by-Ravindra Sikarwar
पश्चिम अफ्रीकी देश माली में हिंसा और अस्थिरता का सामना कर रहे हालात के बीच एक दर्दनाक घटना ने भारत को झकझोर दिया है। 6 नवंबर 2025 को माली के पश्चिमी हिस्से में कोबरी क्षेत्र के निकट एक विद्युतीकरण परियोजना पर काम कर रहे पांच भारतीय नागरिकों का एक समूह अज्ञात हथियारबंद लोगों द्वारा अगवा कर लिया गया। भारतीय दूतावास ने इस घटना को “दुर्भाग्यपूर्ण” बताते हुए कहा है कि वह माली सरकार और संबंधित कंपनी के साथ मिलकर उनकी जल्द से जल्द और सुरक्षित रिहाई सुनिश्चित करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहा है। अपहरण की जिम्मेदारी किसी भी संगठन ने अभी तक नहीं ली है, लेकिन माली की उथल-पुथल भरी स्थिति को देखते हुए यह घटना चिंताजनक मानी जा रही है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने भी इसकी पुष्टि की है और कहा है कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
अपहरण की घटना: कैसे और कहां हुआ यह हादसा?
घटना 6 नवंबर को दोपहर के समय घटी, जब पांच भारतीय इंजीनियर और तकनीशियन एक निजी कंपनी के काफिले के साथ कोबरी के पास विद्युतीकरण कार्य पर जा रहे थे। कंपनी के प्रतिनिधियों और स्थानीय सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, अचानक कुछ हथियारबंद हमलावरों ने काफिले को रोक लिया और इन पांच लोगों को बंधक बना लिया। हमलावरों ने तुरंत उन्हें जंगल की ओर ले जाकर गायब कर दिया, जबकि काफिले के बाकी सदस्यों को भागने का मौका मिल गया। कंपनी ने तत्काल माली की सुरक्षा एजेंसियों को सूचना दी, जिसके बाद बचे हुए भारतीय कर्मचारियों को सुरक्षित रूप से राजधानी बामाको पहुंचा दिया गया।
अपहृत भारतीयों की पहचान अभी आधिकारिक रूप से सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक वे सभी दक्षिण भारत, खासकर तमिलनाडु के निवासी हैं। इनमें से तीन के परिवार—पुत्तियावन, पोनुदुराई और पेचिमुथु—के सदस्यों ने 10 नवंबर को तूथुकुदी जिला कलेक्टर से मुलाकात की और केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की गुहार लगाई। परिवारों का कहना है कि वे चिंतित हैं और हर घंटे अपडेट की प्रतीक्षा कर रहे हैं। एक परिवारजन ने बताया, “हमारे बेटे/भाई वहां परिवार का पालन-पोषण करने के लिए काम कर रहे थे। हमें यकीन है कि सरकार उन्हें वापस लाएगी।”
दूतावास और सरकार की प्रतिक्रिया: समन्वित प्रयास जारी
भारतीय दूतावास ने 9 नवंबर को एक्स (पूर्व ट्विटर) पर एक बयान जारी कर कहा, “दूतावास को 6 नवंबर 2025 को माली में हमारे पांच नागरिकों के अपहरण की दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बारे में जानकारी है। दूतावास माली अधिकारियों और संबंधित कंपनी के साथ निकट समन्वय में काम कर रहा है ताकि उनकी जल्द से जल्द सुरक्षित रिहाई सुनिश्चित की जा सके।” दूतावास ने भारतीय नागरिकों से अपील की है कि वे माली में सतर्क रहें, दूतावास से लगातार संपर्क में रहें और यात्रा संबंधी सलाह का पालन करें।
विदेश मंत्रालय ने भी एक बयान में कहा, “भारत सरकार इस निंदनीय हिंसा की कड़ी निंदा करती है और माली गणराज्य सरकार से अपील करती है कि वह अपहृत भारतीय नागरिकों की सुरक्षित और शीघ्र रिहाई के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए।” मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय साझेदारों, जो साहेल क्षेत्र की अस्थिरता से परिचित हैं, के साथ समन्वय की बात कही है। नई दिल्ली में सूत्रों का कहना है कि दूतावास माली की सुरक्षा एजेंसियों के साथ लगातार संपर्क में है और स्थिति पर नजर रखे हुए है। दूतावास ने परिवारों को भी नियमित अपडेट देने का आश्वासन दिया है।
माली का संदर्भ: अस्थिरता और अपहरणों का इतिहास
माली 2012 से राजनीतिक अस्थिरता, विद्रोही हमलों और जिहादी समूहों की हिंसा से जूझ रहा है। 2020 में सैन्य तख्तापलट के बाद से देश जंटा शासित है, जहां अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट से जुड़े समूह सक्रिय हैं। विदेशी नागरिकों का अपहरण यहां आम हो गया है, खासकर मध्य और उत्तरी क्षेत्रों में, जहां रैनसम के लिए हमले होते हैं।
इस साल ही जुलाई में माली के कायेस में डायमंड सीमेंट फैक्टरी पर काम कर रहे तीन भारतीयों का अपहरण हुआ था, जिन्हें बाद में रिहा कर दिया गया। सितंबर में अल-कायदा से जुड़े जमात नुस्रत अल-इस्लाम वल मुसलिमीन (JNIM) ने बामाको के निकट दो संयुक्त अरब अमीरात के नागरिकों और एक ईरानी को अगवा किया, जिन्हें कथित रूप से 50 मिलियन डॉलर के रैनसम के बाद रिहा किया गया। वर्तमान में माली में ईंधन संकट चरम पर है, जिससे स्कूल बंद हो गए हैं, फसल कटाई रुकी है और बिजली की आपूर्ति सीमित हो गई है। संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम और जर्मनी जैसे देशों ने अपने नागरिकों को माली छोड़ने की सलाह जारी की है, क्योंकि सुरक्षा स्थिति “अनिश्चित” बनी हुई है।
JNIM, जो 2017 में गठित हुआ, ने माली और साहेल क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाया है और अक्सर विदेशी श्रमिकों, सहायता कर्मियों तथा औद्योगिक स्थलों को निशाना बनाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अपहरण मुख्य रूप से आर्थिक लाभ के लिए होते हैं, लेकिन ये क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में डालते हैं।
परिवारों और भारतीय समुदाय की प्रतिक्रिया:
अपहृतों के परिवार तमिलनाडु में चिंता से घिरे हैं। तूथुकुदी में हुई बैठक के दौरान परिवारजनों ने स्थानीय प्रशासन से केंद्र को तुरंत सूचित करने का अनुरोध किया। एक महिला ने कहा, “हमारे पुरुष वहां कड़ी मेहनत कर रहे थे ताकि परिवार का भरण-पोषण हो सके। अब हम बिना उनके क्या करेंगे?” भारतीय समुदाय माली में भी सतर्क हो गया है, जहां कई इंजीनियर और श्रमिक परियोजनाओं पर काम कर रहे हैं। दूतावास ने सभी भारतीयों को सलाह दी है कि वे अकेले न घूमें और सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करें।
भारत की कूटनीतिक सक्रियता और भविष्य की चुनौतियां:
यह घटना भारत के लिए विदेशी धरती पर नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की चुनौतियों को रेखांकित करती है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि “विदेश में भारतीयों की सुरक्षा और कल्याण सबसे ऊपर है।” दूतावास की त्वरित प्रतिक्रिया से उम्मीद है कि अपहृतों को जल्द रिहा किया जाएगा, लेकिन माली की जटिल स्थिति को देखते हुए यह प्रक्रिया लंबी हो सकती है। अंतरराष्ट्रीय सहयोग और कूटनीतिक दबाव से ही ऐसी घटनाओं का समाधान संभव है। फिलहाल, सभी की निगाहें बामाको पर टिकी हैं, जहां प्रयास जारी हैं। यह मामला न केवल इन पांच परिवारों का, बल्कि पूरे भारतीय प्रवासी समुदाय का है, जो वैश्विक अस्थिरता के बीच सुरक्षित रहने की लड़ाई लड़ रहा है।
