by-Ravindra Sikarwar
कोलकाता: उत्तर बंगाल के पहाड़ी इलाकों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने भयानक रूप धारण कर लिया है। दार्जीलिंग और कालिमपोंग जिलों में भारी वर्षा के कारण कई जगहों पर भूस्खलन होने से कम से कम 14 लोगों की जान चली गई है, जबकि एक व्यक्ति लापता बताया जा रहा है। यह आपदा सिक्किम को बंगाल से पूरी तरह काटने का कारण बनी है, क्योंकि प्रमुख मार्गों पर भूस्खलन और पुलों के ढहने से यातायात ठप हो गया है। भारत मौसम विभाग (आईएमडी) ने सोमवार तक लाल सिग्नल जारी किया है, जिसमें और अधिक भूस्खलन और बाढ़ की चेतावनी दी गई है। दार्जीलिंग के पर्यटन स्थलों को बंद कर दिया गया है और हजारों पर्यटक फंस गए हैं।
आपदा का पूरा विवरण:
यह विपत्ति शनिवार रात से शुरू हुई, जब उत्तर बंगाल के उपहिमालयी क्षेत्रों में अचानक तेज बारिश हुई। दार्जीलिंग जिले में 24 घंटों में 261 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई, जो ‘अत्यधिक भारी’ की श्रेणी में आती है। इसी तरह, जालपाईगुड़ी में 172 मिलीमीटर और कूच बिहार में 192 मिलीमीटर बारिश हुई। भारी पानी ने मिट्टी को संतृप्त कर दिया, जिससे पहाड़ी ढलानों पर भूस्खलन शुरू हो गए।
दार्जीलिंग के मिरिक और सुकिया पोखरी क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। मिरिक में एक भूस्खलन ने कई घरों को मलबे में दबा दिया, जिसमें महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। सरसाली और जसबीरगांव में दो-दो लोगों की मौत हुई, जबकि धार गांव, मेची में चार शव बरामद किए गए। मिरिक झील क्षेत्र में एक व्यक्ति की जान गई, और दो लोग लापता हैं। धार गांव में 40 से अधिक लोगों को मलबे से बचाया गया है। कालिमपोंग में भी दो मौतें दर्ज की गईं। कुल मिलाकर, मृतकों की संख्या 14 हो चुकी है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि यह आंकड़ा बढ़ सकता है क्योंकि ऊपरी पहाड़ी इलाकों तक पहुंचना मुश्किल है।
इसके अलावा, बालासोन नदी पर स्थित दुधिया आयरन ब्रिज ढह गया, जो मिरिक और कुरसेोंग को जोड़ता था। यह ब्रिज सिलिगुड़ी और दार्जीलिंग के बीच महत्वपूर्ण कड़ी था। हुसैन खोला में नेशनल हाईवे 110 पर भूस्खलन से सिलिगुड़ी-दार्जीलिंग मार्ग अवरुद्ध हो गया। नेशनल हाईवे 717E (सिलिगुड़ी-सिक्किम वैकल्पिक मार्ग) पर पेदोंग और रिशीखोला के बीच भूस्खलन से यातायात पूरी तरह रुक गया। रोहिणी रोड और पनका हाबरी रोड भी क्षतिग्रस्त हैं। दार्जीलिंग हिमालयन रेलवे (टॉय ट्रेन) की सेवाएं अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई हैं।
जलपाईगुड़ी, अलीपुरदुआर और कूच बिहार में भारी बारिश से जलभराव हो गया है। भूटान से अतिरिक्त पानी छोड़े जाने के कारण नदियों का जलस्तर बढ़ गया है, जिससे फ्लैश फ्लड का खतरा है। सिक्किम के चित्रे में एनएच-10 अवरुद्ध हो गया, जिससे राज्य बंगाल से कटा हुआ है। नेपाल के कोशी प्रांत में भी इसी तरह की बारिश से 14 लोगों की मौत हो चुकी है।
बचाव और राहत कार्य:
पश्चिम बंगाल सरकार ने तत्काल राहत उपाय शुरू किए हैं। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) की तीन टीमें दार्जीलिंग भेजी गई हैं, जिनमें मिरिक क्षेत्र में एक टीम विशेष रूप से सक्रिय है। स्थानीय पुलिस और अग्निशमन सेवाएं मलबा हटाने और फंसे लोगों को निकालने में जुटी हैं। दार्जीलिंग पुलिस ने पर्यटकों के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किया है: +91 91478 89078। मिरिक के फंसे पर्यटकों को तिनधरिया मार्ग से निकालने का प्रयास चल रहा है, जो तीन-चार घंटों में पूरा होने की उम्मीद है।
उत्तर बंगाल विकास मंत्री उदयन गुहा ने स्थिति को ‘चिंताजनक’ बताया और लोगों से सावधानी बरतने की अपील की। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को उत्तरी बंगाल का दौरा करने का ऐलान किया है, जहां वे मुख्य सचिव के साथ स्थिति का जायजा लेंगी और प्रभावितों को राहत वितरित करेंगी। उन्होंने पर्यटकों से जहां हैं वहीं रहने और पुलिस के निर्देशों का पालन करने को कहा। बनर्जी ने एक्स पर लिखा, “मैं बेहद चिंतित हूं कि उत्तर और दक्षिण बंगाल के कई इलाके अचानक भारी बारिश और नदियों के अतिरिक्त पानी से जलमग्न हो गए हैं।”
ट्रेन सेवाओं पर भी असर पड़ा है। कई ट्रेनों को रद्द या डायवर्ट किया गया है। आईएमडी ने दार्जीलिंग, जालपाईगुड़ी, कालिमपोंग और कूच बिहार के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जबकि अलीपुरदुआर के लिए रेड अलर्ट है। उत्तर दिनाजपुर, दक्षिण दिनाजपुर और मालदा के लिए येलो अलर्ट है। विभाग ने लोगों से पेड़ों या बिजली के खंभों के नीचे न छिपने और जल स्रोतों से दूर रहने की सलाह दी है।
नेताओं और विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर शोक व्यक्त किया: “दार्जीलिंग में भारी बारिश और भूस्खलन से हुई जान गंवाने वाली घटना से गहरा दुख हुआ है। पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना। घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना। हम प्रभावितों को हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।” राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी शोक संदेश जारी किया: “दार्जीलिंग में भारी वर्षा और भूस्खलन से हुई मौतें दुखद हैं। शोकाकुल परिवारों के प्रति हार्दिक संवेदना।”
विपक्षी भाजपा ने मुख्यमंत्री पर निशाना साधा। नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि दुर्गा पूजा कार्निवल में भाग लेने के बजाय ममता बनर्जी को प्रभावित जिलों का दौरा करना चाहिए। दार्जीलिंग सांसद राजू बिस्वास ने व्यापक क्षति पर चिंता जताई। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र से प्रभावित राज्यों को राहत सहायता देने की मांग की।
विशेषज्ञों के अनुसार, भूस्खलन का मुख्य कारण अचानक 300 मिलीमीटर बारिश है, जो मिट्टी को भारी और फिसलन भरा बना देती है। जंगल कटाई और अनियोजित निर्माण ने स्थिति को और बदतर बनाया है।
प्रभाव और आगे की चुनौतियां:
यह आपदा न केवल जान-माल की हानि का कारण बनी है, बल्कि अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित कर रही है। दार्जीलिंग के टाइगर हिल, रॉक गार्डन जैसे पर्यटन स्थल बंद हैं, जिससे स्थानीय व्यापारियों को नुकसान हो रहा है। सड़कें अवरुद्ध होने से आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बाधित है। आईएमडी ने चेतावनी दी है कि मिट्टी संतृप्त होने से सोमवार तक और भूस्खलन हो सकते हैं।
सरकार ने राहत पैकेज की घोषणा की है, जिसमें प्रभावित परिवारों को 2 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी। एनडीआरएफ और राज्य आपदा प्रबंधन टीमों को और मजबूत किया जा रहा है। यात्रियों से गैर-जरूरी यात्राओं से बचने की अपील की गई है।
यह घटना जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ते मौसमी आपदाओं को उजागर करती है। उत्तर बंगाल जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में पूर्व चेतावनी प्रणाली और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की आवश्यकता है। अधिक जानकारी के लिए स्थानीय प्रशासन या हेल्पलाइन से संपर्क करें।
