By: Ravindra Sikarwar
छत्तीसगढ़ की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। झीरम घाटी में हुए नक्सली हमले को लेकर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। जांजगीर-चांपा जिले में आयोजित राज्य स्तरीय “जनादेश परब” कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे जेपी नड्डा ने न सिर्फ झीरम घाटी हमले को याद किया, बल्कि इसके बहाने कांग्रेस की नीतियों और कार्यशैली पर भी सवाल उठाए।
यह कार्यक्रम मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व वाली सरकार के दो वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित किया गया था। मंच से संबोधन के दौरान नड्डा ने कहा कि झीरम घाटी नक्सली हमले में केवल बाहरी ताकतें नहीं, बल्कि “अंदर के लोग” भी शामिल थे। उन्होंने यह बयान देकर राजनीतिक हलकों में नई बहस को जन्म दे दिया।
झीरम घाटी हमला: कांग्रेस पर गंभीर आरोप
जेपी नड्डा ने अपने भाषण में कहा कि झीरम घाटी में जो भयावह नक्सली हमला हुआ था, उसमें कांग्रेस के 23 नेताओं की जान गई थी। यह घटना राज्य के इतिहास की सबसे दर्दनाक घटनाओं में से एक रही है। नड्डा ने आरोप लगाया कि उस समय की सरकार नक्सलवाद को लेकर गंभीर नहीं थी और अंदरूनी स्तर पर भी कई चूक हुईं, जिनका खामियाजा निर्दोष नेताओं को अपनी जान देकर चुकाना पड़ा।
उन्होंने कहा कि आज सच्चाई सामने आ रही है और जनता सब कुछ समझ रही है। नड्डा के अनुसार, झीरम घाटी जैसी घटनाएं केवल नक्सलवाद की नहीं, बल्कि कमजोर राजनीतिक इच्छाशक्ति की भी देन थीं।
डबल इंजन सरकार में बदले हालात
जेपी नड्डा ने कहा कि अब छत्तीसगढ़ में केंद्र और राज्य की “डबल इंजन सरकार” काम कर रही है, जिसका सीधा फायदा प्रदेश को मिल रहा है। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा सरकार के प्रयासों से नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है।
नड्डा के मुताबिक, बड़ी संख्या में नक्सली या तो आत्मसमर्पण कर रहे हैं या फिर सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में मारे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह बदलाव अचानक नहीं आया, बल्कि सशक्त नीति, मजबूत नेतृत्व और सुरक्षा बलों के समन्वित प्रयासों का परिणाम है।
नक्सलवाद पर बड़ा बयान
नक्सलवाद के मुद्दे पर बोलते हुए जेपी नड्डा ने कहा कि माओवाद अब पहले की तरह व्यापक नहीं रहा। यह अब कुछ सीमित जिलों और गांवों तक सिमट कर रह गया है। उन्होंने कहा कि बसवराजू और हिड़मा जैसे बड़े नक्सली नेताओं के मारे जाने से माओवाद की रीढ़ टूट चुकी है।
नड्डा ने यह भी जोड़ा कि केंद्र सरकार और राज्य सरकार मिलकर नक्सल प्रभावित इलाकों में विकास, सड़क, शिक्षा और रोजगार के माध्यम से स्थायी समाधान की दिशा में काम कर रही हैं।
कांग्रेस शासन पर साधा निशाना
जेपी नड्डा ने कांग्रेस के शासनकाल को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जब राज्य और केंद्र में कांग्रेस की सरकारें थीं, तब नक्सलवाद जैसी गंभीर समस्या को खत्म करने के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं किए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने केवल राजनीति की, लेकिन जमीनी स्तर पर सुरक्षा और विकास को प्राथमिकता नहीं दी।
उनका कहना था कि कांग्रेस की नीतियों के कारण ही नक्सलवाद को पनपने का मौका मिला, जिसका खामियाजा आज भी कुछ क्षेत्रों को भुगतना पड़ रहा है।
राहुल गांधी और कांग्रेस की यात्राओं पर कटाक्ष
जेपी नड्डा ने बिहार चुनाव का जिक्र करते हुए राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने वहां “वोट बचाओ यात्रा” निकाली, लेकिन भाजपा ने इसे “घुसपैठियों बचाओ यात्रा” नाम दिया। नड्डा के अनुसार, राहुल गांधी ने 125 विधानसभा क्षेत्रों और 16 जिलों में यात्रा की, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद कांग्रेस को महज 6 सीटों पर संतोष करना पड़ा।
उन्होंने दावा किया कि इसका साफ संदेश है कि जनता ने कांग्रेस और पूरे विपक्ष को नकार दिया है और भाजपा पर भरोसा जताया है।
राजनीतिक संदेश और आने वाले संकेत
जेपी नड्डा के इस बयान को आने वाले चुनावों और छत्तीसगढ़ की राजनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। नक्सलवाद, झीरम घाटी हमला और कांग्रेस की नीतियों पर खुलकर हमला कर भाजपा ने यह संकेत दिया है कि वह सुरक्षा और विकास को ही अपना मुख्य एजेंडा बनाए रखेगी।
कार्यक्रम के अंत में नड्डा ने कहा कि भाजपा की सरकारें जनादेश का सम्मान करते हुए काम कर रही हैं और आने वाले समय में छत्तीसगढ़ को नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त करना उनका लक्ष्य है।
