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Life Threat: कांग्रेस के एक पूर्व सांसद ने पार्टी नेता राहुल गांधी को लेकर की गई टिप्पणी के बाद अपनी जान को खतरा होने का दावा किया है। पूर्व सांसद ने हाल ही में सार्वजनिक रूप से राहुल गांधी को “डरपोक” कह दिया था, जिसके बाद उन्हें कथित तौर पर धमकियां मिलने लगीं। उनका कहना है कि सोशल मीडिया और फोन कॉल के जरिए लगातार डराने-धमकाने की कोशिश की जा रही है।

Life Threat: बयान के बाद बढ़ा विवाद

पूर्व सांसद के इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। राहुल गांधी पर की गई टिप्पणी को कांग्रेस समर्थकों ने आपत्तिजनक बताया, जबकि कुछ लोगों ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़ा। पूर्व सांसद का कहना है कि उन्होंने यह बात किसी निजी दुश्मनी के तहत नहीं, बल्कि राजनीतिक आलोचना के तौर पर कही थी।

जान को खतरे का दावा

पूर्व सांसद ने दावा किया है कि टिप्पणी के बाद उन्हें अज्ञात नंबरों से धमकी भरे कॉल आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ संदेशों में गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी गई है। इस कारण वे और उनका परिवार मानसिक तनाव में हैं। उन्होंने प्रशासन से सुरक्षा मुहैया कराने की मांग भी की है।

कानूनी और प्रशासनिक पहलू

इस मामले पर कानून विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी नागरिक को धमकी देना गंभीर अपराध है। यदि पूर्व सांसद के दावे सही हैं, तो पुलिस को तत्काल जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। प्रशासन ने भी कहा है कि शिकायत मिलने पर सुरक्षा व्यवस्था और जांच दोनों की जाएगी।

कांग्रेस की प्रतिक्रिया

कांग्रेस पार्टी की ओर से इस मामले में संतुलित प्रतिक्रिया सामने आई है। पार्टी नेताओं ने कहा कि किसी भी तरह की धमकी या हिंसा की भाषा का समर्थन नहीं किया जा सकता। साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि राजनीतिक आलोचना मर्यादा में रहकर होनी चाहिए।

राजनीतिक बयानबाजी तेज

इस घटना के बाद राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने इसे राजनीतिक असहिष्णुता का उदाहरण बताया है, जबकि कांग्रेस समर्थकों का कहना है कि विवाद को बेवजह बढ़ाया जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बयान और प्रतिक्रियाएं चुनावी माहौल में और अधिक देखने को मिल सकती हैं।

निष्कर्ष

पूर्व कांग्रेस सांसद के दावे ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि राजनीतिक असहमति के दौर में व्यक्तिगत सुरक्षा कितनी अहम हो गई है। लोकतंत्र में आलोचना और असहमति की जगह होनी चाहिए, लेकिन धमकी और डर का माहौल किसी भी तरह से स्वीकार्य नहीं है।

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