Spread the love

by-Ravindra Sikarwar

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार द्वारा सिनेमाघरों की टिकट कीमतों पर लगाई गई ₹200 (GST को छोड़कर) की अधिकतम सीमा पर अंतरिम रोक लगा दी। यह निर्णय मल्टीप्लेक्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (MAI) और अन्य सिनेमाघर संचालकों की याचिकाओं के जवाब में आया, जिन्होंने तर्क दिया कि यह नीति उनके व्यवसाय को नुकसान पहुंचा रही है। इस आदेश ने सिनेमाघरों को तत्काल राहत प्रदान की है, जो आर्थिक दबाव और बदलते दर्शक व्यवहार से जूझ रहे हैं।

मामले का पृष्ठभूमि और याचिका:
कर्नाटक सरकार ने 1 मार्च, 2025 को एक अधिसूचना जारी कर सिनेमाघरों में टिकट कीमतों पर ₹200 की सीमा लागू की थी, जिसका उद्देश्य सिनेमा को आम जनता के लिए अधिक किफायती बनाना था। इस नीति के तहत, मल्टीप्लेक्स और सिंगल-स्क्रीन थिएटर्स को सामान्य और प्रीमियम सीटों के लिए यह अधिकतम मूल्य (GST को छोड़कर) रखना अनिवार्य था। हालांकि, मल्टीप्लेक्स ऑपरेटर्स और MAI ने इसका विरोध करते हुए तर्क दिया कि यह सीमा उनके परिचालन लागत, जैसे किराया, रखरखाव, और तकनीकी उन्नयन, को कवर करने में बाधा डाल रही है।

MAI ने अपनी याचिका में कहा कि मल्टीप्लेक्स प्रीमियम अनुभव प्रदान करते हैं, जैसे कि IMAX, 3D स्क्रीन, और रिक्लाइनर सीटें, जिनकी लागत अधिक होती है। उन्होंने दावा किया कि एकसमान मूल्य सीमा से उनकी आय में कमी आई है, जिससे कई सिनेमाघरों का संचालन घाटे में चल रहा है। इसके अलावा, उन्होंने तर्क दिया कि टिकट कीमतों को बाजार की मांग और आपूर्ति के आधार पर निर्धारित करना चाहिए, न कि सरकारी हस्तक्षेप से। याचिकाकर्ताओं ने यह भी बताया कि दक्षिण भारत में मल्टीप्लेक्स की हिस्सेदारी 26% है, और कर्नाटक में सिनेमाघरों की संख्या 800 से अधिक है, जो इस नीति से प्रभावित हो रहे हैं।

उच्च न्यायालय का आदेश:
मंगलवार को जस्टिस एस. सुनील दत्त यादव की एकल पीठ ने इस मामले की सुनवाई की और सरकार की अधिसूचना पर अंतरिम रोक लगा दी। कोर्ट ने कहा कि टिकट कीमतों पर सीमा लगाना सिनेमाघरों के व्यवसाय की स्वतंत्रता पर अनुचित प्रतिबंध हो सकता है। कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा है और अगली सुनवाई तक यह रोक लागू रहेगी। इस आदेश ने मल्टीप्लेक्स चेन जैसे PVR Inox, Cinepolis, और अन्य को तत्काल राहत दी है, जो अब अपनी कीमतें बाजार के आधार पर निर्धारित कर सकते हैं।

सिनेमाघरों की प्रतिक्रिया:
मल्टीप्लेक्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने इस फैसले का स्वागत किया और इसे “उद्योग के लिए महत्वपूर्ण जीत” बताया। MAI के एक प्रवक्ता ने कहा, “यह आदेश हमें अपने परिचालन को टिकाऊ बनाए रखने और दर्शकों को बेहतर अनुभव प्रदान करने में मदद करेगा।” सिनेमाघर मालिकों ने बताया कि महामारी के बाद से दर्शकों की संख्या में कमी और OTT प्लेटफॉर्म्स की बढ़ती लोकप्रियता ने पहले ही उद्योग को नुकसान पहुंचाया है। PVR Inox ने हाल ही में अपनी तिमाही रिपोर्ट में बताया कि उनकी आय में 15% की कमी आई है, जिसका एक कारण टिकट कीमतों पर सरकारी प्रतिबंध था।

सिंगल-स्क्रीन थिएटर्स ने भी इस फैसले का समर्थन किया, लेकिन कुछ ने चिंता जताई कि मल्टीप्लेक्स के मुकाबले उनकी प्रतिस्पर्धा और मुश्किल हो सकती है। बेंगलुरु के एक सिंगल-स्क्रीन थिएटर मालिक ने कहा, “हमें कीमतें बढ़ाने की आजादी मिली है, लेकिन मल्टीप्लेक्स की तुलना में हमारे संसाधन सीमित हैं।”

सरकार और जनता की प्रतिक्रिया:
कर्नाटक सरकार ने अभी तक इस फैसले पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि वे कोर्ट में अपनी नीति का बचाव करने की तैयारी कर रहे हैं। सरकार का तर्क है कि टिकट कीमतों पर सीमा लगाने से निम्न और मध्यम वर्ग के दर्शकों को सिनेमाघरों तक पहुंचने में मदद मिली थी। हालांकि, X पर #KarnatakaCinema और #TicketPriceCap हैशटैग के साथ चर्चा तेज हो गई है। कुछ यूजर्स ने सरकार की नीति को “जन-समर्थक” बताया, जबकि अन्य ने इसे “अव्यवहारिक” करार दिया, यह कहते हुए कि सिनेमाघरों को अपनी लागतें कवर करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए।

उद्योग पर प्रभाव और भविष्य:
यह अंतरिम आदेश मल्टीप्लेक्स के लिए तत्काल राहत लेकर आया है, खासकर कर्नाटक जैसे सिनेमाई केंद्र में, जहां बेंगलुरु और मैसूर जैसे शहरों में सिनेमाघरों की संख्या अधिक है। विश्लेषकों का मानना है कि इस फैसले से टिकट की कीमतें बढ़ सकती हैं, विशेष रूप से बड़े बजट की फिल्मों और प्रीमियम स्क्रीनिंग्स के लिए। हालांकि, इससे दर्शकों की संख्या पर असर पड़ सकता है, क्योंकि कई लोग पहले से ही OTT प्लेटफॉर्म्स की ओर रुख कर रहे हैं।

निष्कर्ष:
कर्नाटक उच्च न्यायालय का यह फैसला सिनेमाघर उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ है, जो आर्थिक दबावों से जूझ रहा है। अगली सुनवाई तक यह राहत मल्टीप्लेक्स को अपनी रणनीतियों को फिर से तैयार करने का मौका देगी। दर्शकों और सिनेमाघर मालिकों दोनों के लिए यह समय यह देखने का होगा कि क्या बाजार आधारित कीमतें सिनेमाघरों की भीड़ को वापस ला सकती हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

× Whatsapp