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by-Ravindra Sikarwar

मध्य प्रदेश में बच्चों की दर्दनाक मौतों के बाद राज्य के औषधि नियंत्रण अधिकारियों ने कम से कम तीन लोकप्रिय कफ सिरपों की गहन जांच की, जिसमें डाइएथिलीन ग्लाइकॉल (डीईजी) नामक एक जानलेवा रसायन की मात्रा निर्धारित सीमा से कहीं अधिक पाई गई। यह विषैला तत्व मानव शरीर के लिए बेहद खतरनाक है, जो गुर्दों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है और तीव्र गुर्दा विफलता का कारण बन सकता है। इन जांचों ने न केवल इन सिरपों की गुणवत्ता पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि देशव्यापी नियामक तंत्र और निरीक्षण प्रक्रियाओं में गंभीर कमियों को भी उजागर किया है।

प्रभावित सिरपों का विवरण और जांच परिणाम:
जांच रिपोर्टों के अनुसार, ये तीनों सिरप बच्चों में सर्दी-खांसी के इलाज के लिए व्यापक रूप से उपयोग किए जाते थे, लेकिन इनमें डीईजी की अत्यधिक मात्रा ने इन्हें घातक बना दिया। यहां प्रत्येक सिरप के बारे में विस्तृत जानकारी दी जा रही है:

  • रेस्पिफ्रेश सिरप: गुजरात स्थित रेडनेक्स फार्मास्युटिकल कंपनी द्वारा उत्पादित इस सिरप में डीईजी की मात्रा 1.3 प्रतिशत तक पाई गई। औषधीय उत्पादों में इस रसायन की अधिकतम स्वीकार्य सीमा मात्र 0.1 प्रतिशत है, जो इस मामले में कई गुना अधिक है।
  • रीलाइफ सिरप: इसी राज्य की शेप फार्मा कंपनी का यह उत्पाद 0.6 प्रतिशत डीईजी से दूषित पाया गया, जो निर्धारित मानकों का स्पष्ट उल्लंघन दर्शाता है।
  • कोल्ड्रिफ सिरप: तमिलनाडु की स्रेसन फार्मा द्वारा बनाए गए इस सिरप में डीईजी का स्तर सबसे चिंताजनक रहा—48.6 प्रतिशत तक। यह मात्रा इतनी अधिक है कि इसका सेवन घातक साबित हो सकता है।

इन सिरपों के सेवन से मध्य प्रदेश में अब तक 14 बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि अन्य नौ बच्चे अभी भी गंभीर किडनी फेलियर की स्थिति में अस्पतालों में भर्ती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ये मौतें केवल दुर्भाग्यपूर्ण नहीं हैं, बल्कि नियामक लापरवाही का परिणाम हैं।

डीईजी क्या है और यह सिरपों में कैसे पहुंचता है?
डीईजी एक रासायनिक यौगिक है जो मुख्य रूप से औद्योगिक उपयोगों के लिए जाना जाता है, जैसे एंटीफ्रीज (जमने से बचाने वाला तरल), तापीय ऊष्मा हस्तांतरण तरल पदार्थ और इमल्शन बनाने वाला एजेंट। दवा उद्योग में यह पॉलीएथिलीन ग्लाइकॉल नामक एक अनुमत विलायक के माध्यम से सिरपों में प्रवेश कर जाता है। बाजार में इस कच्चे माल के दो प्रकार उपलब्ध हैं: औद्योगिक ग्रेड, जिसमें डीईजी की मात्रा अधिक हो सकती है, और फार्मास्युटिकल ग्रेड, जिसमें इसकी मात्रा सख्ती से 0.1 प्रतिशत से नीचे रखनी होती है। दुर्भाग्य से, कई कंपनियां सस्ते औद्योगिक ग्रेड का उपयोग कर रही हैं, जो गुणवत्ता मानकों का उल्लंघन है।

डीईजी विषाक्तता के लक्षण और स्वास्थ्य जोखिम:
यह रसायन शरीर में अवशोषित होते ही गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा करता है, खासकर बच्चों में, जिनका शरीर अधिक संवेदनशील होता है। प्रमुख लक्षणों में शामिल हैं:

  • पेट में तेज दर्द,
  • बार-बार उल्टी और दस्त,
  • पेशाब करने में असमर्थता,
  • सिरदर्द और भ्रम की स्थिति,
  • मानसिक अवस्था में असामान्य बदलाव।

सबसे घातक प्रभाव गुर्दों पर पड़ता है, जहां यह तीव्र गुर्दा क्षति का कारण बनता है। बच्चों में यह स्थिति घंटों या दिनों में जानलेवा साबित हो सकती है, जैसा कि हाल की घटनाओं में देखा गया।

अधिकारियों द्वारा उठाए गए कदम:
मध्य प्रदेश की घटना के बाद राज्य के दवा नियंत्रण विभाग ने तत्काल इन सिरपों के नमूनों की जांच शुरू की, जिसके परिणामस्वरूप इन्हें बाजार से तुरंत वापस बुलाने का आदेश जारी किया गया। केंद्र सरकार ने भी हस्तक्षेप किया है। 2022 में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा विदेशों में भारतीय सिरपों से जुड़ी मौतों के बाद एक वैश्विक अलर्ट जारी करने के बाद, भारत सरकार ने निर्यात के लिए सभी सिरप बैचों की केंद्रीय या राज्य प्रयोगशालाओं में जांच अनिवार्य कर दी। हालांकि, एक प्रमुख विशेषज्ञ ने सवाल उठाया: “निर्यात के लिए सिरपों की जांच क्यों अनिवार्य है, जबकि घरेलू बाजार के उत्पादों के लिए अलग नियम क्यों? क्या हमारे बच्चों की जान निर्यात से कम महत्वपूर्ण है?” इस बयान ने नियामक असमानता पर बहस छेड़ दी है।

पिछली घटनाओं का इतिहास: एक दोहराती त्रासदी
यह समस्या नई नहीं है; भारत में दूषित सिरपों से बच्चों की मौतें दशकों से जारी हैं, जो नियामक विफलताओं को दर्शाती हैं:

  • 2022: डब्ल्यूएचओ ने अलर्ट जारी किया जब गाम्बिया में 70 और उज्बेकिस्तान में 18 बच्चों की मौत हरियाणा व उत्तर प्रदेश की कंपनियों के सिरपों से जुड़ी पाई गई।
  • 2020: जम्मू-कश्मीर के रामनगर में 17 बच्चों की मौत एक हिमाचल प्रदेश आधारित कंपनी के सिरप से हुई, जिसमें 34.97 प्रतिशत डीईजी पाया गया।
  • 1998: गुड़गांव (अब गुरुग्राम) में 33 बच्चों की मौत एक स्थानीय कंपनी के सिरप से हुई, जिसमें 17.5 प्रतिशत डीईजी था। दिल्ली के कलावती सरन चिल्ड्रन हॉस्पिटल में 150 से अधिक बच्चे गुर्दा विफलता से पीड़ित पहुंचे थे, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया।

ये घटनाएं दर्शाती हैं कि समस्या की जड़ें गहरी हैं, और बिना सख्त निरीक्षण के यह चक्र जारी रहेगा।

उपभोक्ताओं के लिए सलाह:
हालांकि आधिकारिक सलाह में विस्तार नहीं है, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञ अनुशंसा करते हैं:

  • बच्चों को कोई भी कफ सिरप देने से पहले डॉक्टर की सलाह लें; स्व-दवा से बचें।
  • बाजार से कोई भी सिरप खरीदते समय लेबल चेक करें—निर्माता, बैच नंबर और समाप्ति तिथि की जांच करें।
  • यदि आपके पास ऊपर उल्लिखित सिरप हैं, तो इन्हें तुरंत नष्ट कर दें और स्थानीय स्वास्थ्य विभाग को सूचित करें।
  • लक्षण दिखने पर (जैसे उल्टी या पेशाब की समस्या) फौरन चिकित्सा सहायता लें।
  • हमेशा प्रमाणित फार्मेसियों से ही दवाएं खरीदें और संदिग्ध उत्पादों की रिपोर्ट करें।

यह घटना एक चेतावनी है कि सस्ते उत्पादों की होड़ में गुणवत्ता पर समझौता घातक हो सकता है। सरकार को अब घरेलू बाजार के लिए भी कड़े परीक्षण नियम लागू करने की आवश्यकता है।

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