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By: Ravindra Sikarwar

केरल में हाल ही में संपन्न हुए स्थानीय निकाय चुनावों के परिणामों ने राज्य की राजनीति में बड़ा उलटफेर किया है। जहां कांग्रेस नीत यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) ने राज्य भर में ग्राम पंचायतों, ब्लॉक पंचायतों और नगरपालिकाओं में शानदार प्रदर्शन करते हुए बहुमत हासिल किया, वहीं राज्य की राजधानी तिरुवनंतपुरम नगर निगम में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने इतिहास रच दिया। एनडीए ने 101 वार्डों वाले इस निगम में 50 सीटें जीतकर सबसे बड़े दल के रूप में उभरा, जिससे लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) का 45 वर्षों से चला आ रहा दबदबा खत्म हो गया। यह जीत भाजपा के लिए दक्षिण भारत में अपनी पैठ मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

तिरुवनंतपुरम कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद शशि थरूर का संसदीय क्षेत्र है। थरूर यहां से चार बार लोकसभा चुनाव जीत चुके हैं, इसलिए इसे उनका राजनीतिक गढ़ कहा जाता है। लेकिन इस बार निकाय चुनाव में यूडीएफ को मात्र 19 वार्ड मिले, जबकि एलडीएफ को 29 और दो सीटें निर्दलीय उम्मीदवारों के खाते में गईं। एनडीए की इस जीत ने न केवल एलडीएफ को झटका दिया, बल्कि यूडीएफ के लिए भी चुनौती पेश की। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शहरी क्षेत्रों में मतदाताओं का रुझान बदल रहा है, जहां विकास, सुशासन और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन जैसे मुद्दे प्रमुख हो रहे हैं। भाजपा ने इन मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाया, जिसका फायदा उन्हें मिला।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस जीत पर खुशी जाहिर करते हुए इसे केरल की राजनीति में एक निर्णायक मोड़ बताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया कि तिरुवनंतपुरम में भाजपा-एनडीए को मिला जनादेश राज्य के लिए ऐतिहासिक है। मोदी ने कहा कि केरल की जनता अब यूडीएफ और एलडीएफ दोनों से थक चुकी है और उन्हें विश्वास है कि केवल एनडीए ही सुशासन और विकसित केरल का सपना साकार कर सकता है। उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं की मेहनत को सराहा और कहा कि पीढ़ियों से जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं की बदौलत यह सफलता मिली है। मोदी ने यह भी जोड़ा कि राज्य की विकास आकांक्षाओं को पूरा करने का दायित्व अब एनडीए पर है और पार्टी शहर के विकास व लोगों की सुविधा बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

दूसरी ओर, कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने चुनाव परिणामों पर अपनी प्रतिक्रिया दी, जो काफी संतुलित और लोकतांत्रिक रही। थरूर ने सबसे पहले यूडीएफ की राज्यव्यापी जीत की तारीफ की और इसे 2026 के विधानसभा चुनावों के लिए मजबूत संकेत बताया। उन्होंने कहा कि कड़ी मेहनत, स्पष्ट संदेश और सत्ता विरोधी लहर ने यूडीएफ को 2020 के मुकाबले कहीं बेहतर परिणाम दिलाया। लेकिन अपने क्षेत्र में भाजपा की जीत पर थरूर ने उदारता दिखाते हुए इसे “ऐतिहासिक प्रदर्शन” करार दिया और एनडीए को बधाई दी। थरूर ने लिखा कि तिरुवनंतपुरम में भाजपा की महत्वपूर्ण जीत राजधानी के राजनीतिक परिदृश्य में उल्लेखनीय बदलाव का प्रतीक है। उन्होंने खुद एलडीएफ के 45 साल के शासन से बदलाव की वकालत की थी, लेकिन मतदाताओं ने दूसरी पार्टी को चुना, जो लोकतंत्र की सुंदरता है। थरूर ने जोर दिया कि जनादेश का सम्मान करना चाहिए, चाहे वह यूडीएफ के पक्ष में हो या उनके क्षेत्र में भाजपा के पक्ष में।

थरूर की इस प्रतिक्रिया ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा छेड़ दी है। कुछ लोग इसे परिपक्व राजनीतिक व्यवहार बता रहे हैं, तो कुछ इसे कांग्रेस के भीतर उनके बदलते रुख का संकेत मान रहे हैं। हाल के दिनों में थरूर पार्टी की महत्वपूर्ण बैठकों से दूरी बनाते रहे हैं, जिससे अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि, थरूर ने स्पष्ट किया कि वे केरल के विकास और लोगों की भलाई के लिए हमेशा काम करते रहेंगे।

कुल मिलाकर, ये चुनाव परिणाम केरल में त्रिकोणीय मुकाबले को और रोचक बना रहे हैं। यूडीएफ की राज्यव्यापी मजबूती उन्हें विधानसभा चुनावों में मजबूत स्थिति देगी, जबकि भाजपा की तिरुवनंतपुरम जैसी जीत दक्षिणी राज्य में उनकी बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाती है। एलडीएफ को सत्ता विरोधी लहर का सामना करना पड़ा, जो सत्तारूढ़ दल के लिए चेतावनी है। आने वाले दिनों में ये परिणाम राज्य की राजनीति की दिशा तय करेंगे।

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