by-Ravindra Sikarwar
हाल ही में ईरान के परमाणु ठिकानों पर हुए अमेरिकी हवाई हमलों ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में गहरी चिंता पैदा कर दी है। इस घटना के बाद विभिन्न देशों और संगठनों की प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही हैं, जिनमें संयुक्त राष्ट्र और रूस ने तनाव कम करने की अपील की है, जबकि इज़राइल ने अमेरिकी हस्तक्षेप का स्वागत किया है।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव की चेतावनी और कूटनीति का आह्वान:
संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने इस स्थिति को एक “खतरनाक मोड़” बताया है। उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने और कूटनीति के रास्ते पर लौटने का आग्रह किया है। संयुक्त राष्ट्र का मानना है कि इस बढ़ते संघर्ष से क्षेत्रीय और वैश्विक शांति को गंभीर खतरा हो सकता है, और इसलिए बातचीत के माध्यम से समाधान खोजना अत्यंत महत्वपूर्ण है। महासचिव ने चेतावनी दी कि अगर तनाव को तुरंत कम नहीं किया गया, तो इसके विनाशकारी परिणाम हो सकते हैं।
रूस का रुख: तनाव कम करने की अपील:
रूस ने भी इस बढ़ते तनाव पर अपनी चिंता व्यक्त की है। रूस ने दोनों पक्षों से “बढ़ती हुई स्थिति” से बचने और संयम बरतने का आग्रह किया है। रूस मध्य पूर्व में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी रहा है और वह इस क्षेत्र में किसी भी बड़े संघर्ष के खिलाफ है, क्योंकि इसका सीधा प्रभाव उसकी अपनी सुरक्षा और आर्थिक हितों पर पड़ सकता है। रूसी विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर सभी संबंधित पक्षों से बातचीत के माध्यम से समाधान खोजने का आह्वान किया है।
इज़राइल का स्वागत: अमेरिकी हस्तक्षेप का समर्थन
दूसरी ओर, इज़राइल ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर अमेरिकी हमलों का खुले तौर पर स्वागत किया है। इज़राइली अधिकारियों ने अमेरिकी हस्तक्षेप को ईरान के परमाणु हथियार कार्यक्रम को रोकने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। इज़राइल लंबे समय से ईरान को अपनी सुरक्षा के लिए एक बड़े खतरे के रूप में देखता रहा है, और उसका मानना है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को हर कीमत पर रोका जाना चाहिए। अमेरिकी भागीदारी को इज़राइल अपने रणनीतिक हितों के अनुरूप देखता है और इसे अपनी सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण समर्थन मानता है।
आगे की राह:
इन अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रियाओं से स्पष्ट है कि ईरान-इज़राइल संघर्ष ने एक संवेदनशील चरण में प्रवेश कर लिया है। एक ओर जहां कुछ देश तनाव कम करने और कूटनीति के माध्यम से समाधान खोजने की वकालत कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ देश सैन्य कार्रवाई को एक आवश्यक कदम मान रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या अंतर्राष्ट्रीय समुदाय इस बढ़ते संकट को रोकने में सफल होता है, या क्षेत्र एक बड़े संघर्ष की ओर अग्रसर होता है।
