by-Ravindra Sikarwar
एनआईए और अन्य केंद्रीय जांच एजेंसियों ने जैसे ही आतंकवादी नेटवर्क पर शिकंजा कसना शुरू किया, वैसे ही पूरे देश में फैले खतरनाक तार सामने आने लगे। दिल्ली के लालकिले के पास कार बम विस्फोट करने वाले मुख्य आरोपी उमर के करीबी साथी आमिर राशिद को जम्मू-कश्मीर से गिरफ्तार कर लिया गया है। वहीं मध्य प्रदेश के महू में जवाद सिद्दीकी के खिलाफ भी जांच का दायरा तेजी से बढ़ाया जा रहा है।
ये गिरफ्तारियां और खुलासे इस बात की गवाही दे रहे हैं कि देश में बड़े पैमाने पर सुनियोजित आतंकवादी हमलों की साजिश रची गई थी। जम्मू-कश्मीर में लंबे समय से आतंक का माहौल बनाने के बाद अब ये लोग मुख्य भूमि भारत के विभिन्न हिस्सों में अपने पांव पसार चुके हैं। फरीदाबाद में हुई गिरफ्तारियां और दिल्ली में हुआ कार बम धमाका इसी बड़ी साजिश की कड़ियां हैं।
दरअसल, दिल्ली बम कांड से कुछ समय पहले ही फरीदाबाद में जैश-ए-मोहम्मद के एक बड़े मॉड्यूल का भंडाफोड़ हुआ था। वहां से कई आतंकियों को पकड़ा गया और भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री बरामद की गई। इन विस्फोटकों को और गहन फोरेंसिक जांच के लिए जम्मू-कश्मीर के नौगाम थाने में ले जाया गया।
लेकिन त्रासदी यह हुई कि थाना परिसर में ही इन जब्त विस्फोटकों की जांच के दौरान अचानक भयानक धमाका हो गया। इस हादसे में 9 लोगों की जान चली गई और 32 गंभीर रूप से घायल हो गए। धमाके की तीव्रता इतनी थी कि थाना भवन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और आसपास के मकान भी ढह गए।
शुरुआत में तो इसे आतंकी हमला समझा गया, लेकिन जम्मू-कश्मीर पुलिस और केंद्रीय गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यह कोई सुनियोजित अटैक नहीं था। बल्कि जब्त सामग्री से फोरेंसिक सैंपल निकालने और अन्य प्रक्रिया चल रही थी, तभी गलती से विस्फोट हो गया।
अगर यह सचमुच महज एक हादसा था, तो यह राहत की बात है। लेकिन इससे भी बड़ा सवाल यह है कि इतनी भयानक मात्रा में विस्फोटक और खतरनाक केमिकल आतंकियों ने जमा कर रखे थे। अगर ये सामग्री दिल्ली या किसी अन्य शहर में प्लान के मुताबिक इस्तेमाल हो जाती, तो कितना भयावह नुकसान होता — इसका अंदाजा नौगाम थाने के हादसे से ही लगाया जा सकता है।
इस पूरे मामले में गहन जांच जरूरी है।
- विस्फोटक इतनी दूर नौगाम तक ले जाए गए, उस प्रक्रिया में क्या कोई चूक हुई?
- सैंपल निकालने वाले कर्मी क्या वाकई इतने संवेदनशील और अस्थिर विस्फोटकों को हैंडल करने के लिए पूरी तरह ट्रेंड थे?
- परिवहन और जांच की पूरी चेन में कहां लापरवाही हुई?
क्योंकि आतंकवादी संगठनों की ये साजिशें पहले से ही देश के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। अब जब इनके मकड़जाल की परतें खुल रही हैं, तो हर कदम पर चौकसी और विशेषज्ञता के साथ आगे बढ़ना होगा — वरना एक छोटी सी चूक भी भारी कीमत वसूल सकती है।
दिल्ली का कार बम, फरीदाबाद का भंडाफोड़, नौगाम का हादसा — ये सब एक ही बड़ी साजिश की अलग-अलग कड़ियां हैं। और ये कड़ियां अब पूरे देश में फैलती दिख रही हैं।
