By: Ravindra Sikarwar
गुजरात के राजकोट जिले के जसदान तहसील के अटकोट क्षेत्र में एक ऐसी घटना घटी है, जो समाज के अंतस को झकझोर देने वाली है। यहां 7 वर्षीय एक मासूम बालिका पर एक राक्षसी व्यक्ति ने बलात्कार का प्रयास किया और विफल होने पर लोहे की रॉड से उसके निजी अंगों पर हमला बोल दिया। यह घटना 4 दिसंबर की सुबह की है, जब बालिका अपने परिवार के साथ खेतों में खेल रही थी। इस जघन्य अपराध ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है और 2012 के निर्भया कांड की भयावह यादें ताजा कर दी हैं। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या हमारी व्यवस्था ऐसी घटनाओं को रोक पाने में सक्षम है?
घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय निवासियों में आक्रोश की लहर दौड़ गई। बालिका के माता-पिता दाहोड़ जिले के निवासी हैं, जो राजकोट में हिस्सेदारी पर खेती करके गुजारा करते हैं। वे मजदूर वर्ग से ताल्लुक रखते हैं और अपनी साधारण जिंदगी में कभी सोचा भी न होगा कि उनका नन्हा फूल इतने क्रूर तरीके से कुचला जाएगा। सुबह के समय बालिका खेतों के पास खेल रही थी, तभी आरोपी रामसिंह तेजसिंह ने मौका देखकर उसे एक सुनसान जगह पर ले गया। रामसिंह मध्य प्रदेश का निवासी है, शादीशुदा है और पड़ोसी खेत में मजदूरी करता था। पुलिस के अनुसार, उसने पहले बालिका के साथ बलात्कार की कोशिश की, लेकिन जब वह सफल न हो सका, तो गुस्से में आकर लोहे की रॉड को उसके निजी अंगों में घुसेड़ दिया। यह हमला इतना बर्बरतापूर्ण था कि बालिका गंभीर रूप से घायल हो गई और खून से लथपथ होकर वहीं गिर पड़ी।
माता-पिता जब लौटे तो उनकी बेटी की ऐसी दर्दनाक हालत देखकर वे सदमे में आ गए। उन्होंने तुरंत शोर मचाया और आसपास के लोगों की मदद से बालिका को राजकोट के एक अस्पताल पहुंचाया। चिकित्सकों ने बताया कि चोटें बेहद गंभीर हैं, लेकिन सौभाग्य से बालिका अब स्थिर है और जल्द ही अस्पताल से छुट्टी मिल जाएगी। डॉक्टरों की टीम ने उसे विशेष देखभाल दी और सर्जरी के माध्यम से घावों का इलाज किया। फिर भी, इस घटना के शारीरिक और मानसिक आघात से उबरना बालिका के लिए वर्षों का सफर होगा। उसके माता-पिता ने बताया कि वे अपनी बेटी की सुरक्षा को लेकर हमेशा सतर्क रहते थे, लेकिन ग्रामीण इलाकों में ऐसी घटनाएं होने से परिवारों में भय का माहौल बन जाता है।
पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लिया और तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी। राजकोट के पुलिस अधीक्षक विजय सिंह गुर्जर के नेतृत्व में दस विशेष टीमें गठित की गईं। उन्होंने आसपास के गांवों में सीसीटीवी फुटेज खंगाले, संदिग्धों से पूछताछ की और अंत में बालिका की पहचान पर आधारित फोटो से आरोपी को पकड़ लिया। बालिका ने अस्पताल के बेड से ही रामसिंह की तस्वीर देखकर उसे पहचान लिया, जो अपराध की पुष्टि करने वाली महत्वपूर्ण कड़ी साबित हुई। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया और अपराध में प्रयुक्त लोहे की रॉड को जब्त कर लिया। रामसिंह को आज अदालत में पेश किया जाएगा, जहां पुलिस सात दिनों का रिमांड मांग रही है। फॉरेंसिक टीम की मदद ली जा रही है ताकि साक्ष्य मजबूत हो सकें। अधिकारीयों का कहना है कि चार्जशीट जल्द दाखिल की जाएगी और न्यायिक प्रक्रिया को तेजी से पूरा किया जाएगा।
यह घटना न केवल एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि पूरे समाज के लिए एक चेतावनी है। 2012 के निर्भया कांड के 13 वर्ष बाद भी, जहां एक 23 वर्षीय छात्रा को बस में घसीटकर लोहे की रॉड से मार-मार कर हत्या कर दी गई थी, आज भी निर्दोष बच्चियां सुरक्षित नहीं हैं। निर्भया मामले ने देशव्यापी आंदोलन को जन्म दिया था, जिसके परिणामस्वरूप कठोर कानून जैसे पॉस्को एक्ट और फास्ट-ट्रैक कोर्ट बने, लेकिन अमल की कमी से ये अपराध थम नहीं रहे। गुजरात जैसे विकसित राज्य में भी ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा है। विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा, जागरूकता अभियान और सख्त निगरानी की जरूरत है। एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार, 2024 में ही बालिकाओं पर यौन अपराधों की संख्या में 15 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो चिंताजनक है।
समाजसेवी संगठनों ने इस घटना की निंदा की है और सरकार से मांग की है कि आरोपी को फांसी दी जाए। बालिका के परिवार को आर्थिक और मनोवैज्ञानिक सहायता प्रदान करने की भी अपील की जा रही है। यह समय है जब हम सब मिलकर सोचें कि क्या हमारी बेटियां सुरक्षित हैं? क्या कानून केवल कागजों तक सीमित रह गए हैं? इस तरह की घटनाएं हमें मजबूर करती हैं कि हम सतर्क रहें और बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दें। आशा है कि न्याय जल्द मिलेगा और ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
