By: Ravindra Sikarwar
मध्य प्रदेश का प्रसिद्ध कान्हा टाइगर रिजर्व, जो अपनी समृद्ध जैव विविधता और बाघों की बड़ी आबादी के लिए विश्वभर में जाना जाता है, अब पर्यटकों के लिए कुछ नए नियमों के साथ और अधिक संरक्षित हो गया है। हाल ही में रिजर्व के कोर क्षेत्र में स्थित पर्यटन जोनों में मोबाइल फोन ले जाना और उसका इस्तेमाल करना पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है। यह फैसला देश की सर्वोच्च न्यायालय के 17 नवंबर 2025 के महत्वपूर्ण आदेश के अनुपालन में लिया गया है, जो वन्यजीव संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए पर्यटन गतिविधियों पर नियंत्रण लगाने का निर्देश देता है। इस नियम का उद्देश्य जंगल की प्राकृतिक शांति को बनाए रखना, वन्यजीवों को अनावश्यक डिस्टर्बेंस से बचाना और पर्यावरण की संवेदनशीलता को सुरक्षित रखना है।


कान्हा टाइगर रिजर्व मध्य प्रदेश के मंडला और बालाघाट जिलों में फैला हुआ है और यह देश के सबसे पुराने और सबसे खूबसूरत राष्ट्रीय उद्यानों में से एक है। रुडयार्ड किपलिंग की मशहूर किताब ‘द जंगल बुक’ की प्रेरणा इसी जगह से मिली थी। यहां बाघों के अलावा हिरण, बारासिंगा, लेपर्ड, स्लॉथ बियर और कई प्रकार के पक्षी पाए जाते हैं। हर साल लाखों पर्यटक यहां जिप्सी सफारी के जरिए प्रकृति का आनंद लेने आते हैं। लेकिन बढ़ते पर्यटन के कारण वन्यजीवों पर पड़ने वाले दबाव को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कई सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिनमें कोर क्षेत्र में मोबाइल फोन के उपयोग पर रोक भी शामिल है।

इस प्रतिबंध के तहत कान्हा रिजर्व के प्रमुख पर्यटन जोन जैसे किसली, कान्हा, मुक्की, सरही और फेन अभयारण्य शामिल हैं। इसके अलावा खापा, सिझौरा और खटिया जैसे प्रवेश द्वारों पर इस नियम की जानकारी देने के लिए बड़े-बड़े नोटिस बोर्ड लगाए जाएंगे। रिजर्व प्रबंधन ने सभी पर्यटकों, सफारी गाइडों, जिप्सी ड्राइवरों और संबंधित एसोसिएशनों को इस बारे में पहले ही सूचित कर दिया है। नियम का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी, जिसमें जुर्माना या सफारी पर प्रतिबंध लगाना शामिल हो सकता है।
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मोबाइल फोन से होने वाली रिंगटोन, कैमरा क्लिक की आवाजें, फ्लैश लाइट और लगातार बातचीत वन्यजीवों के लिए बड़ा डिस्टर्बेंस पैदा करती हैं। बाघ जैसे शर्मीले जानवर आवाज सुनकर छिप जाते हैं, जिससे न केवल उनकी प्राकृतिक दिनचर्या प्रभावित होती है, बल्कि पर्यटकों को भी अच्छा अनुभव नहीं मिल पाता। इसके अलावा सेल्फी लेने या वीडियो बनाने की होड़ में लोग नियम तोड़ते हैं, जो जंगल की शांति भंग करती है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा है कि पर्यटन क्षेत्रों में मोबाइल का उपयोग वन्यजीवों की संवेदनशीलता को नुकसान पहुंचाता है, इसलिए इसे पूरी तरह रोका जाना चाहिए। यह नियम पूरे देश के टाइगर रिजर्व्स पर लागू है, लेकिन मध्य प्रदेश ने इसे सबसे पहले कान्हा सहित अन्य रिजर्व्स में सख्ती से लागू किया है।
यह प्रतिबंध केवल मोबाइल तक सीमित नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के व्यापक दिशा-निर्देशों में रात्रिकालीन सफारी पर भी पूर्ण रोक लगाई गई है, जो पहले से ही कई रिजर्व्स में लागू हो चुकी है। साथ ही इको-सेंसिटिव जोन को मजबूत करने, साइलेंस जोन घोषित करने और अनियंत्रित पर्यटन पर लगाम लगाने के निर्देश दिए गए हैं। कान्हा प्रबंधन का मानना है कि ये कदम लंबे समय में बाघों की आबादी बढ़ाने और जंगल को वास्तविक रूप से संरक्षित रखने में मदद करेंगे।
पर्यटकों के लिए यह बदलाव शुरुआत में थोड़ा असुविधाजनक लग सकता है, लेकिन यह प्रकृति के साथ गहरा जुड़ाव स्थापित करने का अवसर भी है। अब सफारी के दौरान लोग मोबाइल की बजाय अपनी आंखों से जंगल की खूबसूरती, पक्षियों की चहचहाहट और जानवरों की हरकतों को महसूस कर पाएंगे। गाइडों को निर्देश दिए गए हैं कि वे पर्यटकों को इस नियम की महत्वपूर्णता समझाएं और प्राकृतिक अनुभव पर फोकस कराएं। कई विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे नियमों से पर्यटन अधिक टिकाऊ और जिम्मेदार बनेगा, जिससे आने वाली पीढ़ियां भी कान्हा की इस अनमोल धरोहर का आनंद ले सकेंगी।
कान्हा टाइगर रिजर्व पहले से ही पर्यावरण संरक्षण के लिए कई पुरस्कार जीत चुका है। यहां बारासिंगा जैसे दुर्लभ हिरण की आबादी बचाने में सफलता मिली है। अब मोबाइल प्रतिबंध जैसे कदमों से उम्मीद है कि जंगल और भी शांत और सुरक्षित बनेगा। यदि आप कान्हा जाने की योजना बना रहे हैं, तो याद रखें कि कोर क्षेत्र में मोबाइल ले जाना पूरी तरह वर्जित है। प्रवेश द्वार पर ही इसे जमा करना पड़ सकता है। यह नियम न केवल कान्हा बल्कि पूरे प्रदेश के टाइगर रिजर्व्स पर लागू है, जो वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक नया लेकिन जरूरी अनुशासन ला रहा है।
इस फैसले से वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक मजबूत संदेश गया है कि पर्यटन प्रकृति की सेवा में होना चाहिए, न कि उसके खिलाफ। कान्हा जैसे खूबसूरत जंगल हमें याद दिलाते हैं कि सच्चा आनंद तकनीक से दूर, प्रकृति के करीब होने में है।
