By: Ishu Kumar
Janakpuri : दिल्ली के जनकपुरी इलाके में हुए गड्ढा हादसे ने एक युवक की जान लेने के साथ-साथ राजधानी की प्रशासनिक व्यवस्था और राजनीतिक जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जल बोर्ड के कार्य के दौरान सड़क पर छोड़े गए खुले गड्ढे में गिरकर कमल चंदानी की मौत अब सिर्फ एक दुर्घटना नहीं मानी जा रही, बल्कि यह मामला राजनीतिक बहस और प्रशासनिक कार्रवाई का केंद्र बन गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस घटना को लेकर दिल्ली सरकार पर सीधा और कठोर प्रहार किया है।

Janakpuri राहुल गांधी का हमला: “यह हादसा नहीं, व्यवस्था की हत्या है”
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह घटना केवल लापरवाही नहीं, बल्कि जवाबदेही से भागती सत्ता का नतीजा है। उन्होंने लिखा कि देश में फैली लालच और गैर-जिम्मेदारी की बीमारी ने एक और युवा की जान ले ली। राहुल गांधी के अनुसार, इस हादसे में सिर्फ एक व्यक्ति नहीं मरा, बल्कि एक परिवार की पूरी दुनिया उजड़ गई। उन्होंने कहा कि असली दोषी सड़क या गड्ढा नहीं, बल्कि वह सत्ता है जो ऐसी घटनाओं के बाद भी न इस्तीफा देती है, न सजा सुनिश्चित करती है। उन्होंने देश के अन्य हादसों का हवाला देते हुए कहा कि जवाबदेही की पूरी व्यवस्था कमजोर हो चुकी है।
Janakpuri प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई, तीन अधिकारी निलंबित
घटना के बाद दिल्ली प्रशासन और जल बोर्ड पर दबाव बढ़ा, जिसके चलते प्रशासनिक कार्रवाई की गई। जल बोर्ड से जुड़े एक्सईएन, एई और जेई को निलंबित कर दिया गया है। इन अधिकारियों पर आरोप है कि सड़क खोदने के बाद सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया। न तो गड्ढे के आसपास बैरिकेडिंग थी, न चेतावनी बोर्ड और न ही पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था। पश्चिमी दिल्ली के डीसीपी शरद भास्कर ने बताया कि पूरे मामले की जांच की जा रही है और यह पता लगाया जा रहा है कि लापरवाही किस स्तर पर हुई।
कैसे हुआ हादसा और परिवार के आरोप
कमल चंदानी गुरुवार रात करीब 10 बजे रोहिणी स्थित एक निजी बैंक में ड्यूटी खत्म कर बाइक से अपने घर लौट रहा था। रास्ते में जनकपुरी के पास सड़क पर मौजूद गहरे गड्ढे में उसकी बाइक गिर गई, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। परिजनों का कहना है कि यदि सड़क पर सुरक्षा के बुनियादी इंतजाम होते, तो यह जान बचाई जा सकती थी। मृतक के भाई ने पुलिस पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पुलिस ने सिर्फ आखिरी लोकेशन बताई, लेकिन तलाश में कोई सक्रिय मदद नहीं की गई। परिवार का मानना है कि समय रहते सहायता मिलती, तो शायद कमल की जान बच सकती थी।
यह मामला अब दिल्ली में बुनियादी ढांचे, प्रशासनिक लापरवाही और राजनीतिक जिम्मेदारी पर एक बड़े सवाल के रूप में सामने आ चुका है।
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