by-Ravindra Sikarwar
झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के संरक्षक और पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन का 4 अगस्त, 2025 को दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में निधन हो गया। वे 81 वर्ष के थे और पिछले एक महीने से किडनी संबंधी बीमारी का इलाज करा रहे थे। उनके निधन के बाद झारखंड सरकार ने तीन दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है।
झारखंड के ‘दिशोम गुरु’ को अंतिम श्रद्धांजलि:
शिबू सोरेन के पार्थिव शरीर को सोमवार शाम को विशेष विमान से दिल्ली से रांची लाया गया। बिरसा मुंडा हवाई अड्डे पर हजारों की संख्या में पार्टी कार्यकर्ता, समर्थक और आम जनता मौजूद थी। जैसे ही पार्थिव शरीर पहुंचा, ‘दिशोम गुरु अमर रहे’ के नारे गूंज उठे।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी कल्पना सोरेन पार्थिव शरीर के साथ थे। रांची हवाई अड्डे से पार्थिव शरीर को उनके आवास पर ले जाया गया, जहां बड़ी संख्या में लोग उनके अंतिम दर्शन के लिए इंतजार कर रहे थे।
राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार:
शिबू सोरेन के पार्थिव शरीर को 5 अगस्त, 2025 को सुबह 10 बजे झारखंड विधानसभा परिसर में अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। इसके बाद, उनका अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव रामगढ़ जिले के नेमरा में किया जाएगा।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने पिता के निधन की सूचना दी और उन्हें ‘दिशोम गुरु’ बताते हुए कहा कि आज वे खाली हो गए हैं।
राजनेताओं ने दी श्रद्धांजलि:
शिबू सोरेन के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे समेत कई नेताओं ने शोक व्यक्त किया है।
- पीएम मोदी ने उन्हें जमीनी स्तर का नेता बताया, जिन्होंने गरीबों और वंचितों, खासकर आदिवासी समुदायों के सशक्तिकरण के लिए काम किया।
- राष्ट्रपति मुर्मू ने शिबू सोरेन को सामाजिक न्याय के क्षेत्र में एक बड़ी क्षति बताया और झारखंड राज्य के निर्माण में उनके योगदान को याद किया।
- राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि सोरेन ने अपना पूरा जीवन समाज के कमजोर वर्गों, विशेषकर आदिवासी समुदाय के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष किया।
शिबू सोरेन को झारखंड राज्य के निर्माण के लिए किए गए संघर्षों के लिए हमेशा याद किया जाएगा। उनके निधन से झारखंड की राजनीति में एक खालीपन आ गया है, जिसे भरना मुश्किल होगा।
