By: Ravindra Sikarwar
उज्जैन: भगवान महाकाल की नगरी उज्जैन एक बार फिर आध्यात्मिक रंग में रंग गई है। विक्रमोत्सव के दशहरा मैदान में सोमवार सुबह से ही अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव-2025 की रौनक देखते ही बन रही है। तीन दिवसीय इस महोत्सव (1 से 3 दिसंबर) का शुभारंभ मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दीप प्रज्वलन और मंत्रोच्चार के बीच किया। इस मौके पर देश-विदेश के सैकड़ों संत-महात्मा, हजारों की संख्या में स्कूली बच्चे, बटुक और आम श्रद्धालु उपस्थित रहे।
सुबह करीब नौ बजे जब मुख्यमंत्री मंच पर पहुंचे तो पूरा पांडाल “जय श्री कृष्ण” और “हर-हर महादेव” के जयकारों से गूंज उठा। मंच पर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती, महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी, केंद्रीय मंत्री सावित्री ठाकुर, प्रदेश के संस्कृति मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने उद्बोधन में कहा कि भगवद्गीता केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला और कर्मयोग का सबसे सरल-सटीक मार्गदर्शक है। उन्होंने घोषणा की कि मध्य प्रदेश सरकार बहुत जल्द राज्य के हर स्कूल में भगवद्गीता को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाएगी। डॉ. यादव ने कहा, “गीता हर बच्चे के बस्ते में होनी चाहिए, ताकि बचपन से ही उन्हें सत्य, धर्म और कर्म की सही समझ मिले। आज का युवा जब गीता पढ़ेगा तो नशे और अवसाद से दूर रहेगा, उसका जीवन संयम और संस्कारों से भरा होगा।”
उन्होंने आगे कहा कि उज्जैन में महाकाल की कृपा और गीता के संदेश का अनुपम संगम हो रहा है। यह आयोजन सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारतीय संस्कृति और जीवन दर्शन को पहुंचाने का माध्यम बनेगा। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि प्रदेश के सभी 55 जिलों में एक साथ 1 से 3 दिसंबर तक गीता जयंती के उपलक्ष्य में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें सामूहिक गीता पाठ, शोभायात्रा, भजन-कीर्तन और प्रवचन प्रमुख हैं।
महोत्सव के पहले दिन की सबसे बड़ी आकर्षण रही 11 हजार से ज्यादा स्कूली बच्चों और बटुकों द्वारा एक साथ किया गया भगवद्गीता के 700 श्लोकों का सामूहिक पाठ। दशहरा मैदान पर बिछी विशाल सफेद चादर पर बैठे बच्चे जब एक स्वर में “कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन” जैसे श्लोक बोल रहे थे तो माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो गया। कई बच्चों की आंखों में आंसू थे तो कई के चेहरे पर गर्व की चमक।
मंच पर उपस्थित शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज ने कहा कि गीता युद्ध के मैदान में अर्जुन को दिया गया संदेश आज भी हर इंसान के अंतर्मन के युद्ध को शांत करने की क्षमता रखता है। उन्होंने मुख्यमंत्री की पहल की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए कहा कि जब सरकार और संत समाज मिलकर चलेंगे तो भारत फिर विश्वगुरु बनेगा।
आयोजन में विदेशी श्रद्धालुओं की उपस्थिति भी खास रही। अमेरिका, कनाडा, रूस, जर्मनी और मॉरीशस से आए भक्तों ने गीता के श्लोक संस्कृत में सुनाकर सबको आश्चर्यचकित कर दिया। एक रूसी महिला भक्त ने तो हिंदी में ही गीता के श्लोक सुनाए, जिस पर पूरा पांडाल तालियां बजाने पर मजबूर हो गया।
तीन दिन तक चलने वाले इस महोत्सव में रोज सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक प्रवचन, भजन संध्या, गीता प्रश्नोत्तरी, चित्रकला प्रतियोगिता और सांस्कृतिक कार्यक्रम होते रहेंगे। दूसरे दिन मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और तीसरे दिन उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी शिरकत करेंगे।
महोत्सव स्थल पर जगह-जगह गीता के श्लोकों की होर्डिंग्स, एलईडी स्क्रीन पर चल रहे गीता-सार के वीडियो और किताबों के स्टॉल सजाए गए हैं। प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं, वहीं स्वयंसेवी संस्थाओं ने अन्नक्षेत्र शुरू किया है जहां तीन दिन तक निःशुल्क प्रसाद वितरित होगा।
उज्जैन में गीता महोत्सव की यह परंपरा पिछले कई वर्षों से चली आ रही है, लेकिन इस बार राज्य सरकार के पूर्ण सहयोग और मुख्यमंत्री की व्यक्तिगत रुचि से इसका स्वरूप वास्तव में अंतरराष्ट्रीय हो गया है। आने वाले दिनों में यह आयोजन न सिर्फ मध्य प्रदेश बल्कि पूरे देश के लिए एक नजीर बनेगा कि किस तरह प्राचीन ग्रंथों को आधुनिक पीढ़ी तक सरल और आकर्षक ढंग से पहुंचाया जा सकता है।
