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Jahangirabad: टीन शेड के पीछे बंधे मवेशी

नगर निगम के स्लॉटर हाउस को सीज किए जाने के बावजूद अंदर और बाहर की गतिविधियों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पांच दिन पहले पुलिस और निगम की संयुक्त कार्रवाई के बाद भी परिसर में पाड़े और भैंस रखे होने की तस्वीरें सामने आई हैं, जिससे पूरे मामले की गंभीरता पर संदेह गहराता जा रहा है।

Jahangirabad: सीज के बाद भी चालू दिखा स्लॉटर हाउस

नगर निगम ने जहांगीराबाद स्थित स्लॉटर हाउस को लीज पर देने के कुछ ही दिन बाद इसे सीज कर दिया था। इसके बावजूद मौके पर हालात सामान्य नहीं दिखे। टीन की चादरों से ढके परिसर के भीतर मवेशियों की मौजूदगी यह संकेत दे रही है कि सीज की कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित रह गई है।

Jahangirabad: ट्रक पकड़े जाने से खुली पूरी कड़ी

मामले की शुरुआत 17–18 दिसंबर की रात हुई, जब रुस्तमजी पुलिस आवास के बाहर उत्तर प्रदेश से आया एक ट्रक पकड़ा गया। ट्रक में 26 टन से अधिक माल मुंबई पोर्ट भेजा जा रहा था, जो जहांगीराबाद स्लॉटर हाउस से निकला बताया गया। गोमांस होने की आशंका पर विभिन्न संगठनों ने कंटेनर को रोका, जिसके बाद पुलिस ने सैंपल लेकर जांच के लिए मथुरा की लैब भेजे।

रिपोर्ट के बाद दर्ज हुआ केस, कंपनी सीज

7 जनवरी को लैब रिपोर्ट मिलने के बाद जहांगीराबाद पुलिस ने लाइव स्टॉक कंपनी के खिलाफ गोमांस तस्करी और पशुवध से जुड़ी धाराओं में मामला दर्ज किया। इसके बाद स्लॉटर हाउस को सीज किया गया और बाहर पुलिस का पहरा भी तैनात कर दिया गया।

टीन शेड के पीछे छिपा अलग ही सच

स्लॉटर हाउस के सामने मेट्रो कॉरिडोर के नीचे टीन की चादरों से पूरे इलाके को ढका गया है। बाहर से सब कुछ सामान्य नजर आता है, लेकिन अंदर दर्जनों पाड़े और भैंस बंधी हुई हैं। मवेशियों के शरीर पर सफेद चाक से नंबर लिखे गए हैं। इसके अलावा परिसर में कई कंटेनर और भारी ट्रक भी खड़े दिखाई दे रहे हैं।

कंपनी और प्रबंधन पर उठे सवाल

इस मामले में पुलिस ने असलम कुरैशी और एक कंटेनर चालक को गिरफ्तार किया है। असलम कुरैशी लाइव स्टॉक फूड प्रोसेसर्स प्राइवेट लिमिटेड के चार साझेदारों में शामिल हैं। निगम ने अक्टूबर 2025 में इस कंपनी को स्लॉटर हाउस संचालन के लिए लीज पर दिया था। कंपनी के निदेशक मंडल और इससे जुड़ी अन्य कंपनियों के रिकॉर्ड सामने आने के बाद पूरे नेटवर्क की गहन जांच की मांग उठने लगी है। सीज किए गए स्लॉटर हाउस में मवेशियों की मौजूदगी और भारी वाहनों का खड़ा होना यह दर्शाता है कि निगरानी व्यवस्था में गंभीर खामियां हैं। अब सवाल यह है कि जिम्मेदार अधिकारी इस पूरे मामले पर कब सख्त कदम उठाएंगे।

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