by-Ravindra Sikarwar
जम्मू: नियंत्रण रेखा (LoC) पर भारतीय सेना की सतर्कता ने एक बार फिर रंग दिखाया है। जम्मू-कश्मीर के राजौरी सेक्टर में देर रात एक घुसपैठ की कोशिश को विफल करते हुए सेना ने दो पाकिस्तानी आतंकियों को ढेर कर दिया। यह कार्रवाई संभावित हमले को रोकने में सफल रही, जो क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच सुरक्षा बलों की सतत सजगता का प्रतीक है।
घटना का पूरा विवरण:
घटना बुधवार रात करीब 2 बजे राजौरी जिले के नौशेरा उप-क्षेत्र में LoC के पास हुई। खुफिया सूत्रों के आधार पर सेना को पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) से दो-तीन आतंकियों के घुसपैठ की जानकारी मिली थी। ये आतंकी हथियारों और विस्फोटकों से लैस थे, और उनका उद्देश्य घाटी में घुसकर नागरिकों या सुरक्षा बलों पर हमला करना था।
सेना की 9वीं इन्फैंट्री ब्रिगेड के तहत तैनात सैनिकों ने तुरंत घेराबंदी की। अंधेरे का फायदा उठाने की कोशिश में आतंकियों ने गोलीबारी शुरू कर दी, लेकिन भारतीय सैनिकों ने जवाबी कार्रवाई में उन्हें घेर लिया। लगभग 30 मिनट की मुठभेड़ के दौरान दो आतंकियों को मार गिराया गया। तीसरा आतंकी अंधेरे का फायदा उठाकर भागने में सफल रहा, लेकिन सेना ने उसके पीछा करने का अभियान जारी रखा।
मारे गए आतंकियों के पास से एके-47 राइफलें, ग्रेनेड, विस्फोटक सामग्री और पाकिस्तानी सैन्य निशान वाली वर्दी बरामद हुई। प्रारंभिक जांच में इनका संबंध लश्कर-ए-तैयबा जैसे प्रतिबंधित संगठनों से बताया जा रहा है।
सुरक्षा बलों की भूमिका:
यह कार्रवाई जम्मू-कश्मीर में LoC पर तैनात भारतीय सेना, बीएसएफ और अन्य सुरक्षा इकाइयों की संयुक्त प्रयासों का नतीजा है। सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि खुफिया एजेंसियों की सतत निगरानी और तकनीकी उपकरणों जैसे ड्रोन और नाइट विजन कैमरों ने घुसपैठियों को समय रहते पहचानने में मदद की। “हमारी सीमाओं की रक्षा के लिए सैनिक 24×7 सतर्क रहते हैं। यह घटना हमारी दृढ़ता का प्रमाण है,” उन्होंने कहा।
पिछले कुछ महीनों में LoC पर घुसपैठ की कई कोशिशें नाकाम हो चुकी हैं, जो दर्शाता है कि पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद अभी भी सक्रिय है। इस साल अब तक 15 से अधिक ऐसी घटनाओं को विफल किया गया है, जिसमें 20 से ज्यादा आतंकी मारे गए हैं।
क्षेत्रीय संदर्भ और तनाव:
जम्मू-कश्मीर में LoC पर तनाव हाल के वर्षों में बढ़ा है, खासकर 2019 के बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद। पाकिस्तान की ओर से समर्थित आतंकी संगठन बार-बार घुसपैठ की कोशिश करते हैं, जिसका उद्देश्य घाटी में अस्थिरता फैलाना है। यह घटना ऐसे समय हुई है जब भारत-पाकिस्तान संबंध पहले से ही नाजुक हैं, और कश्मीर मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय ध्यान केंद्रित है।
स्थानीय निवासियों ने सेना की तारीफ की है, लेकिन उन्होंने सीमा क्षेत्रों में विकास और सुरक्षा उपायों को मजबूत करने की मांग भी की। राजौरी और पूंछ जैसे जिलों में LoC के पास रहने वाले लोग अक्सर ऐसी घटनाओं से प्रभावित होते हैं, जिससे उनकी दैनिक जिंदगी पर असर पड़ता है।
प्रशासनिक और राजनीतिक प्रतिक्रिया:
घटना पर जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सेना को बधाई दी और कहा कि “सीमा सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है।” केंद्र सरकार ने इस कार्रवाई को “उत्कृष्ट” बताते हुए सैनिकों को सम्मानित करने का ऐलान किया। विपक्षी दलों ने भी सेना के प्रयासों का समर्थन किया, लेकिन उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ कठोर कूटनीतिक कदम उठाने की मांग की।
भारतीय सेना ने LoC पर गश्त बढ़ा दी है और पड़ोसी क्षेत्रों में संयुक्त अभियान चलाने का फैसला किया है। साथ ही, स्थानीय लोगों को संदिग्ध गतिविधियों की सूचना देने के लिए जागरूक किया जा रहा है।
यह सफल कार्रवाई न केवल एक घुसपैठ को रोकने में सफल रही, बल्कि भारतीय सेना की पेशेवरता और समर्पण को भी रेखांकित करती है। जम्मू-कश्मीर में शांति और स्थिरता के लिए सुरक्षा बलों की सतर्कता अत्यंत आवश्यक है। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए भारत को अपनी खुफिया क्षमताओं को और मजबूत करना होगा।
इस बीच, सेना के शहीदों को सलाम करते हुए, देश एकजुट होकर आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई जारी रखेगा।
