BY: Yoganand Shrivastva
भोपाला : मध्य प्रदेश में राज्य सरकार का कर्ज़ लगातार बढ़ता जा रहा है। कई वित्तीय विश्लेषणों के अनुसार, राज्य का कुल कर्ज़ अब लगभग ₹4.64 लाख करोड़ के करीब पहुँच गया है। इस बढ़ोतरी के पीछे सरकारी योजनाओं और विकास परियोजनाओं पर होने वाला भारी खर्च मुख्य कारण माना जा रहा है।
वर्तमान कर्ज़ की स्थिति
हालिया रिपोर्टों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में प्रतिदिन औसतन ₹125 करोड़ का नया कर्ज़ लिया गया है। इसका परिणाम यह हुआ कि राज्य का कुल कर्ज़ तेजी से बढ़कर वर्तमान स्तर पर पहुँच गया है। इसमें लाड़ली बहना योजना जैसी सामाजिक कल्याण योजनाओं का खर्च भी शामिल है।
ब्याज भुगतान का दबाव
भारी कर्ज़ का सीधा असर राज्य के ब्याज भुगतान पर पड़ता है। विपक्षी दलों की रिपोर्टों में यह अनुमान लगाया गया है कि राज्य को इस कर्ज़ पर लगभग ₹27,000 से ₹29,000 करोड़ तक का ब्याज देना पड़ सकता है। हालांकि यह आंकड़ा सरकारी बजट या वित्त मंत्रालय की आधिकारिक रिपोर्ट में नहीं पाया गया है, इसलिए इसे एक अनुमानी ब्योरा माना जा सकता है।
विपक्षी दलों ने कर्ज को लेकर सरकार पर साधा निशाना
बढ़ते कर्ज को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार पर सीधा निशाना साधा हैा विपक्ष का कहना है कि बीजेपी शासन के दौरान कर्ज लगभग ₹4.75 लाख करोड़ पहुंच गया हैा और सरकार को इसके कारण और वित्तीय प्रबंधन पर स्पष्टीकरण देना चाहिए।
कर्ज़ बढ़ने के प्रमुख कारण
राज्य में कर्ज के बढ़ने के प्रमुख कारण माने जाते है जिसमें सामाजिक योजनाओं पर राज्य सरकार भारी खर्चा करती है, जिसमें प्रमुख रूप से लाड़ली बहना योजना है शामिल हैा अनुमान के मुताकिब १८३६ करोड़ रूपए सरकार इन योजनाओं में हर माह खर्च करती हैा वहीं दूसरी ओर इन योजनाओं के लिए कर्ज भी लेना पड़ता हैा वहीं बता दें कि गत वर्षों में कर्ज में तेजी से बढ़ोतरी देखने को मिली हैा इसके साथ ही कर्ज के बढ़ने का प्रमुख कारण यह भी है कि बुनियादी ढांचा और विकास परियोजनाओं के लिए सरकार उधार ले रही हैा वहीं सरकार का कहना है कि कर्ज वित्तीय नियमों और सीमाओं के भीतर लिया गया है और यह विकास और कल्याण योजनाओं को सुचारू रूप से चलाने के लिए आवश्यक हैा

