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by-Ravindra Sikarwar

भोपाल: मध्य प्रदेश के रीवा और सीधी जिलों में पुलिस की सतर्कता ने नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार पर करारा प्रहार किया है। हाल ही में आयोजित कलेक्टर-कमिश्नर सम्मेलन में मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर पुलिस महानिदेशक कैलाश माकवाना द्वारा शुरू किए गए राज्यव्यापी नशा-मुक्ति अभियान के तहत दो जिलों में संयुक्त छापेमारी की गई। इस कार्रवाई में कुल 4,054 बोतलों में पैक नशीली खांसी की सीरप और अन्य वर्जित वस्तुओं की कीमत करीब 18.40 लाख रुपये बताई जा रही है। पुलिस ने सात संदिग्धों को हिरासत में ले लिया है, जो इस अवैध व्यापार के मुख्य सूत्रधार माने जा रहे हैं। यह घटना नौजवानों में बढ़ते नशे के खतरे को रोकने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

पुलिस के अनुसार, रीवा जिले में गुप्त सूचना के आधार पर दो तस्करों—राहुल सिंह और उत्कर्ष द्विवेदी—को पकड़ा गया, जो सीधी जिले के निवासी हैं। इनके कब्जे से 2,874 बोतलें ‘ओनरेक्स’ ब्रांड की नशीली खांसी की सीरप बरामद हुईं, जिनकी अनुमानित कीमत 5.75 लाख रुपये है। इसके अलावा, एक मोटरसाइकिल (कीमत 1.10 लाख रुपये) और एक मोबाइल फोन (15,000 रुपये) भी जब्त किया गया। ये सामग्री अवैध रूप से बेची जा रही थी, जो नशीले पदार्थों एवं मनोविकारक द्रव्यों (एनडीपीएस) अधिनियम के तहत प्रतिबंधित है।

दूसरी ओर, सीधी जिले में तीन अलग-अलग अभियानों में पुलिस ने 1,180 बोतलें ‘ओनरेक्स’ सीरप (कीमत 2.37 लाख रुपये), एक वाहन (10 लाख रुपये), एक मोबाइल फोन (15,000 रुपये), एक एसयूवी, 12.52 लाख रुपये नकद और एक आरोपी को गिरफ्तार किया। कुल मिलाकर, इन छापों से न केवल नशीली दवाओं की बड़ी मात्रा पकड़ी गई, बल्कि तस्करी के नेटवर्क को भी झकझोर दिया गया। आरोपी मुख्य रूप से स्थानीय स्तर पर सक्रिय थे और ये सीरप युवाओं को नशे का शिकार बनाने के लिए सस्ते दामों पर बेच रहे थे।

मुख्य आरोपी राहुल सिंह और उत्कर्ष द्विवेदी पर पहले से ही नशीले पदार्थों की तस्करी के मामले दर्ज हैं। पूछताछ में उन्होंने खुलासा किया कि यह सीरप उत्तर प्रदेश से मध्य प्रदेश लाकर वितरित किया जा रहा था। पुलिस ने इनके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/27 के तहत मामला दर्ज कर लिया है, और आगे की जांच चल रही है।

मध्य प्रदेश सरकार द्वारा शुरू किया गया यह अभियान हाल के वर्षों में बढ़ते नशीले पदार्थों के सेवन को ध्यान में रखते हुए चलाया जा रहा है। खासकर खांसी की सीरप में मौजूद कोडीन जैसे तत्वों का दुरुपयोग युवाओं के बीच व्यसन का प्रमुख कारण बन गया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर पुलिस ने राज्य के सभी जिलों में विशेष टीमें गठित की हैं, जो गुप्त सूचनाओं पर तुरंत कार्रवाई करती हैं। इस अभियान से पहले भी कई जिलों में समान छापेमारी हुई हैं, लेकिन रीवा और सीधी की यह कार्रवाई सबसे बड़ी उपलब्धियों में शुमार है।

इस जब्ती ने स्थानीय समुदाय में राहत की सांस ली है, जहां नशीले सीरप के सेवन से जुड़ी कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं सामने आ रही थीं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी कार्रवाइयां न केवल आपूर्ति श्रृंखला को तोड़ती हैं, बल्कि युवाओं को नशे के प्रति जागरूक भी करती हैं। पुलिस ने चेतावनी दी है कि अवैध दवा विक्रेताओं पर सख्त निगरानी रखी जाएगी, और भविष्य में और अधिक अभियान चलाए जाएंगे। साथ ही, स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाएगा।

यह घटना राज्य सरकार की नशा-नियंत्रण नीति की सफलता का प्रतीक है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक नियंत्रण के लिए अंतर-राज्यीय सहयोग और सख्त कानूनी प्रवर्तन जरूरी है। पीड़ित परिवारों और समाज के लिए यह एक सकारात्मक संदेश है कि कानून का हाथ लंबा है।

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