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Report by: Ishu Kumar

Lucknow : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के बुनियादी ढांचे और यातायात व्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए शुक्रवार का दिन ऐतिहासिक होने जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह संयुक्त रूप से शहर को 1,519 करोड़ रुपये की लागत वाली ‘ग्रीन कॉरिडोर’ परियोजना का उपहार सौंपेंगे। इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का उद्देश्य लखनऊ की सड़कों पर बढ़ते ट्रैफिक के दबाव को कम करना और पर्यावरण अनुकूल आवागमन सुनिश्चित करना है।

वंदना रावत की रिपोर्ट के अनुसार, इस कार्यक्रम के दौरान न केवल तैयार हो चुके बुनियादी ढांचे का लोकार्पण किया जाएगा, बल्कि भविष्य की योजनाओं की नींव भी रखी जाएगी।

ग्रीन कॉरिडोर के दूसरे चरण का होगा भव्य लोकार्पण

Lucknow परियोजना के क्रियान्वयन की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए, मुख्यमंत्री और रक्षा मंत्री डालीगंज से समतामूलक चौराहे तक फैले दूसरे चरण का उद्घाटन करेंगे। यह खंड गोमती तट के किनारे यातायात को सुगम बनाने में मील का पत्थर साबित होगा। इस मार्ग के चालू होने से पुराने लखनऊ और गोमती नगर के बीच की दूरी कम समय में तय की जा सकेगी, जिससे स्थानीय निवासियों को रोजाना लगने वाले जाम से बड़ी राहत मिलेगी।

तीसरे और चौथे चरण का शिलान्यास: भविष्य की तैयारी

लोकार्पण के साथ-साथ शहर के विस्तार को देखते हुए अगले चरणों की नींव भी रखी जाएगी:

  • तीसरा चरण: इसके तहत समतामूलक चौक से शहीद पथ तक के हिस्से का निर्माण शुरू होगा। यह रूट शहर के व्यस्ततम इलाकों को जोड़ने का काम करेगा।
  • चौथा चरण: यह हिस्सा शहीद पथ से सीधे किसान पथ तक जाएगा। यह जुड़ाव लखनऊ के आउटर रिंग रोड और मुख्य सड़कों के बीच एक सुगम बाईपास प्रदान करेगा, जिससे भारी वाहनों और लंबी दूरी के यात्रियों को शहर के भीतर प्रवेश करने की आवश्यकता नहीं होगी।

विकास कार्यों के साथ जनसंवाद की तैयारी

Lucknow इस महत्वपूर्ण अवसर पर केवल फीता काटने तक ही कार्यक्रम सीमित नहीं रहेगा। लोकार्पण और शिलान्यास की औपचारिकताओं के बाद, दोनों दिग्गज नेता गोमती तट पर स्थित झूलेलाल वाटिका में एक विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे।

इस सभा के माध्यम से सरकार द्वारा लखनऊ के कायाकल्प के लिए किए जा रहे अन्य प्रयासों और बुनियादी ढांचे के विकास की भावी योजनाओं पर प्रकाश डाला जाएगा। प्रशासन द्वारा इस कार्यक्रम के लिए सुरक्षा और व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए गए हैं, क्योंकि यह परियोजना लखनऊ को एक ‘स्मार्ट और सिग्नल-फ्री’ शहर बनाने की दिशा में सबसे बड़ा कदम मानी जा रही है।

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