनों को मिलनी थी, उसे फर्जी खातों में डायवर्ट कर दिया गया। जांच में सामने आया कि:
- 157 खातों के नाम और बैंक डिटेल का कोई मिलान नहीं हुआ
- मृतकों व श्रमिकों के नाम पर 2-2 लाख रुपये फर्जी खातों में ट्रांसफर किए गए
- कुल गबन राशि 3 करोड़ 4 लाख रुपये तक पहुंची
जांच कैसे शुरू हुई?
मई 2024 में तत्कालीन कलेक्टर संजय श्रीवास्तव ने पांच सदस्यीय जांच कमेटी गठित की थी। कमेटी के सदस्य तत्कालीन डीपीसी व्योमेश शर्मा ने जब रिकॉर्ड का मिलान किया तो बड़े स्तर पर अनियमितता सामने आई। इसके बाद मौजूदा सीएमओ यशवंत वर्मा ने सिटी कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई।
9 नवंबर 2024 को पुलिस ने एफआईआर दर्ज की। इसमें निम्नलिखित लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया:
- तत्कालीन सीएमओ सुरेंद्र शर्मा
- सहायक ग्रेड-3 राजेंद्र सिंह चौहान
- एआरआई राधेश्याम राजौरिया
- रिटायर्ड एआरआई शिवनाथ सिंह सेंगर
- रिटायर्ड एआरआई अशोक जाटव
- तत्कालीन सीएमओ वीरेंद्र तिवारी
- मृतक कर्मचारी राघवेंद्र मिश्रा
इनमें से अब तक सिर्फ राजेंद्र सिंह चौहान की गिरफ्तारी हुई है। बाकी छह आरोपी अभी भी फरार हैं।
सबसे बड़ा सवाल – फरार आरोपी को प्रभारी सीएमओ कैसे बनाया?
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि सुरेंद्र शर्मा को नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने फरवरी 2025 में गोहद नगर पालिका का प्रभारी सीएमओ नियुक्त कर दिया। वह रोजाना ऑनलाइन अटेंडेंस लगा रहे हैं, सरकारी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर रहे हैं और पूरी तरह सक्रिय हैं। जबकि पुलिस का दावा है कि वह फरार हैं और उनकी तलाश जारी है।
भिंड और गोहद के नागरिकों में भारी रोष है। लोग कह रहे हैं कि छोटे कर्मचारी को 470 किमी दूर से पकड़ लिया गया, लेकिन मुख्य आरोपी को 40 किमी की दूरी पर भी नहीं छुआ जा सका। इससे प्रशासन और पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
विपक्षी दल इसे राजनीतिक संरक्षण का मामला बता रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक ऊंचे स्तर पर दखल नहीं होगा, बड़े मगरमच्छ बचते रहेंगे और सिर्फ छोटी मछलियां ही फंसती रहेंगी।
फिलहाल पुलिस राजेंद्र सिंह चौहान से लगातार पूछताछ कर रही है और अन्य फरार आरोपियों व दलालों की तलाश में छापेमारी कर रही है। लेकिन मुख्य आरोपी सुरेंद्र शर्मा की गिरफ्तारी कब होगी, यह सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है।
