by-Ravindra Sikarwar
पूरे भारत की तरह, मध्यप्रदेश में भी गणेश चतुर्थी का त्योहार बड़े ही जोश और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। यह 9 से 10 दिनों का उत्सव है जिसमें भक्तजन भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करते हैं, उनका पूजन करते हैं और व्रत रखते हैं। इस दौरान, वे मोदक और लड्डू जैसे पारंपरिक व्यंजनों का भोग लगाते हैं, और दिन-रात भजन-कीर्तन व आरती का आयोजन होता है।
त्योहार का महत्व:
गणेश चतुर्थी भगवान गणेश के जन्म का उत्सव है। इन्हें बुद्धि, समृद्धि और विघ्न-निवारण का देवता माना जाता है। मान्यता है कि वे अपने भक्तों के जीवन से सभी बाधाओं को दूर करते हैं और नई शुरुआत का आशीर्वाद देते हैं। इस शुभ अवसर पर लोग अपने घरों और सार्वजनिक पंडालों में गणेश जी की मूर्तियां स्थापित करते हैं, जिनकी धूमधाम से पूजा-अर्चना की जाती है।
खजराना गणेश मंदिर की विशेष पूजा-अर्चना:
इस अवसर पर, इंदौर का प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यहाँ भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है, और मंदिर में गणेश जी की विशेष पूजा और भव्य आरती का आयोजन किया जा रहा है। यह मंदिर अपनी पवित्रता और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करने के लिए पूरे देश में जाना जाता है।
मंदिर का इतिहास: इस ऐतिहासिक मंदिर का निर्माण वर्ष 1735 में महारानी देवी अहिल्याबाई होल्कर ने करवाया था, जो होलकर वंश की एक महान शासक थीं। मंदिर की वास्तुकला और शांतिपूर्ण वातावरण इसे एक आध्यात्मिक अनुभव के लिए आदर्श स्थान बनाते हैं।
उत्सव का समापन: गणपति विसर्जन
गणेशोत्सव का समापन अनंत चतुर्दशी के दिन होता है, जब गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है। इस वर्ष, गणपति विसर्जन 6 सितंबर 2025 (शनिवार) को होगा। इस दिन, भक्तजन भगवान गणेश को एक भव्य शोभायात्रा के साथ विदा करते हैं, और उन्हें नदियों या तालाबों में विसर्जित करते हैं। यह विसर्जन इस बात का प्रतीक है कि भगवान गणेश अपने भक्तों के दुखों को अपने साथ ले गए हैं और अगले वर्ष फिर से आने का वादा करके वापस कैलाश पर्वत पर लौट रहे हैं।
