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by-Ravindra Sikarwar

तेहरान: ईरान की संसद ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने के एक प्रस्ताव को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी है। यह निर्णय ईरान के परमाणु ठिकानों (फोर्डो, नटांज़ और इस्फ़हान) पर हुए अमेरिकी हवाई हमलों की सीधी जवाबी कार्रवाई के तौर पर लिया गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल और गैस शिपिंग मार्ग है। इस संसदीय निर्णय से वैश्विक आर्थिक उथल-पुथल मच सकती है, क्योंकि यह संघर्ष को एक विनाशकारी मोड़ पर ले जा सकता है। हालांकि, इस नाकाबंदी को लागू करने का अंतिम अधिकार ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के पास है, जिसने अभी तक इसे प्रभावी करने के लिए कोई औपचारिक आदेश जारी नहीं किया है।

अमेरिकी प्रतिक्रिया और अंतर्राष्ट्रीय अपील:
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ईरानी कदम को तत्काल “आर्थिक आत्महत्या” करार दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि जलडमरूमध्य को बंद करने पर अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की ओर से कड़ा सैन्य जवाब दिया जाएगा। रुबियो ने चीन से आग्रह किया है कि वह तेहरान पर अपना प्रभाव इस्तेमाल कर इस नाकाबंदी को रोकने में मदद करे, क्योंकि चीन तेल आयात के लिए इस जलमार्ग पर अत्यधिक निर्भर है।

बाजारों पर तत्काल प्रभाव:
इस खबर के सामने आते ही अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तेल की कीमतें तेजी से बढ़नी शुरू हो गई हैं। शिपिंग कंपनियों ने अपने बेड़े को हाई अलर्ट पर रखा है। विश्लेषकों का अनुमान है कि अगर यह नाकाबंदी होती है, तो तेल की कीमतें 100 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल से काफी ऊपर जा सकती हैं।

पेंटागन की तैयारी:
अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने पूरे क्षेत्र में अपनी सेनाओं को हाई अलर्ट पर रखा है। रिपोर्टों के अनुसार, पेंटागन जलडमरूमध्य को खुला रखने के लिए संभावित नौसैनिक टकरावों की तैयारी कर रहा है। किसी भी लंबी अवधि की नाकाबंदी वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिए एक बड़ा खतरा होगी।

ऐतिहासिक संदर्भ और वर्तमान चुनौतियाँ:
ईरानी संसद का यह निर्णय 1980 के दशक के टैंकर युद्ध के बाद वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए सबसे गंभीर खतरा है। उस समय ईरान और इराक ने अपने लंबे संघर्ष के दौरान वाणिज्यिक शिपिंग को निशाना बनाया था। पश्चिमी एशिया में मौजूदा तनाव ने पहले ही अंतरराष्ट्रीय विमानन और शिपिंग पैटर्न को बाधित कर दिया है। ऐसे समय में जब ऊर्जा बाजार अस्थिर हैं और कई क्षेत्रों में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहा है, होर्मुज की नाकाबंदी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक अभूतपूर्व चुनौती होगी।

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