By: Ravindra Sikarwar
पाकिस्तान में हमास और लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के नेताओं की हालिया मुलाकात ने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। इस घटना से पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के समर्थन से वैश्विक जिहादी नेटवर्क के मजबूत होने के संकेत मिल रहे हैं, जिससे भारत सहित कई देशों में बड़े हमलों की आशंका जताई जा रही है।
बैठक का विवरण और वीडियो सबूत
सोशल मीडिया पर वायरल एक पुराने लेकिन हालिया सामने आए वीडियो में हमास के वरिष्ठ कमांडर नाजी जहीर को पाकिस्तान के गुजरांवाला शहर में लश्कर-ए-तैयबा के एक आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में देखा गया है। वे लश्कर के कमांडर राशिद अली संधु के साथ मंच साझा करते नजर आ रहे हैं। यह कार्यक्रम पाकिस्तान मारकजी मुस्लिम लीग (PMML) नामक संगठन द्वारा आयोजित बताया जा रहा है, जो लश्कर से जुड़ा माना जाता है।
यह मुलाकात गुजरांवाला में एक कथित लश्कर कैंप में हुई, जो पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) से जुड़े आतंकी तत्वों का केंद्र है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सार्वजनिक मुलाकात दोनों संगठनों के बीच बढ़ते सहयोग का खुला प्रदर्शन है।
आईएसआई की भूमिका और आतंकी संबंध
पाकिस्तान लंबे समय से आतंकी संगठनों को पनाह देने और समर्थन देने के आरोपों का सामना कर रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, आईएसआई हमास के लड़ाकों को गुप्त रूप से प्रशिक्षण और संसाधन उपलब्ध करा रही है। जबकि पश्चिमी देश हमास को अलग-थलग करने की कोशिश कर रहे हैं, पाकिस्तान उसे सुरक्षित ठिकाना और सहायता दे रहा है।
यह नया गठबंधन पहले से मौजूद खतरे को और गंभीर बना रहा है। पहले भी हमास के नेताओं के PoK में लश्कर और जैश-ए-मोहम्मद के कैंपों में मौजूदगी की खबरें आई हैं। सुरक्षा विश्लेषकों का कहना है कि आईएसआई के निर्देशन में यह जिहादी नेटवर्क भारत में बड़े हमलों की साजिश रच सकता है, जैसा कि पहले के आतंकी घटनाओं में देखा गया है।
सुरक्षा चिंताएं और संभावित खतरे
इस मुलाकात से भारत में आतंकी हमलों की आशंका बढ़ गई है। विशेष रूप से कश्मीर और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों को निशाना बनाए जाने की संभावना जताई जा रही है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी यह घटना चिंता का विषय बनी हुई है, क्योंकि यह वैश्विक जिहादी समूहों के बीच समन्वय को दर्शाती है।
भारतीय खुफिया एजेंसियां अब आईएसआई और इन संगठनों की गतिविधियों पर करीबी नजर रख रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान का यह रवैया क्षेत्रीय स्थिरता के लिए बड़ा खतरा है और इसे रोकने के लिए कड़े कदम उठाने की जरूरत है।
यह विकास एक बार फिर साबित करता है कि आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में पाकिस्तान की भूमिका संदिग्ध बनी हुई है।

