By: Ravindra Sikarwar
मध्य प्रदेश के भिंड शहर के देवनगर कॉलोनी, महावीर गंज की रहने वाली 18 वर्षीय ज्योति जैन ने मंगलवार दो दिसंबर 2025 की दोपहर करीब ढाई बजे चंबल नदी के बरही पुल से कूदकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। कुछ ही सेकंड में चंबल का तेज बहाव उसे दूर ले गया और एक पढ़ने-लिखने में होशियार, घर में सबसे लाड़ली बेटी हमेशा के लिए खामोश हो गई।
परिजनों के अनुसार ज्योति सुबह करीब साढ़े नौ बजे घर से निकली थी। उसने मां से कहा था, “मम्मी, कॉलेज में प्रोजेक्ट का काम है, दो-तीन घंटे में आ जाऊंगी।” हमेशा की तरह उसने सफेद कुर्ता और नीले दुपट्टे के साथ जींस पहनी थी, कंधे पर छोटा सा काला बैग लटकाया था और मुस्कुराते हुए दरवाजे से बाहर निकल गई। घरवालों को तनिक भी इल्म नहीं था कि वह आखिरी बार दरवाजा खोलकर निकल रही है।
बरही पुल मध्य प्रदेश-उत्तर प्रदेश की सीमा पर बना है। दोपहर के वक्त पुल पर वाहनों की आवाजाही कुछ कम थी। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि ज्योति पहले पुल के बीचों-बीच रेलिंग के पास खड़ी रही। उसने अपना बैग और मोबाइल फोन सावधानी से रेलिंग के पास रखा, एक बार आसपास देखा, फिर चुपचाप रेलिंग पर चढ़ी और बिना किसी हिचकिचाहट के छलांग लगा दी। नीचे चंबल की काली लहरें बेकरारी से उसका इंतजार कर रही थीं।
कुछ दूर खड़े ट्रक ड्राइवरों और राहगीरों ने चीखें सुनीं और दौड़कर आए। किसी ने तुरंत 112 पर कॉल किया। सूचना मिलते ही फूप थाना पुलिस और उत्तर प्रदेश के इटावा जिले की चकरनगर पुलिस मौके पर पहुंच गई। दोनों राज्यों की जल पुलिस व एसडीआरएफ की टीम ने करीब साढ़े तीन घंटे तक नाव से तलाशी अभियान चलाया। शाम साढ़े पांच बजे के करीब यूपी की सीमा में बहाव के साथ शव मिला। जब शव को बाहर निकाला गया तो परिजनों की चीखें दूर तक गूंजीं।
ज्योति भिंड के एक प्रतिष्ठित निजी कॉलेज में बीकॉम प्रथम वर्ष की छात्रा थी। वह घर में तीन बहनों में सबसे छोटी और सबसे चहेती थी। पिता अशोक जैन शहर में कपड़े की छोटी सी दुकान चलाते हैं। मां गृहिणी हैं। ज्योति के बड़े पापा ने रोते हुए बताया, “हमारी बिटिया बहुत होशियार थी। ट्यूशन भी पढ़ाती थी। कभी किसी से शिकायत नहीं की। पिछले कुछ दिनों से थोड़ी चुप-चुप सी रहती थी, लेकिन हमने समझा परीक्षा का टेंशन होगा। काश एक बार पूछ लेते कि बेटी, क्या बात है!”
पुल किनारे मिले बैग में उसका कॉलेज आई-कार्ड, दो कॉपियां, एक पेन, कुछ नोट्स और लॉक किया हुआ मोबाइल फोन बरामद हुआ। अभी तक कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। पुलिस मोबाइल अनलॉक करवाने की कोशिश कर रही है। परिजन अभी डायरी या कोई लिखित सामग्री देने की स्थिति में नहीं हैं। प्रारंभिक पूछताछ में कॉलेज के दोस्तों ने बताया कि ज्योति पिछले दस-पंद्रह दिनों से कुछ परेशान जरूर लग रही थी, लेकिन उसने किसी से कुछ साझा नहीं किया।
फूप पुलिस ने मर्ग कायम कर लिया है। थाना प्रभारी ने बताया कि परिजनों, दोस्तों और शिक्षकों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। मोबाइल की कॉल डिटेल, चैट और सोशल मीडिया एक्टिविटी खंगाली जा रही है। अभी तक परिवार में झगड़ा, पढ़ाई का अत्यधिक दबाव या किसी प्रेम संबंध की बात सामने नहीं आई है, लेकिन जांच जारी है।
चंबल नदी और खासकर बरही पुल पिछले कई सालों से आत्महत्या के लिए कुख्यात हो चुका है। स्थानीय लोग बताते हैं कि हर साल यहां दर्जनों युवा अपनी जान दे देते हैं। पुल पर लोहे की ऊंची जाली लगाने और चौबीस घंटे पुलिस गश्त की मांग लंबे समय से हो रही है, पर अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
ज्योति की मौत ने एक बार फिर समाज के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जब घर में कोई सबसे खुश दिखने वाला सदस्य अंदर ही अंदर टूट रहा हो तो उसे पहचानना कितना मुश्किल होता है? काश ज्योति ने किसी से एक बार अपनी बात कह दी होती, शायद आज उसकी हंसी घर में गूंज रही होती। चंबल ने एक और मासूम फूल को निगल लिया, लेकिन उसके जाने से जो खालीपन रह गया, उसे भरना अब नामुमकिन है।
