By: Ishu Kumar
Kolkata : पश्चिम बंगाल की राजनीति में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस के बीच के कड़वे रिश्ते अब एक नए मोड़ पर पहुँच गए हैं। हाल ही में एक सार्वजनिक मंच से मुख्यमंत्री द्वारा पूर्व राज्यपालों को ‘हटाने के लिए मजबूर करने’ संबंधी दिए गए बयान ने राज्य के सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। मुख्यमंत्री के इस तंज पर वर्तमान राज्यपाल आनंद बोस ने न केवल अपनी प्रतिक्रिया दी है, बल्कि तमिलनाडु के राज्यपाल आर.एन. रवि का उदाहरण देते हुए एक नया जुबानी हमला भी बोल दिया है। संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों के बीच यह तकरार अब मर्यादाओं की सीमाओं को लांघती नजर आ रही है।
‘हटाने के लिए मजबूर किया’: ममता बनर्जी का तीखा हमला
Kolkata मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक कार्यक्रम के दौरान बिना नाम लिए पूर्व राज्यपालों पर निशाना साधते हुए कहा कि अतीत में उन्हें कुछ राज्यपालों को उनके पद से हटवाने के लिए केंद्र सरकार पर दबाव बनाने के लिए “मजबूर” होना पड़ा था। ममता का इशारा स्पष्ट तौर पर जगदीप धनखड़ (जो अब उपराष्ट्रपति हैं) और उनके बाद आए अन्य अंतरिम राज्यपालों की ओर था, जिनके साथ तृणमूल कांग्रेस सरकार के संबंध बेहद तनावपूर्ण रहे थे।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि राजभवन का उपयोग राज्य सरकार के कामकाज में बाधा डालने और चुनी हुई सरकार को अस्थिर करने के लिए एक ‘हथियार’ के रूप में किया जा रहा है। उन्होंने संवैधानिक सीमाओं का हवाला देते हुए कहा कि राज्यपाल का काम राज्य सरकार के साथ समन्वय बनाना है, न कि समानांतर प्रशासन चलाना।
आनंद बोस का जवाब और ‘आर.एन. रवि’ पर नया कटाक्ष
Kolkata मुख्यमंत्री के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस ने अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि एक राज्यपाल के रूप में वह केवल संविधान के प्रति जवाबदेह हैं। दिलचस्प बात यह रही कि इस बहस में तमिलनाडु के राज्यपाल आर.एन. रवि का नाम भी घसीटा गया। पश्चिम बंगाल के राजभवन से जुड़े सूत्रों और बयानों में यह संकेत दिया गया कि विपक्ष शासित राज्यों में राज्यपालों की भूमिका को लेकर जो विवाद चल रहा है, वह केवल बंगाल तक सीमित नहीं है।
आनंद बोस ने अपनी प्रतिक्रिया में शालीनता बरतते हुए भी यह साफ कर दिया कि वह दबाव में आकर काम नहीं करेंगे। उन्होंने तंजिया लहजे में यह भी स्पष्ट किया कि यदि सरकार को लगता है कि वे राज्यपालों को अपनी मर्जी से ‘बदल’ या ‘हटवा’ सकते हैं, तो यह उनकी संवैधानिक समझ की कमी को दर्शाता है।
संवैधानिक संकट और प्रशासनिक गतिरोध
Kolkata बंगाल में राज्यपाल और मुख्यमंत्री के बीच की यह लड़ाई केवल जुबानी जंग तक सीमित नहीं है। इसका सीधा असर राज्य के प्रशासन और विधायी कार्यों पर पड़ रहा है। कई महत्वपूर्ण बिल (विधेयक) राजभवन में अटके हुए हैं और कुलपतियों की नियुक्ति को लेकर शिक्षा विभाग और राज्यपाल के बीच पहले से ही अदालती लड़ाई चल रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के खुले टकराव से संघीय ढांचे (Federal Structure) की गरिमा को ठेस पहुँचती है। जहाँ ममता बनर्जी इसे ‘लोकतंत्र की रक्षा’ बता रही हैं, वहीं राजभवन इसे ‘संवैधानिक मर्यादा’ का प्रश्न बना रहा है। आने वाले दिनों में यह विवाद और भी गहराने की उम्मीद है, क्योंकि दोनों पक्ष अपनी-अपनी दलीलों पर अड़े हुए हैं और समझौते की गुंजाइश फिलहाल नजर नहीं आ रही है।
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