by-Ravindra Sikarwar
लॉन्ग आइलैंड, न्यूयॉर्क के ईस्ट नॉर्थपोर्ट में गुरुवार, 6 नवंबर 2025 को, आणविक जीवविज्ञानी जेम्स डी. वॉटसन का निधन हो गया। वे 97 वर्ष के थे। एक संक्षिप्त बीमारी के बाद हॉस्पिस में उनका अवसान हुआ। वॉटसन, जिन्हें डीएनए की दोहरी कुंडलिनी संरचना की खोज के लिए जाना जाता है, ने विज्ञान की दुनिया में क्रांति ला दी। इस खोज ने चिकित्सा, अपराध जांच, वंशावली और नैतिकता के क्षेत्रों में अभूतपूर्व बदलावों की नींव रखी। उनके बेटे डंकन ने निधन की पुष्टि की, जबकि कोल्ड स्प्रिंग हार्बर लेबोरेटरी (सीएसएचएल)—जहां उन्होंने अधिकांश करियर बिताया—ने एक बयान जारी कर इसे “जीवन विज्ञान के इतिहास में एक निर्णायक क्षण” करार दिया।
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा: एक जिज्ञासु बालक से वैज्ञानिक तक
जेम्स ड्यूई वॉटसन का जन्म 6 अप्रैल 1928 को शिकागो, अमेरिका में हुआ था। वे जीन (मां) और जेम्स (पिता) के इकलौते पुत्र थे, जो अंग्रेज, स्कॉटिश और आयरिश प्रवासियों के वंशज थे। परिवार में किताबें, पक्षी अवलोकन और डेमोक्रेटिक पार्टी की राजनीति का गहरा प्रभाव था। मां डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए काम करती थीं, जबकि पिता विज्ञान और पक्षी प्रेक्षण के शौकीन थे। बचपन में वॉटसन पिता के साथ पक्षी अवलोकन यात्राओं पर जाते थे, जो उनकी वैज्ञानिक जिज्ञासा को जगाने का कारण बने।
उन्होंने मात्र 15 वर्ष की आयु में शिकागो विश्वविद्यालय में दाखिला लिया और 1947 में प्राणीशास्त्र में स्नातक की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने इंडियाना विश्वविद्यालय से पीएचडी प्राप्त की, जहां उन्होंने वायरस पर शोध किया। 1950 में, वे यूरोप चले गए और केम्ब्रिज विश्वविद्यालय के केविक इंस्टीट्यूट में फ्रांसिस क्रिक से मिले। क्रिक की तेज बुद्धि और जोरदार हंसी ने वॉटसन को प्रभावित किया। दोनों ने मिलकर डीएनए की संरचना पर काम शुरू किया, जो जीवन के रहस्यों को सुलझाने वाली साबित हुई।
डीएनए की खोज: विज्ञान का एक ऐतिहासिक क्षण
1953 में, मात्र 25 वर्ष की आयु में वॉटसन ने क्रिक के साथ मिलकर डीएनए की दोहरी कुंडलिनी (डबल हेलिक्स) संरचना की खोज की। यह संरचना डीएनए को दो सर्पिल धागों के रूप में चित्रित करती है, जो एक लंबी, धीरे-धीरे मुड़ती सीढ़ी जैसी दिखती है। वॉटसन ने कार्डबोर्ड से बने डीएनए के टुकड़ों को जोड़-तोड़ कर यह मॉडल तैयार किया। जब पहली बार “सीढ़ी की सीढ़ियां” (रंग्स) का आकार स्पष्ट हुआ, तो वॉटसन ने उत्साह से कहा, “यह इतना सुंदर है।”
इस खोज में ब्रिटिश रसायनज्ञ रोजालिंड फ्रैंकलिन के एक्स-रे क्रिस्टलोग्राफी डेटा का महत्वपूर्ण योगदान था, लेकिन वॉटसन और क्रिक ने इसे पूरी तरह मान्यता नहीं दी। फ्रैंकलिन की मृत्यु 1958 में हो गई, इसलिए 1962 में जब वॉटसन, क्रिक और मोरिस विल्किंस को चिकित्सा में नोबेल पुरस्कार मिला, तो फ्रैंकलिन को सम्मानित नहीं किया जा सका। नोबेल नियमों के अनुसार, केवल जीवित व्यक्तियों को ही पुरस्कार दिया जाता है। बाद में फ्रैंकलिन के योगदान को मान्यता मिली, लेकिन कई लोगों ने इसे अन्यायपूर्ण माना।
यह खोज आनुवंशिक विज्ञान की नींव बनी। डीएनए, जो जीवन का आनुवंशिक ब्लूप्रिंट है, ने जीन की संरचना समझने, आनुवंशिक बीमारियों के इलाज और जैव प्रौद्योगिकी क्रांति को जन्म दिया। वॉटसन ने इसे “जीवन के रहस्यों का अनावरण” कहा।
बाद का करियर: लैब का परिवर्तन और वैश्विक प्रभाव
डीएनए खोज के बाद वॉटसन ने कई प्रभावशाली किताबें लिखीं, जिनमें बेस्टसेलर संस्मरण “द डबल हेलिक्स” (1968) शामिल है। उन्होंने मानव जीनोम प्रोजेक्ट को निर्देशित किया, जो मानव आनुवंशिक कोड को मैप करने का ऐतिहासिक प्रयास था। 1968 में, उन्होंने कोल्ड स्प्रिंग हार्बर लेबोरेटरी का निर्देशन संभाला, जो लॉन्ग आइलैंड पर एक छोटी और विवादास्पद संस्था थी। वॉटसन ने इसे विश्व के प्रमुख सूक्ष्मजीव विज्ञान केंद्रों में बदल दिया। उन्होंने युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित किया और चिकित्सा अनुसंधान के लिए धन जुटाया।
वे 1990 के दशक में यूएस नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ में मानव जीनोम प्रोजेक्ट के सह-संस्थापक बने। उनके प्रयासों से आनुवंशिक परीक्षण, व्यक्तिगत चिकित्सा और जैव प्रौद्योगिकी में प्रगति हुई। वॉटसन ने कहा था कि आनुवंशिक अनुसंधान से असहज परिणाम आ सकते हैं, लेकिन उन्हें दबाना नहीं चाहिए।
विवाद और आलोचना: नस्लवाद और लिंगवाद के आरोप
वॉटसन का करियर विवादों से अछूता नहीं रहा। 2007 में, उन्होंने लंदन के टाइम्स को दिए साक्षात्कार में अफ्रीकी लोगों की बुद्धि को “हमारी जैसी नहीं” बताते हुए नस्लीय सिद्धांतों को बढ़ावा दिया, जो लंबे समय से खारिज हो चुके थे। इससे व्यापक आक्रोश फैला और उन्हें कोल्ड स्प्रिंग हार्बर लेबोरेटरी के चांसलर पद से इस्तीफा देना पड़ा। उन्होंने माफी मांगी, लेकिन 2019 में एक वृत्तचित्र में समान टिप्पणियां दोहराईं, जिसके बाद लैब ने उनके सम्मानित प्रोफेसर पद के खिताब को रद्द कर दिया।
उन्हें नारीवादी विचारों पर भी आलोचना झेलनी पड़ी। हालांकि, उनके समर्थक मानते हैं कि उनकी वैज्ञानिक उपलब्धियां इन विवादों से ऊपर हैं। वॉटसन ने कहा था, “मैं हमेशा सच्चाई की तलाश में रहा, भले ही वह असुविधाजनक हो।”
व्यक्तिगत जीवन और विरासत:
वॉटसन ने 1968 में एलिजाबेथ लुईस विकल्स से विवाह किया, जिनसे उनके दो बेटे—डंकन और रुफस—हुए। वे लॉन्ग आइलैंड में रहते थे। उनके निधन पर वैज्ञानिक समुदाय ने श्रद्धांजलि दी। रूसी एकेडमी ऑफ साइंसेज ने 2015 में उनके नोबेल पदक को लौटाया था, जो नीलामी में बिक गया था।
वॉटसन की विरासत जटिल है—एक ओर डीएनए की खोज ने मानवता को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया, दूसरी ओर उनके विचारों ने नैतिक बहसें छेड़ीं। जैसा कि गार्जियन ने लिखा, यह खोज “चिकित्सा क्रांति का लंबा फ्यूज जलाई।” आज भी, डीएनए की दोहरी कुंडलिनी विज्ञान का प्रतीक बनी हुई है।
