by-Ravindra Sikarwar
बेंगलुरु: कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में एक निजी इंजीनियरिंग कॉलेज के कैंपस में एक बेहद दर्दनाक और शर्मनाक घटना ने पूरे समुदाय को झकझोर दिया है। यहां एक जूनियर छात्र ने अपनी सीनियर सहपाठी के साथ कॉलेज के पुरुष शौचालय में दुष्कर्म किया। घटना के बाद आरोपी ने पीड़िता को फोन करके पूछा कि क्या उसे ‘गोली’ की जरूरत है, जिससे मामला और भी घिनौना हो गया। पुलिस ने 21 वर्षीय आरोपी जीवन गौड़ा को गिरफ्तार कर लिया है, जो छठे सेमेस्टर का छात्र है। वह अब न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। यह घटना 10 अक्टूबर को हुई, लेकिन पीड़िता ने डर और तनाव के कारण पांच दिनों बाद, यानी 15 अक्टूबर को शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस के अनुसार, पीड़िता सातवें सेमेस्टर की छात्रा है, और आरोपी के साथ वह उसी विभाग में पढ़ती है। दोनों की उम्र लगभग समान है, और पहले वे क्लासमेट भी रह चुके थे, लेकिन गौड़ा के बैकलॉग के कारण वह जूनियर हो गया था। घटना के दिन दोपहर के लंच ब्रेक के दौरान गौड़ा ने पीड़िता को कई बार फोन किया और सातवीं मंजिल के आर्किटेक्चर ब्लॉक के पास मिलने को कहा। पीड़िता ने सोचा कि वह कुछ व्यक्तिगत सामान लौटाने आया है, इसलिए वह वहां पहुंची। जैसे ही वह आई, गौड़ा ने उसे जबरदस्ती चूमने की कोशिश की। पीड़िता ने विरोध किया और लिफ्ट की ओर भागी, लेकिन गौड़ा ने पीछा किया और छठी मंजिल पर उसे पकड़ लिया।
फर्स्ट इन्फॉर्मेशन रिपोर्ट (एफआईआर) के मुताबिक, गौड़ा ने पीड़िता को जबरन पुरुष शौचालय में घसीटा, दरवाजा बंद कर दिया और उसके फोन को छीन लिया। हमले के दौरान जब पीड़िता का फोन बजा, तो गौड़ा ने उसे जब्त कर लिया। दुष्कर्म दोपहर 1:30 से 1:50 बजे के बीच हुआ। पीड़िता ने जैसे-तैसे खुद को संभाला और बाहर निकली। घटना के तुरंत बाद वह दो सहेलियों को बताने पहुंची, लेकिन डर के मारे कुछ दिनों तक चुप रही। बाद में परिवार को सूचना दी, जिन्होंने उसे पुलिस के पास जाने के लिए प्रोत्साहित किया। हनुमानथनगर पुलिस स्टेशन में दर्ज शिकायत के आधार पर मामला भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 64 के तहत दर्ज किया गया है, जो बलात्कार की सजा का प्रावधान करती है।
घटना के बाद का व्यवहार और भी चौंकाने वाला था। गौड़ा ने हमले के कुछ समय बाद पीड़िता को फोन किया और पूछा कि क्या उसे ‘गोली’ चाहिए। पीड़िता ने तुरंत कॉल काट दिया। पुलिस का मानना है कि यह सवाल गर्भनिरोधक दवा या गर्भपात की गोली का इशारा था, जो आरोपी की लापरवाही और अपराधबोध की कमी को दर्शाता है। पीड़िता ने एफआईआर में इसकी पूरी जानकारी दी है। पुलिस ने बताया कि कॉलेज की उस मंजिल पर कोई सीसीटीवी कैमरा नहीं है, लेकिन फोरेंसिक टीम डिजिटल और भौतिक साक्ष्यों की जांच कर रही है। आरोपी के फोन रिकॉर्ड और संदेशों की भी छानबीन हो रही है।
कॉलेज प्रशासन ने इस घटना पर तत्काल प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह छात्रों की सुरक्षा को प्राथमिकता देता है। संस्थान ने जांच में पूर्ण सहयोग का वादा किया है और प्रभावित छात्रा को आवश्यक सहायता प्रदान करने का आश्वासन दिया। हालांकि, विपक्षी दलों ने राज्य सरकार पर निशाना साधा है। कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) की प्रवक्ता ने कहा, “कर्नाटक में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। पिछले चार महीनों में लड़कियों पर 979 यौन हमले दर्ज हुए हैं, जिनमें बेंगलुरु में ही 114 मामले हैं। मायसुरु में आदिवासी लड़की के साथ बलात्कार और हत्या से लेकर कालाबुर्गी में लाइब्रेरियन की आत्महत्या तक—यह नैतिक और प्रशासनिक विफलता है।” उन्होंने मांग की है कि सरकार कॉलेज कैंपसों में सुरक्षा उपायों को सख्त करे और दोषियों को कड़ी सजा दिलाए।
यह घटना बेंगलुरु में हाल ही में हुई अन्य समान घटनाओं की याद दिलाती है। अगस्त में शहर के एक पीजी आवास में एक छात्रा के साथ मकान मालिक ने बलात्कार किया था, जो वहां केवल 10 दिनों से रह रही थी। विशेषज्ञों का कहना है कि शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों की सुरक्षा के लिए अधिक जागरूकता, काउंसलिंग सत्र और सीसीटीवी निगरानी जरूरी है। पुलिस ने पीड़िता को मेडिकल परीक्षण के लिए अस्पताल भेजा है, और जांच जारी है। आरोपी को कोर्ट में पेश किया गया, जहां उसे 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
यह मामला न केवल एक व्यक्ति की क्रूरता को उजागर करता है, बल्कि उच्च शिक्षा संस्थानों में महिलाओं की असुरक्षा को भी रेखांकित करता है। समाज को यह सोचने पर मजबूर करता है कि कैसे हम ऐसी घटनाओं को रोक सकते हैं और पीड़ितों को त्वरित न्याय सुनिश्चित कर सकते हैं। पुलिस ने अपील की है कि पीड़ित महिलाएं बिना डर के शिकायत दर्ज कराएं, और जांच एजेंसियां हर संभव साक्ष्य इकट्ठा कर रही हैं।
