Report by: Yogendra Singh
Madhya Pradesh : आयुष्मान भारत ‘निरामयम्’ योजना के तहत स्वास्थ्य सेवाओं में सेंध लगाने वाले अस्पतालों के खिलाफ राज्य स्वास्थ्य एजेंसी ने सख्त रुख अख्तियार किया है। हालिया जांच में व्यापक स्तर पर वित्तीय अनियमितताएं और मरीजों के डेटा के साथ छेड़छाड़ पाए जाने के बाद जबलपुर के लाइफ मेडिसिटी हॉस्पिटल और ग्वालियर के ब्रह्माणी हॉस्पिटल को तत्काल प्रभाव से योजना से निलंबित (Suspend) कर दिया गया है।
यह कार्रवाई थर्ड पार्टी ऑडिट एजेंसी (TPAA) की विस्तृत रिपोर्ट और मरीजों द्वारा की गई शिकायतों के आधार पर की गई है। प्रशासन की इस कार्रवाई से उन अस्पतालों में हड़कंप मच गया है जो सरकारी धन का दुरुपयोग कर रहे थे।
मरीजों का गलत डेटा दिखाकर वसूले करोड़ों रुपये
Madhya Pradesh जांच रिपोर्ट के अनुसार, जबलपुर स्थित लाइफ मेडिसिटी हॉस्पिटल ने आर्थिक लाभ के लालच में योजना के नियमों की धज्जियां उड़ाईं। अस्पताल प्रशासन मरीजों को गलत मेडिकल श्रेणियों में भर्ती दिखाता था ताकि भारी-भरकम क्लेम लिया जा सके।
हैरानी की बात यह है कि इस अस्पताल को पहले भी ऐसी ही गलतियों के लिए 46.99 लाख रुपये का जुर्माना भरना पड़ा था। इसके बावजूद प्रबंधन ने अपनी कार्यप्रणाली में सुधार नहीं किया। बार-बार चेतावनी मिलने के बाद भी जब धोखाधड़ी का सिलसिला नहीं थमा, तो राज्य स्वास्थ्य एजेंसी ने जनहित को सर्वोपरि रखते हुए इसे पैनल से बाहर कर दिया है।
ग्वालियर में भी इलाज के नाम पर धोखाधड़ी का खेल
Madhya Pradesh ग्वालियर के ब्रह्माणी हॉस्पिटल में भी कुछ इसी तरह की अनियमितताएं पाई गईं। ऑडिट के दौरान यह खुलासा हुआ कि अस्पताल ने सामान्य मरीजों को भी ‘गंभीर’ दिखाकर फर्जी क्लेम फाइल किए। मरीजों को अनावश्यक रूप से भर्ती दिखाना और गलत पैकेज का चयन करना इस अस्पताल की कार्यशैली बन चुका था।
पूर्व में इस अस्पताल पर भी 21.08 लाख रुपये का दंड लगाया गया था। वित्तीय गड़बड़ियों के साथ-साथ एक चौंकाने वाला तथ्य यह भी सामने आया कि इन दोनों ही अस्पतालों के पास NABH (National Accreditation Board for Hospitals) का अनिवार्य प्रमाण पत्र नहीं था। बिना एक्रेडिशन के योजना का संचालन करना नियमों का गंभीर उल्लंघन माना गया है।
पारदर्शिता के लिए सरकार का सख्त अल्टीमेटम
Madhya Pradesh राज्य स्वास्थ्य एजेंसी ने स्पष्ट कर दिया है कि आयुष्मान भारत योजना का उद्देश्य गरीबों को मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण इलाज देना है, न कि निजी अस्पतालों की तिजोरी भरना। एजेंसी अब इन अस्पतालों को योजना से स्थायी रूप से ‘डी-इम्पैनल’ (असूचीबद्ध) करने की प्रक्रिया शुरू कर रही है।
सरकार ने चेतावनी दी है कि:
- सभी सूचीबद्ध अस्पतालों के क्लेम की नियमित समीक्षा की जाएगी।
- किसी भी प्रकार की प्रक्रियागत या वित्तीय गड़बड़ी पाए जाने पर सीधे सस्पेंशन और एफआईआर की कार्रवाई होगी।
- मरीजों की शिकायतों के लिए निगरानी तंत्र को और अधिक मजबूत बनाया जाएगा।
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