By: Yogendra Singh
Madhya Pradesh : नकली शराब परिवहन परमिट और अवैध शराब सप्लाई के एक बड़े मामले में आबकारी विभाग ने सख्त कदम उठाया है। आबकारी आयुक्त अभिजीत अग्रवाल ने रायसेन जिले की चर्चित कंपनी सोम डिस्टलरीज समूह की दोनों इकाइयों के सभी प्रमुख लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिए हैं। यह कार्रवाई लंबे समय से चले आ रहे आपराधिक मामले में कानूनी अभिमत प्राप्त होने के बाद की गई है।
Madhya Pradesh क्या है पूरा मामला
यह मामला नकली परमिट, कूटरचित दस्तावेजों और अवैध शराब परिवहन से जुड़ा है। जांच और न्यायिक प्रक्रिया में सामने आया कि आरोपियों ने शराब परिवहन के लिए फर्जी परमिट और बिल्टियां तैयार कीं, जिन्हें असली बताकर उपयोग किया गया। इससे शासन को राजस्व की भारी क्षति हुई और संबंधित कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। अपर सत्र न्यायालय, देपालपुर ने इस प्रकरण में कंपनी के प्रतिनिधियों, अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं और विभागीय अधिकारियों-कर्मचारियों को दोषी ठहराते हुए कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई थी।
Madhya Pradesh हाईकोर्ट की भूमिका और कानूनी अभिमत
हालांकि उच्च न्यायालय, इंदौर ने सत्र न्यायालय द्वारा दी गई सजा पर रोक लगा दी थी, लेकिन लाइसेंस के संबंध में कोई स्थगन नहीं दिया गया था। इसी बिंदु पर स्थिति स्पष्ट करने के लिए आबकारी आयुक्त ने महाधिवक्ता कार्यालय से विधिक राय मांगी। कई पत्राचार के बाद दिसंबर 2025 में महाधिवक्ता, उच्च न्यायालय जबलपुर से स्पष्ट अभिमत प्राप्त हुआ कि दोनों इकाइयों के लाइसेंस निलंबित किए जा सकते हैं। इस राय और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर सोम डिस्टलरीज प्राइवेट लिमिटेड तथा सोम डिस्टलरीज एंड ब्रेवरीज लिमिटेड के सभी संबंधित लाइसेंस निलंबित कर दिए गए।
विभागीय अधिकारियों पर भी गिरी गाज
इस घोटाले में केवल कंपनी ही नहीं, बल्कि विभागीय स्तर पर भी गंभीर लापरवाही और संलिप्तता सामने आई। दोषी पाए गए अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है। एक आबकारी उप निरीक्षक को सेवा से बर्खास्त किया जा चुका है, जबकि सेवानिवृत्त अधिकारियों के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई प्रस्तावित है। जांच में यह भी सामने आया कि सैकड़ों की संख्या में फर्जी परमिट बुक तैयार कर शराब का अवैध परिवहन किया गया।
यह कार्रवाई प्रदेश में शराब माफिया और अवैध कारोबार के खिलाफ सरकार के सख्त रुख को दर्शाती है। प्रशासन का स्पष्ट संदेश है कि राजस्व को नुकसान पहुंचाने और कानून से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ बिना किसी दबाव के कठोर कदम उठाए जाएंगे।
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