Spread the love

by-Ravindra Sikarwar

भोपाल की पिपलानी पुलिस ने नकली भारतीय मुद्रा छापने के एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश किया है। गिरफ्तार आरोपी ने पूछताछ में चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उसने बताया कि उच्च गुणवत्ता वाले जाली नोट बनाने की बारीक तकनीक उसने जर्मनी की प्रिंटिंग विशेषज्ञों की किताबों से सीखी थी। इतना ही नहीं, वह दावा करता है कि अगर उसे दो महीने और मिल जाते, तो उसके बनाए 500 रुपये के नोट इतने परफेक्ट होते कि ATM मशीन और नोट काउंटिंग मशीन भी उन्हें असली समझ लेतीं।

आरोपी की पहचान और पृष्ठभूमि:
गिरफ्तार आरोपी विवेक यादव (21 वर्ष), पिता मनोज यादव, मूल रूप से उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के ग्राम जमुआ धरमेर का निवासी है। केवल दसवीं तक पढ़ा यह युवक नौकरी की तलाश में मुंबई गया था, लेकिन योग्यता कम होने के कारण कोई नौकरी नहीं मिली। वापस भोपाल लौटकर वह मंडीदीप के एक कारखाने में मामूली नौकरी करने लगा। प्लास्टिक और पेपर की तकनीकी जानकारी पहले से थी, लेकिन जब पैसों की जरूरत ज्यादा बढ़ी तो उसने जाली मुद्रा बनाने का रास्ता चुना।

जर्मन किताबों ने सिखाई बारीकियां:
विवेक ने पुलिस को बताया कि उसने जर्मनी के प्रसिद्ध प्रिंटिंग विशेषज्ञों की किताबें मंगवाईं। इनमें ‘Roll of the Rules’, ‘Manual of Screen Printing’, ‘Alexa Printing’ जैसी किताबें शामिल थीं। इन किताबों के अलावा गूगल और अन्य ऑनलाइन स्रोतों से भी तकनीकी जानकारी जुटाई। उसने विशेष प्रकार के कागज, स्याही, कोटिंग केमिकल और प्रिंटिंग उपकरण विदेशी वेबसाइटों से ऑनलाइन ऑर्डर किए।

उसका कहना था कि 100 रुपये और 500 रुपये का जाली नोट बनाने में समय, मेहनत और लागत लगभग बराबर आती है, इसलिए उसने सिर्फ 500 रुपये के नोट छापने पर फोकस किया।

घर में चल रहा था मिनी प्रिंटिंग प्रेस:
पिपलानी के कोरल लाइफ फेस-2, मुलरी नगर, करौंद में किराए के मकान से पुलिस ने भारी मात्रा में सामान बरामद किया। आरोपी के पास इतना मटेरियल था कि वह 40 लाख रुपये तक के 500 रुपये के जाली नोट आसानी से छाप सकता था। बरामद सामान में शामिल हैं:

  • उच्च गुणवत्ता वाला प्रिंटर 
  • कंप्यूटर और लैपटॉप 
  • विशेष कागज की रीम 
  • UV कोटिंग केमिकल और स्याही 
  • कटर मशीन, स्टैंसिल और अन्य उपकरण 

गिरफ्तारी और बरामदगी:
शुक्रवार-शनिवार की रात पुलिस ने विवेक को दबोचा। उसके कब्जे से 500 रुपये के 451 जाली नोट (कुल 2,25,500 रुपये) बरामद हुए। उसकी पेंट की जेब से भी 23 जाली नोट मिले। मोबाइल फोन की जांच से जाली नोट बनाने के सभी ऑर्डर, चैट और वीडियो सबूत मिले।

साप्ताहिक हाट-बाजार में खपाता था नकली नोट:
विवेक हर रविवार को आसपास के साप्ताहिक हाट-बाजारों में जाता और छोटे-छोटे सामान खरीदकर जाली नोट खपाता था। दुकानदारों को शक न हो, इसलिए वह हमेशा 500-1000 रुपये तक की ही खरीदारी करता था।

पुलिस ने आरोपी को अदालत में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। मामले की गहन जांच जारी है और यह पता लगाया जा रहा है कि उसने अब तक कितने जाली नोट बाजार में खपा दिए और क्या उसका कोई साथी भी था।

पिपलानी थाना प्रभारी ने बताया कि यह अपने आप में अनोखा मामला है, जिसमें आरोपी ने विदेशी किताबों और ऑनलाइन संसाधनों की मदद से इतनी उन्नत तकनीक सीख ली थी कि आम आंख से नोटों में अंतर पता लगाना मुश्किल था।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

× Whatsapp