Report by: Prem Srivastwa
Jamshedpur : लौहनगरी जमशेदपुर के टाटानगर रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा बलों के दो विंग्स के बीच टकराव का एक बेहद गंभीर मामला प्रकाश में आया है। सीमा सुरक्षा बल (BSF) के एक जवान ने रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की महिला कर्मी और अन्य पुलिसकर्मियों पर उनके साथ मारपीट करने और उनकी पत्नी के साथ दुर्व्यवहार करने का सनसनीखेज आरोप लगाया है। इस घटना ने रेलवे परिसर में यात्रियों की सुरक्षा और सुरक्षा कर्मियों के आपसी तालमेल पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्टेशन पर सामान को लेकर शुरू हुआ विवाद
Jamshedpur मिली जानकारी के अनुसार, बीएसएफ जवान आलोक रंजन गुरुवार सुबह करीब 8 बजे अपनी पत्नी के साथ टाटा-कटिहार ट्रेन से टाटानगर रेलवे स्टेशन पहुँचे थे। विवाद उस समय शुरू हुआ जब वे अपना सामान लेकर प्लेटफॉर्म पर मौजूद थे।
आलोक रंजन का आरोप है कि वहां ड्यूटी पर तैनात आरपीएफ की महिला पुलिसकर्मी आनंदिता बारिक ने बिना किसी ठोस कारण के उनके सामान (लगेज बैग) पर लात मारना शुरू कर दिया। जब बीएसएफ जवान ने इस व्यवहार पर आपत्ति जताई और कारण जानना चाहा, तो बहस शुरू हो गई। आरोप है कि महिला कर्मी ने मर्यादा की सीमाएं लांघते हुए जवान के साथ बदसलूकी की और देखते ही देखते अन्य पुलिसकर्मियों के साथ मिलकर उनके साथ मारपीट शुरू कर दी।
पत्नी के साथ धक्का-मुक्की और 7 घंटे की हिरासत का आरोप
Jamshedpur पीड़ित जवान ने अपनी शिकायत में एक और गंभीर बात कही है। उनके अनुसार, विवाद के दौरान वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने उनकी पत्नी के साथ भी अभद्र व्यवहार किया। धक्का-मुक्की की वजह से उनकी पत्नी जमीन पर गिर पड़ीं, जिससे उन्हें चोटें भी आईं।
जवान का यह भी दावा है कि वर्दी के रसूख में आरपीएफ कर्मियों ने उन्हें करीब सात घंटे तक हाजत (Lock-up) में बंद रखा। एक रक्षा बल के जवान के साथ इस तरह के बर्ताव को लेकर स्टेशन परिसर में काफी चर्चा हो रही है। आलोक रंजन का कहना है कि वे देश की सेवा में तैनात हैं, लेकिन रेलवे स्टेशन पर उनके साथ अपराधियों जैसा सुलूक किया गया।
आरपीएफ ने आरोपों को नकारा, दोनों पक्षों के दावों में विरोधाभास
Jamshedpur दूसरी ओर, आरपीएफ की महिला पुलिसकर्मी आनंदिता बारिक ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका पक्ष है कि वह पूरी निष्ठा से अपनी ड्यूटी निभा रही थीं। महिला कर्मी के अनुसार, संबंधित व्यक्ति (आलोक रंजन) ने ही उनके साथ पहले बदतमीजी की और सरकारी काम में बाधा डालने की कोशिश की, जिसके बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
फिलहाल, इस मामले में दोनों ही पक्ष अपनी-अपनी दलीलें दे रहे हैं। जहाँ एक ओर बीएसएफ जवान न्याय की गुहार लगा रहे हैं, वहीं आरपीएफ इसे ड्यूटी के दौरान हुई बहस का हिस्सा बता रही है। घटना की गंभीरता को देखते हुए रेलवे के उच्चाधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है ताकि सीसीटीवी फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के आधार पर सत्यता का पता लगाया जा सके।
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