रिपोर्टर: नीरज गुप्ता
ISRO LVM3 Cryogenic Engine Test Successful : भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक मील का पत्थर हासिल किया है। इसरो ने अपने सबसे वजनी और शक्तिशाली रॉकेट LVM-3 के आगामी सातवें कमर्शियल/ऑपरेशनल मिशन के लिए ‘CE-20 क्रायोजेनिक इंजन’ का अंतिम उड़ान स्वीकार्यता परीक्षण (Flight Acceptance Hot Test) सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। यह महत्वपूर्ण परीक्षण तमिलनाडु के महेंद्रगिरि में स्थित इसरो प्रोपल्शन कॉम्प्लेक्स (IPRC) में आयोजित किया गया।
ISRO LVM3 Cryogenic Engine Test Successful क्या है यह ‘फ्लाइट एक्सेप्टेंस टेस्ट’ और क्यों है जरूरी?
किसी भी रॉकेट को अंतरिक्ष में भेजने से पहले उसके इंजन को हूबहू वास्तविक उड़ान जैसी परिस्थितियों से गुजारा जाता है। इस कड़े परीक्षण का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि इंजन वास्तविक लॉन्चिंग के समय बिना किसी तकनीकी बाधा के सुचारू रूप से काम कर सके। इसरो द्वारा जारी आधिकारिक बयान के मुताबिक, इस टेस्ट के दौरान इंजन की सभी प्रणालियों और मापदंडों का प्रदर्शन पूरी तरह से सटीक और संतोषजनक पाया गया है।
ISRO LVM3 Cryogenic Engine Test Successful गगनयान के मानकों पर खरा उतरा, 8 मिशनों में दिखा चुका है दम
LVM-3 रॉकेट (जिसे पहले GSLV Mk-III के नाम से जाना जाता था) के सबसे ऊपरी हिस्से (अपर स्टेज) को रफ्तार देने के लिए इसी CE-20 क्रायोजेनिक इंजन का इस्तेमाल किया जाता है। यह इंजन 19 टन से लेकर 22 टन तक के थ्रस्ट (आगे धकेलने की क्षमता) पर काम करने के लिए पूरी तरह प्रमाणित है। यह वही भरोसेमंद इंजन है जो चंद्रयान-2, चंद्रयान-3 और तीन बड़े व्यावसायिक अभियानों सहित लगातार 8 सफल मिशनों का गवाह रहा है। इसके अलावा, भारत के महत्वाकांक्षी मानव अंतरिक्ष मिशन ‘गगनयान’ के लिए आवश्यक सभी कड़े सुरक्षा मानकों को भी इसने सफलतापूर्वक पार कर लिया है।
ISRO LVM3 Cryogenic Engine Test Successful पहली बार ‘नोजल सुरक्षा प्रणाली’ का हुआ सफल प्रयोग
इस हालिया परीक्षण की सबसे बड़ी विशेषता इसमें पहली बार ‘नोजल सुरक्षा प्रणाली’ (Nozzle Protection System – NPS) का इस्तेमाल किया जाना रहा। इस अत्याधुनिक तकनीक का परीक्षण 22 टन थ्रस्ट की क्षमता पर किया गया। एनपीएस तकनीक रॉकेट इंजन के नोजल (वह हिस्सा जहाँ से अत्यधिक गर्म गैसें तीव्र गति से बाहर निकलती हैं) को टेस्ट के दौरान सुरक्षित रखती है। इसकी मदद से अत्यधिक ऊंचाई जैसी जटिल परिस्थितियों का परीक्षण बेहद कम संसाधनों और अधिक समय के लिए आसानी से किया जा सकता है।

