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By: Ravindra Sikarwar

पाकिस्तान की आदतों में शामिल प्रोपेगेंडा फैलाने का सिलसिला एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर बेनकाब हो गया है। रफाल लड़ाकू विमानों और कथित ऑपरेशन सिंदूर को लेकर पाकिस्तानी मीडिया द्वारा फैलाए गए झूठ पर इस बार फ्रांस ने प्रत्यक्ष प्रतिक्रिया दी है। फ्रेंच नेवी ने पाकिस्तान के दावों को न केवल गलत बताया, बल्कि स्पष्ट शब्दों में कहा कि पाकिस्तानी मीडिया ने उनके वरिष्ठ अधिकारी के नाम, पद और बयान—तीनों को तोड़-मरोड़कर पेश किया है। इससे यह सिद्ध हो गया कि पाकिस्तान किस तरह अंतरराष्ट्रीय सैन्य घटनाओं को लेकर झूठी कहानी गढ़कर भारत को बदनाम करने की कोशिश करता है, और कैसे यह कोशिश हर बार उलटी पड़ती है।

पाकिस्तानी मीडिया का झूठ—फ्रेंच अधिकारी के नाम पर फर्जी बयान
इस ताजा मामले की शुरुआत तब हुई जब पाकिस्तानी चैनल जियो न्यूज ने एक संवेदनशील आर्टिकल में दावा किया कि फ्रांस की नौसेना के एक अधिकारी ने कथित ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान की श्रेष्ठता को स्वीकार किया है। उनकी रिपोर्ट में कहा गया कि फ्रेंच कमांडर कैप्टन “जैक्विस लौने” ने यह स्वीकार किया कि भारत का रफाल लड़ाकू विमान चीन के J-10C फाइटर की उन्नत तकनीक की वजह से नहीं, बल्कि पाकिस्तान एयरफोर्स की बेहतर तैयारी के कारण गिरा। यह दावा न केवल मनगढ़ंत था, बल्कि बिना किसी प्रमाण के पाकिस्तान की “विजय कथा” को प्रचारित करने का प्रयास था।

पाकिस्तानी मीडिया ने फ्रेंच अधिकारी के नाम तक को गलत छापा। जिस अधिकारी का हवाला दिया गया, उनका नाम जैक्विस नहीं, बल्कि कैप्टन इवान लौने है। यही नहीं, उन्हें ऐसे बयान देते दिखाया गया जो उन्होंने कभी दिए ही नहीं। पाकिस्तान के लिए यह कोई नई बात नहीं है कि वह अंतरराष्ट्रीय मामलों में गलत सूचनाएँ फैलाए, लेकिन इस बार गलती इतनी बड़ी थी कि फ्रांस को सार्वजनिक रूप से स्पष्टीकरण देना पड़ा।

फ्रेंच नेवी का सख्त खंडन—पूरा लेख फेक न्यूज
फ्रांस की नौसेना ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर आधिकारिक पोस्ट शेयर करते हुए पाकिस्तानी मीडिया के दावों को पूरी तरह फर्जी बताया। उन्होंने लिखा कि जिस ‘कैप्टन जैक्विस लौने’ का जिक्र आर्टिकल में किया गया है, ऐसी कोई पहचान फ्रेंच नेवी में है ही नहीं। असली अधिकारी का नाम कैप्टन इवान लौने है और उनकी जिम्मेदारियाँ केवल फ्रेंच नेवी के ऑर्गेनिक नेवल एयर स्टेशन के संचालन तक सीमित हैं।

फ्रेंच नेवी ने साफ किया कि कैप्टन इवान ने न तो किसी विमान के गिराए जाने की पुष्टि की और न ही चीन द्वारा भारतीय रफाल के सिस्टम को जैम किए जाने पर कोई टिप्पणी की। उनसे जब ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर सवाल किया गया, तो उन्होंने केवल इतना कहा कि वे किसी भी देश के सैन्य अभियानों पर प्रत्यक्ष टिप्पणी नहीं करते। पाकिस्तान ने जिन कथित “बयानों” को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया, वे असल में मौजूद ही नहीं थे।

फ्रेंच नेवी ने आगे साफ किया कि उनके अधिकारी ने कभी चीनी J-10C विमान का जिक्र भी नहीं किया। उन्होंने सिर्फ हवाई युद्ध के दौरान पायलटों द्वारा झेला जाने वाला “इंफॉर्मेशन ओवरलोड” समझाया—एक सामान्य तकनीकी बिंदु जिसका किसी देश की एयरफोर्स पर टिप्पणी से कोई संबंध नहीं था।

सोशल मीडिया पर पाकिस्तान की किरकिरी—झूठ का हुआ पर्दाफाश
फ्रेंच नेवी के आधिकारिक खंडन के बाद सोशल मीडिया पर पाकिस्तान को जमकर घेरा गया। कई अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों, भारतीय विशेषज्ञों और आम उपयोगकर्ताओं ने टिप्पणी की कि पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बार-बार अपनी फजीहत के बावजूद झूठे प्रोपेगेंडा से सबक नहीं मिलता। लोगों ने व्यंग्य करते हुए कहा कि पाकिस्तान दुनिया को गलत सूचना देने में इतना आगे बढ़ गया है कि अब वह अपने ही झूठ के जाल में फँसने लगा है।

कुछ टिप्पणीकारों ने यह भी कहा कि पाकिस्तान, अपनी घरेलू राजनीति और आर्थिक अस्थिरता को छिपाने के लिए सैन्य झूठ का इस्तेमाल करता है, लेकिन दुनिया अब इन बातों को गंभीरता से लेना छोड़ चुकी है। फ्रांस जैसे देश द्वारा तत्काल और सख्त प्रतिक्रिया देना यह दिखाता है कि पाकिस्तानी मीडिया की बनाई गई फर्जी कहानियाँ अब वैश्विक गंभीरता के स्तर को भी प्रभावित कर रही हैं।

रफाल और ऑपरेशन सिंदूर—सच्चाई से कोसों दूर पाकिस्तान का प्रोपेगेंडा
रफाल पर पाकिस्तान की यह गलत कहानी कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी पाकिस्तान कई बार दावा करता रहा है कि उसने युद्धाभ्यास या खुफिया अभियानों में भारत के रफाल को चुनौती दी है। लेकिन फ्रांस के खंडन के बाद एक बार फिर यह साबित हो गया कि पाकिस्तान ऐसे दावे केवल अपनी ‘मनोवैज्ञानिक जीत’ दिखाने के लिए गढ़ता है। असलियत में न तो रफाल के गिराए जाने का कोई प्रमाण है, न ही किसी ऐसे कथित ऑपरेशन सिंदूर का, जैसा पाकिस्तानी मीडिया बार-बार प्रचारित करता है।

फ्रांस की नौसेना द्वारा दिए गए स्पष्ट बयान ने पाकिस्तान की विश्वसनीयता को गहरी चोट पहुंचाई है। इससे दुनिया के सामने यह उजागर हो गया कि पाकिस्तान किस तरह अंतरराष्ट्रीय सैन्य तकनीक, अभियानों और बयानों का दुरुपयोग कर अपनी ‘झूठी जीत’ की कहानियाँ फैलाता है।

अंततः, इस पूरे विवाद ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया कि पाकिस्तानी मीडिया द्वारा गढ़े गए फेक न्यूज और गलत बयानों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। फ्रांस के सख्त और स्पष्ट खंडन के बाद पूरा मामला पाकिस्तान के लिए शर्मनाक बन गया है, और यह घटना भविष्य में उसके किसी भी दावे की विश्वसनीयता पर बड़ा प्रश्नचिह्न छोड़ देती है।

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