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by-Ravindra Sikarwar

गणेश चतुर्थी का दस दिवसीय उत्सव इस वर्ष गणेश विसर्जन के साथ समाप्त हो गया। इस दौरान, देश भर में लाखों भक्तों ने उत्साह और भक्ति के साथ गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन किया। यह पर्व गणेश जी की विदाई और उनके कैलाश पर्वत पर लौटने का प्रतीक है।

देश भर में विसर्जन का माहौल:
गणेश विसर्जन, जिसे ‘गणेशोत्सव’ के अंतिम दिन ‘अनंत चतुर्दशी’ पर मनाया जाता है, देश के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग तरीकों से किया गया।

  • मुंबई और महाराष्ट्र: महाराष्ट्र में, खासकर मुंबई में, गणेश विसर्जन एक भव्य आयोजन होता है। यहाँ लालबागचा राजा जैसी विशाल प्रतिमाओं का विसर्जन देखने के लिए लाखों लोग सड़कों पर उतरते हैं। इस साल, मुंबई में उच्च ज्वार (high tide) के कारण कुछ प्रतिमाओं के विसर्जन में देरी हुई, लेकिन भक्तों का उत्साह कम नहीं हुआ। सुरक्षा के लिए पुलिस, लाइफगार्ड और एनडीआरएफ की टीमें तैनात थीं।
  • अन्य राज्य: गोवा, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे राज्यों में भी भक्तों ने नदियों, समुद्रों और कृत्रिम तालाबों में गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन किया।

पर्यावरण संरक्षण और जागरूकता:
इस साल, कई शहरों में पर्यावरण-अनुकूल विसर्जन पर जोर दिया गया।

  • मिट्टी की प्रतिमाएँ: भक्तों को प्लास्टर ऑफ पेरिस (PoP) के बजाय मिट्टी से बनी प्रतिमाओं का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। मिट्टी की प्रतिमाएँ पानी में आसानी से घुल जाती हैं और प्रदूषण कम करती हैं।
  • कृत्रिम तालाब: कई नगर पालिकाओं ने नदियों और समुद्रों को प्रदूषित होने से बचाने के लिए विशेष रूप से कृत्रिम तालाबों का निर्माण किया, जहाँ भक्तों ने अपनी प्रतिमाओं का विसर्जन किया।
  • जागरूकता अभियान: विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों (NGO) और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी लोगों को पर्यावरण-हितैषी विसर्जन के महत्व के बारे में शिक्षित करने के लिए अभियान चलाए।

गणेश विसर्जन सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह भक्ति, सामुदायिक एकता और पर्यावरण संरक्षण का भी प्रतीक बन गया है। इस साल भी, भक्तों ने ‘गणपति बाप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ’ के जयघोष के साथ अपने प्रिय भगवान को विदाई दी।

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