Report by: Yogendra Singh
Jabalpur : मध्य प्रदेश के न्याय के मंदिर, जबलपुर हाईकोर्ट से एक ऐसी हृदयविदारक और हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है जिसने सुरक्षा व्यवस्था और न्याय प्रणाली दोनों को झकझोर कर रख दिया है। कोर्ट रूम नंबर 17 में चल रही सामान्य कार्यवाही उस समय अफरा-तफरी में बदल गई, जब एक याचिकाकर्ता ने जस्टिस हिमांशु जोशी की बेंच के सामने जज की डाइस (मेज) पर एक मानव भ्रूण रख दिया। इस अप्रत्याशित कदम से न केवल वहां मौजूद वकील और कर्मचारी दंग रह गए, बल्कि पूरी अदालत में सन्नाटा पसर गया।
“मेरा बच्चा मर चुका, अब मेरी बारी” – याचिकाकर्ता का दर्दनाक बयान
Jabalpur रीवा निवासी याचिकाकर्ता दयाशंकर पांडे अपनी शिकायत लेकर अदालत पहुंचे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सुनवाई के दौरान अचानक उन्होंने अपने पास सुरक्षित रखा भ्रूण जज के सामने रख दिया और बेहद भावुक होते हुए कहा, “जज साहब, मेरा बच्चा तो मर चुका है, अब शायद मेरी बारी है।” इस गंभीर स्थिति को देखते हुए जस्टिस हिमांशु जोशी ने धैर्य का परिचय दिया और याचिकाकर्ता को सांत्वना देते हुए आश्वासन दिया कि कानून के दायरे में उन्हें उचित न्याय मिलेगा। हालांकि, सुरक्षा की दृष्टि से तत्काल कार्रवाई करते हुए सुरक्षाकर्मियों ने दयाशंकर पांडे और उनकी पत्नी को हिरासत में ले लिया। पुलिस उन्हें सिविल लाइन थाने ले गई है, जहाँ उनसे पूछताछ और समझाइश की जा रही है। मामले की अगली सुनवाई 11 मार्च 2026 को तय की गई है।

हादसे की पृष्ठभूमि: 200 करोड़ का कथित घोटाला और जानलेवा हमला
Jabalpur इस चरम कदम के पीछे की कहानी काफी जटिल और संघर्षपूर्ण है। दयाशंकर पांडे का दावा है कि वह साल 2018 से 2025 के बीच जबलपुर के एक नामी कार शोरूम में अकाउंटेंट के पद पर कार्यरत थे। इस दौरान उन्हें शोरूम प्रबंधन द्वारा किए जा रहे लगभग 200 करोड़ रुपये के कथित वित्तीय फर्जीवाड़े की जानकारी मिली।
जब उन्होंने 2024 में इस भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई और शिकायत दर्ज की, तो उनके और उनके परिवार के ऊपर जानलेवा हमलों का सिलसिला शुरू हो गया। पांडे का आरोप है कि उन्हें रास्ते से हटाने के लिए अब तक तीन बार कार से कुचलने की कोशिश की जा चुकी है।
1 मार्च की वो काली रात और न्याय के लिए दिल्ली तक की दौड़
Jabalpur याचिकाकर्ता के अनुसार, सबसे दुखद घटना 1 मार्च 2026 को रीवा के बैकुंठपुर में हुई। पांडे अपनी गर्भवती पत्नी और डेढ़ साल की मासूम बेटी के साथ बाइक से जा रहे थे, तभी एक अज्ञात कार ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। इस भीषण सड़क हादसे में उनकी पत्नी का गर्भपात (Miscarriage) हो गया। दयाशंकर का कहना है कि इसी हादसे में खोए हुए अपने अजन्मे बच्चे के भ्रूण को वे ‘सबूत’ के तौर पर अदालत लाए थे, क्योंकि उन्हें स्थानीय स्तर पर कोई मदद नहीं मिल रही थी।
न्याय की उम्मीद में दयाशंकर पांडे राष्ट्रपति कार्यालय और सुप्रीम कोर्ट तक का दरवाजा खटखटा चुके हैं। उन्होंने राष्ट्रपति से इच्छा मृत्यु (Euthanasia) की अनुमति भी मांगी है। हालांकि राष्ट्रपति भवन से प्रदेश स्तर पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे, लेकिन पांडे का आरोप है कि प्रभावशाली रसूखदारों के कारण अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। गौरतलब है कि दयाशंकर पांडे का राजनीतिक जुड़ाव भी रहा है और उन्होंने 2024 में रीवा से निर्दलीय लोकसभा चुनाव भी लड़ा था।
Also Read This: Aurangabad: ग्रामीणों ने चंदा जुटाकर खड़ा किया पोस्ट ऑफिस, सरकारी सिस्टम को दिखाई राह

