By: Ravindra Sikarwar
मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में एक बार फिर बड़ी सफलता मिली है। जबलपुर लोकायुक्त पुलिस की टीम ने सहकारिता विभाग के एक निरीक्षक को घूस लेते हुए मौके पर धर दबोचा। यह घटना उस समय घटी जब आरोपी अधिकारी ने अपने कार्यालय से बाहर आकर रिश्वत की रकम ली और उसे जेब में रखने की कोशिश की। लोकायुक्त की टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया। इस मामले ने एक बार फिर सरकारी विभागों में व्याप्त रिश्वतखोरी की समस्या को उजागर किया है।
घटना की शुरुआत तब हुई जब सिमरिया सहकारी समिति के सहायक प्रबंधक देवी सिंह तिवारी (पिता रामप्रसाद तिवारी) ने लोकायुक्त कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई। देवी सिंह ने बताया कि उनका अक्टूबर और नवंबर महीने का वेतन अभी तक जारी नहीं हुआ था। इस संबंध में उन्होंने नरसिंहपुर स्थित उपायुक्त सहकारिता कार्यालय में संपर्क किया। वहां पदस्थ सहकारिता निरीक्षक संजय दुबे (उम्र 55 वर्ष) ने उनके वेतन को मंजूरी देने और जारी करने के एवज में तीन हजार रुपये की रिश्वत की मांग की। देवी सिंह ने इस मांग को पूरा करने से इनकार कर दिया और सीधे लोकायुक्त पुलिस के पास पहुंच गए।
शिकायत मिलते ही जबलपुर लोकायुक्त टीम ने मामले की गंभीरता को समझा और प्रारंभिक जांच शुरू की। जांच में पाया गया कि आरोपी निरीक्षक की मांग पूरी तरह सही थी। इसके बाद लोकायुक्त अधिकारियों ने एक सुनियोजित ट्रैप प्लान तैयार किया। योजना के तहत शिकायतकर्ता को विशेष रूप से चिह्नित नोटों से भरी रिश्वत की रकम दी गई। आरोपी संजय दुबे ने सावधानी बरतते हुए शिकायतकर्ता को कार्यालय के अंदर बुलाने के बजाय बाहर आने का इशारा किया। उन्होंने गुरुवार को देवी सिंह को उपायुक्त सहकारिता कार्यालय के बाहर बुलाया।
निर्धारित समय पर देवी सिंह रिश्वत की रकम लेकर कार्यालय के बाहर पहुंचे। संजय दुबे अपनी कुर्सी छोड़कर बाहर आए और जैसे ही उन्होंने तीन हजार रुपये की रकम हाथ में ली और जेब में रखने लगे, तभी छिपी हुई लोकायुक्त टीम ने उन्हें घेर लिया। टीम ने आरोपी को रंगे हाथों पकड़ लिया और रिश्वत की रकम बरामद कर ली। इस पूरे ऑपरेशन में लोकायुक्त पुलिस ने बेहद सतर्कता बरती ताकि कोई सबूत नष्ट न हो सके।
गिरफ्तारी के बाद लोकायुक्त टीम ने संजय दुबे के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। आरोपी से पूछताछ जारी है और आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। इस घटना से सहकारिता विभाग में हड़कंप मच गया है। कई कर्मचारी और अधिकारी अब अपनी कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं।
मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस की यह कार्रवाई कोई नई नहीं है। राज्य सरकार के निर्देश पर लोकायुक्त और अन्य जांच एजेंसियां लगातार सक्रिय हैं। पिछले कुछ महीनों में कई जिलों में इसी तरह के ट्रैप ऑपरेशन सफल हुए हैं, जिनमें पटवारी, इंजीनियर और अन्य अधिकारी रिश्वत लेते पकड़े गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों से सरकारी कामकाज में पारदर्शिता बढ़ेगी और आम नागरिकों को बिना अतिरिक्त बोझ के अपना काम कराने में आसानी होगी।
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि रिश्वतखोरी न केवल कानून का उल्लंघन है बल्कि यह उन मेहनतकश कर्मचारियों के अधिकारों का भी हनन करती है जो ईमानदारी से काम करते हैं। देवी सिंह जैसे शिकायतकर्ताओं की हिम्मत से ही ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों पर नकेल कसी जा सकती है। लोकायुक्त पुलिस ने इस मामले में तेजी से कार्रवाई कर आम लोगों का भरोसा जीता है। उम्मीद है कि आगे भी ऐसे अभियान जारी रहेंगे और भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी।
इस तरह की घटनाएं समाज को यह संदेश देती हैं कि कोई भी गलत काम करने वाला बच नहीं सकता। अगर कोई अधिकारी या कर्मचारी रिश्वत मांगता है तो बिना डरे शिकायत करें, क्योंकि जांच एजेंसियां अब पहले से कहीं ज्यादा सजग हैं। नरसिंहपुर की यह कार्रवाई पूरे राज्य के लिए एक उदाहरण बन सकती है।
