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By: Ravindra Sikarwar

जबलपुर: मध्य प्रदेश के कटनी जिले में भाजपा की वरिष्ठ नेत्री नीलू रजक की दिनदहाड़े गोली मारकर निर्मम हत्या करने के मामले ने पूरे प्रदेश में सनसनी फैला दी थी। इस जघन्य अपराध के मुख्य आरोपी अकरम खान के अवैध मकान को जिला प्रशासन द्वारा बुलडोजर से गिराने की कार्रवाई शुरू की गई थी, लेकिन मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर बेंच ने शुक्रवार को इस कार्रवाई पर अगले 15 दिनों के लिए रोक लगा दी है।

कोर्ट ने सिंगल बेंच के जज जस्टिस संजय द्विवेदी की अदालत में सुनवाई के दौरान आरोपी अकरम खान के भाई ने याचिका दायर कर मकान गिराने की कार्रवाई को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ता का दावा था कि उनका मकान पूरी तरह वैध है और बिना उचित नोटिस व कानूनी प्रक्रिया के इसे गिराना संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन व स्वतंत्रता का अधिकार) तथा अनुच्छेद 300A (संपत्ति का अधिकार) का उल्लंघन है।

अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अंतरिम राहत देते हुए प्रशासन को 15 दिनों तक मकान पर कोई कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया है। साथ ही कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि प्रशासन को लगता है कि यह रोक उचित नहीं है, तो वह 15 दिन के अंदर डिवीजन बेंच (डबल बेंच) में अपील दाखिल कर सकता है। अगली सुनवाई की तारीख अभी तय नहीं हुई है, लेकिन इस बीच याचिकाकर्ता को सभी जरूरी दस्तावेज कोर्ट में पेश करने होंगे।

गौरतलब है कि 18 नवंबर 2025 को कटनी के बहोरिबंद थाना क्षेत्र में भाजपा की जिला उपाध्यक्ष नीलू रजक की उस समय गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जब वह सुबह अपने घर से निकलकर पार्टी कार्यालय जा रही थीं। हमलावर अकरम खान ने ताबड़तोड़ गोलियां चलाईं, जिनमें से उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के तुरंत बाद पुलिस ने अकरम खान को गिरफ्तार कर लिया था। जांच में सामने आया कि हत्या के पीछे पुरानी रंजिश और स्थानीय स्तर पर चल रहा विवाद मुख्य कारण था।

हत्या के बाद पूरे क्षेत्र में भारी आक्रोश फैल गया था। भाजपा कार्यकर्ताओं ने बड़े स्तर पर प्रदर्शन किए और आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। इसी क्रम में कटनी जिला प्रशासन ने अकरम खान के मकान को अवैध निर्माण बताते हुए उसे ध्वस्त करने की तैयारी शुरू कर दी थी। गुरुवार देर रात तक बुलडोजर मौके पर पहुंच चुका था और शुक्रवार सुबह कार्रवाई होने वाली थी, लेकिन ठीक उसी समय हाईकोर्ट से रोक का आदेश आ गया।

इस मामले में मध्य प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों से “बुलडोजर नीति” काफी चर्चा में रही है। राज्य सरकार अपराधियों, माफिया और दंगाइयों के अवैध निर्माणों पर त्वरित कार्रवाई करने के लिए इस नीति को हथियार की तरह इस्तेमाल करती रही है। भाजपा शासित अन्य राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, गुजरात और हरियाणा में भी इस तरह की कार्रवाई आम हो चुकी है। हालांकि विपक्षी दल इसे “प्रतिशोध की राजनीति” और “संवैधानिक अधिकारों का दुरुपयोग” बताते रहे हैं।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि बुलडोजर कार्रवाई तभी वैध मानी जाती है जब संबंधित निर्माण पूरी तरह अवैध हो, उचित नोटिस दिया गया हो और मालिक को सुनवाई का मौका मिला हो। कई मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने भी सख्त टिप्पणी करते हुए कहा है कि “घर गिराना सजा का हिस्सा नहीं हो सकता” और कानून अपने हाथ में लेना स्वीकार्य नहीं है।

कटनी के स्थानीय लोगों में इस रोक को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। एक ओर जहां भाजपा समर्थक इसे “अपरिवार को बचाने की साजिश” बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ लोग कह रहे हैं कि कानून सबके लिए बराबर होना चाहिए और बिना ठोस सबूत के किसी की संपत्ति नष्ट नहीं की जानी चाहिए।

फिलहाल इस मामले पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हैं कि 15 दिन बाद डिवीजन बेंच में क्या फैसला आता है और क्या अकरम खान का मकान बच पाता है या फिर बुलडोजर फिर गरजेगा। साथ ही नीलू रजक हत्याकांड की जांच भी तेजी से चल रही है और पुलिस जल्द ही चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी में है।

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